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'रोमा': ये सिंपल सी आर्ट फिल्म क्यों 2018-19 के अवॉर्ड सीज़न में हर जगह जीतती चली गई?

'ऑस्कर वाली फ़िल्में' सीरीज [सीज़न-2] में दूसरी फिल्म है डायरेक्टर एल्फांज़ो क्यूरॉन की Roma.

“हम अकेली हैं.
चाहे वो (मर्द) तुम्हे कुछ भी कहे
हम औरतें हमेशा अकेली ही हैं.”

– शराब के नशे में घर लौटी, पीड़ा से भरी सोफिया कार से निकलते हुए घर की नौकरानी क्लीयो से कहती है. चार बच्चों की मां सोफिया को उसके डॉक्टर पति ने दूसरी स्त्री के लिए छोड़ दिया है और क्लीयो के गर्भवती होने का पता चलते ही उसका बॉयफ्रेंड फर्मिन मार्शल आर्ट्स के पैशन की आड़ में जिम्मेदारी छोड़कर भाग गया है.

घर के कुत्ते बोर्रास के मल से खराब होने वाले मार्बल टाइल्स के फर्श को क्लीयो पानी से धोकर साफ कर रही है. फिल्म इससे ओपन होती है. सिंगल टेक. लंबा शॉट. चार मिनट तक कैमरा सिर्फ आंगन को देखता रहता है. वहीं आ रहे सर्फ के झागदार पानी में, ऊपर आकाश से गुजर रहे विमान का प्रतिबिंब दिखता है. सब छवियां ब्लैक एंड वाइट हैं. क्लीयो और ये कलात्मकता ही फिल्म के दो आधार हैं.

क्लीयो एक भोली, शर्मीली, समर्पित नौकरानी है जो मैक्सिको सिटी के रोमा इलाके में एक मध्यम/उच्च-मध्यमवर्गीय परिवार में काम करती है. घर में उसकी मालकिन है, उसका डॉक्टर पति है, चार बच्चे हैं और उनकी बुजुर्ग नानी है. क्लीयो के अलावा घर में एक और नौकरानी है. वे दोनों इंडिजिनस हैं, यानी स्पेन के आक्रमण और कब्जे से बहुत पहले जो मूल निवासी मैक्सिको में रहा करते थे, वो लोग. वो घर का सारा काम करती है. बच्चों को नींद से जगाने से लेकर, हर वक्त उनकी सेफ्टी की चिंता करते हुए रात को सोने तक उनकी सेवा करती है. पत्नी से अलग हो रहा घर का मालिक क्लीयो के काम को लेकर किच-किच करता है तो भी वो बिना शिकायत किए सुनती है. घर में बोर्रास जगह-जगह मल करता है, उसे साफ करती है. निजी जिंदगी में निर्दोष मन से जितना मिलता है उसी में संतोष करती है.

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उसे कष्ट ही ज्यादा मिलते हैं. जैसे, जिस लड़के से उसका आकर्षण होता है, संबंध बनते हैं, उसे वो जब सिनेमाघर में बताती है कि मां बनने वाली है तो वो बाथरूम का बोलकर जाता है और लौटता ही नहीं. मैक्सिको में सामाजिक असंतोष होता है, छात्रों का प्रोटेस्ट पुलिस के दमन के कारण हिंसक रूप ले लेता है तो बच्चे के लिए पालना खरीदने गई क्लीयो की पानी की थैली फट जाती है. उसका दुख कहीं थमने का नाम नहीं लेता. फिल्म के आखिर में, घर के बच्चे समंदर में डूबने लगते हैं तो क्लीयो को तैरना नहीं आता, फिर भी मजबूर होकर या स्नेहवश पानी में प्रवेश कर जाती है.

ये पात्र ‘लीबो’ पर बेस्ड है. ‘रोमा’ के डायरेक्टर एल्फांज़ो क्यूरॉन जब छोटे थे तब लीबो उनके घर की मेड हुआ करती थीं. उनके लिए मां जैसी. इस आत्मकथात्मक फिल्म में उन्होंने अपने बचपन की यादों, लीबो के दुलार और उनके जीवन के संघर्षों को दिखाने की कोशिश की है. इस फिल्म को बनाने का विचार उनको सबसे पहले 2006 में आई अपनी डिस्टोपियन ड्रामा फिल्म ‘चिल्ड्रेन ऑफ मैन’ को शूट करने के बाद आया था. ‘रोमा’ को लिखने और डायरेक्ट करने के अलावा को-एडिटिंग भी उन्होंने ही की है. सिनेमैटोग्राफी भी खुद की है क्योंकि उनके दोस्त और तीन बार के ऑस्कर विजेता मैक्सिकन सिनेमैटोग्राफऱ इमैनुएल लुबेज़्की किसी दूसरे प्रोजेक्ट में व्यस्त थे. फिल्म को-प्रोड्यूस भी उन्होंने की है.

2019 के अवॉर्ड सीजन में क्यूरॉन की इस फिल्म के छाए रहने की कई वजहें हैं. सिनेमा में प्रतिनिधित्व के मामले में अश्वेत और दलितों से भी बुरी स्थिति संभवतः क्लीयो जैसे इंडिजिनस पात्रों या इंडियन्स (अमेरिका के मूल निवासी) की है क्योंकि उनके फीचर्स उन्हें कमर्शियल ज़ोन में उपभोग की वस्तु नहीं बना पाते. नशीला एंटरटेनमेंट बनाने वाला सिनेमा उन्हें कभी नहीं स्वीकार करता. ऐसे में क्यूरॉन द्वारा समाज के इस सबसे कमजोर पात्र को अपनी कहानी के केंद्र में बिना किसी समझौते के रखना आलोचकों को लुभा गया है. क्लीयो के रोल में किसी जानी-मानी एक्ट्रेस के नहीं लिया गया, बल्कि एक साल की खोज के बाद नॉन-एक्ट्रेस यालित्जा आपारासियो को लिया गया जो क्यूरॉन को एकदम लीबो जैसी लगीं.

साथ ही कहानी का मुख्य पात्र एक ग्लैमरहीन नौकरानी का है जो कलात्मक मायनों में प्योरिस्ट अप्रोच है, जो आज के टाइम में साहसिक है. ऊपर से फिल्म का प्रस्तुतिकरण बहुत सादा है. ऐसा रखा गया है जो आर्ट के ज़ोन में ज्यादा पड़ता है और सरल-मनोरंजक सिनेमा के जोन में कम. फिल्म को पूरा ब्लैक एंड वाइट में बनाया गया है जो ये जानते हुए फिर साहसिक है कि कोई स्टूडियो किसी नॉन-कलर फिल्म में पैसा नहीं लगाएगा क्योंकि वो लाभदायक एंटरटेनमेंट नहीं है. हालांकि ये सब साहसिक होने के साथ क्यूरॉन की चतुर रणनीति भी है, पुरस्कार जीतने की.

गर्भवती क्लीयो. घर की बुजुर्ग नानी उसे लेकर बच्चे का पालना देखने एक शोरूम में आए हैं. बाहर सड़कों पर आंदोलन हिंसक हो रहा है. ये दोनों ठिठक जाते हैं जब एक आदमी के पीछे कुछ लोग पिस्टल लेकर अंदर घुस आते हैं और उसे मार देते हैं. उनमें से एक फर्मिन होता है. उसकी पिस्टल क्लीयो की ओर होती है. क्लीयो को देखकर वो जड़ हो जाता है और क्लीयो उसे देखकर.
गर्भवती क्लीयो को लेकर घर की बुजुर्ग नानी होने वाले बच्चे का पालना देखने एक शोरूम आए हैं. बाहर सड़कों पर आंदोलन हिंसक हो रहा है. तभी आदमी के पीछे कुछ लोग पिस्टल लेकर अंदर घुस आते हैं और उसे मार देते हैं. इनमें से एक फर्मिन होता है. उसकी पिस्टल क्लीयो की ओर होती है. लेकिन उसे देखते ही वो जड़ हो जाता है और क्लीयो उसे देखकर शॉक रह जाती है.

इन सबके अलावा फिल्म का मैक्सिकन भाषा और मैक्सिकन कहानी वाली होना भी एक सम्मोहक पोलिटिकल एलीमेंट है. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के मैक्सिकन मूल के लोगों पर ज़बानी हमले करने और दीवार पॉलिटिक्स करने के बाद स्वतः ही ‘रोमा’ जैसी कहानी बहुत ताकतवर रेफरेंस हो जाती है.

ये फिल्म इस बार तमाम बड़े फेस्टिवल्स में जीतती जा रही है. ब्रिटेन की सबसे बड़ी सिनेमा चैन ‘व्यू’ ने इसे बेस्ट फिल्म का बाफ्टा अवॉर्ड देने के लिए बाफ्टा एकेडमी का बहिष्कार करने की धमकी भी दी है. सिनेमा चैन की आपत्ति ये है कि फिल्म फेस्टिवल्स में रोमा को नामांकन और पुरस्कार बावजूद इसके दिए जा रहे हैं कि इसे मुख्यतौर पर सिनेमाघर के लिए नहीं बल्कि नेटफ्लिक्स की टीवी स्क्रीन्स के लिए बनाया गया है. नेटफ्लिक्स, एमेजॉन जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स अब खुद फिल्में प्रोड्यूस करके बनाने लगे हैं लेकिन मूल तौर पर अपनी छोटी स्क्रीन्स के लिए, ऐसे में इन फिल्मों का सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली फिल्मों के पुरस्कारों में सेंध लगाना थियेट्रिकल मूवीज के लिए नुकसानदायक है. ये बहस बीते दो-तीन सालों में खड़ी हुई है और अभी बहुत विस्तार लेने वाली है.

‘इ तू मामा तांबियान’ और ‘हैरी पॉटर एंड द प्रिज़्नर ऑफ एज़कबान’ जैसी कला/कमर्शियल फिल्मों के डायरेक्टर एलफांज़ो की ये नवीनतम फिल्म ऑस्कर में ‘द फेवरेट’ के साथ सबसे ज्यादा 10 नॉमिनेशन पाने वाली फिल्म है. इससे पहले उन्होंने 2014 में अपनी स्पेस थ्रिलर ‘ग्रैविटी’ के लिए बेस्ट डायरेक्टर का ऑस्कर जीता था. ये अनुपम बात है कि ‘रोमा’ में एक दृश्य है जहां सब बच्चे क्लीयो और नानी के साथ फिल्म देखने जाते हैं. वो होती है अमेरिकी डायरेक्टर जॉन स्टर्जेज़ की 1969 में आई स्पेस फिल्म ‘मरून्ड’. असल में एलफॉन्ज़ो जब बच्चे थे तो लीबो उनको ये फिल्म दिखाने ले गई थी और इसी से प्रेरित होकर उन्होंने बाद में ‘ग्रैविटी’ बनाई.

ऑस्कर 2019 में ‘रोमा’:
10 नामांकन मिले. तीन जीते.

बेस्ट पिक्चर – गेब्रिएला रॉड्रिगेज़ और एलफॉन्ज़ो क्यूरॉन
बेस्ट डायरेक्टर– एलफॉन्ज़ो क्यूरॉन (जीते)
बेस्ट एक्ट्रेस – यालित्जा एपेरिसियो
सपोर्टिंग एक्ट्रेस – मारीना डी टेवीरा
ओरिजिनल स्क्रीनप्ले – एलफॉन्ज़ो क्यूरॉन
फॉरेन लैंग्वेज फिल्म – रोमा (जीते)
सिनेमैटोग्राफी – एलफॉन्ज़ो क्यूरॉन (जीते)
प्रोडक्शन डिजाइन – यूजीनियो केबालेरियो, बारबरा एनरीकेज़
साउंड एडिटिंग – सर्गीयो डियेज़, स्किप लीवसे
साउंड मिक्सिंग – स्किप लीवसे, क्रेग हेनीगन, होजे एनटोनियो गारसिया

सीरीज़ की अन्य फिल्मों के बारे में पढ़ें:
Green Book – ऑस्कर 2019 की सबसे मनोरंजक और पॉजिटिव कर देने वाली फिल्म
The Favourite – क्या होता है जब एक रानी के 17 बच्चे मारे जाते हैं?
A Star Is Born – इसे देखकर किस हिंदी फिल्म की याद आती है?
BlacKkKlansman – एक फिल्म को देखकर ब्लैक लोगों की लिंचिंग की गई फिर भी महान मानी जाती है!
Bohemian Rhapsody – उस रॉकस्टार की कहानी जो एड्स से मरा और लोग रात भर रोए
Black Panther – बच्चों के सुपरहीरो पर बनी ये फिल्म कट्टर आलोचकों को भी क्यों पसंद आई?
Vice – एक ख़ौफनाक पोलिटिकल फिल्म जो हर वोटर को देखनी चाहिए 

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