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कौन से बिल को पास कराने के लिए सरकार और विपक्ष एकसाथ आ गए हैं?

जाति, भारत की राजनीति की सच्चाई है. भारतीय जनता पार्टी ने जाति पर राजनीति की परिपाटी को बदलने में कुछ सफलता तो पाई है, लेकिन वो भी जाति के सच को नकार नहीं पाई है. और जातियों में सबसे बड़े गुट OBC को लेकर तो वो बहुत सतर्क है. यही वजह है कि सोशल मीडिया पर सवर्ण सांसदों को खुलकर ट्रोल किया गया, बावजूद इसके सरकार ने न सिर्फ NEET के ऑल इंडिया कोटे में OBC आरक्षण दिया, बल्कि अब राज्यों को भी अपने यहां OBC सूची में बदलाव करने के हक देने जा रही है.

OBC वोटर्स की संख्या का मान सभी रखने लगे हैं, इसीलिए संसद के मॉनसून सत्र में संभवतः ये अकेला बिल है, जिसका विरोध विपक्ष ने नहीं किया. कांग्रेस ने तो खुलकर कहा कि वो समर्थन में हैं. इसीलिए आज हम यही समझेंगे कि इस बिल में ऐसा क्या खास है कि तीन हफ्ते से झगड़ रहे सत्ता और विपक्ष एकदम से साथ आ गए हैं.

19 जुलाई को संसद का मॉनसून सत्र शुरू हुआ था. अब मॉनसून सत्र का आखिरी हफ्ता चल रहा है. अब तक एक भी दिन ऐसा नहीं गया है, जब संसद में हंगामा ना रहा हो, कामकाज ठीक से हुआ हो, या सत्ता पक्ष औऱ विपक्ष में किसी बात पर ज़रा भी सहमति रही हो. विपक्ष के विरोध और हंगामे के बीच दर्जनभर बिल सरकार पास करा चुकी है. लेकिन फिर एक बिल ऐसा आता है जिस पर विपक्ष भी कहता है कि हम बिल को पूरा समर्थन देंगे. बिल को पास कराएंगे. ये संविधान संशोधन बिल है. आप जानते ही होंगे कि संविधान संशोधन बिल को दो तिहाई बहुमत से पास कराना पड़ता है.

यानी कम से कम राज्यसभा में तो विपक्ष की मदद के बिना ये बिल पास नहीं हो सकता. ऐसे में अगर विपक्ष चाहे तो इस बिल को अटका सकता है, सरकार को दबाव में ला सकती हैं विपक्षी पार्टियां. लेकिन यहां विपक्ष खुद ही कह रहा है कि हम बिल पास करवाएंगे. तो ये क्या बिल है जिस पर सरकार और विपक्ष एक पाले में हैं. दोनों में सहमति है.

आखिर क्या है इस बिल में?

बात कुछ महीने पहले से शुरू होती है. 5 मई 2021. इस दिन सुप्रीम कोर्ट का एक अहम फैसला आना था. महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण पर. महाराष्ट्र में 2018 में देवेंद्र फडणवीस सरकार मराठाओं को OBC कोटे में आरक्षण देने का बिल लेकर आई थी. इस कानून के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में अपील की गई थी. बॉम्बे हाईकोर्ट ने मराठा आरक्षण कानून की संवैधानिक वैधता को सही माना था. हालांकि आरक्षण 16 फीसदी से घटाकर 12 फीसदी कर दिया था. इसके बाद इस कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी. और सुप्रीम कोर्ट में 5 जजों की संवैधानिक पीठ ने इस मामले की सुनवाई की. इसलिए सबकी नज़र थी कि अब सुप्रीम कोर्ट मराठा आरक्षण कानून पर क्या फैसला देता है. क्योंकि ये फैसला राज्यों में आरक्षण के कई और मामलों के लिए भी नज़ीर साबित हो सकता था.

कोर्ट ने शिक्षा और नौकरी में मराठा आरक्षण को असंवैधानिक करार दे दिया है. इसके लिए कोर्ट ने कई वजह बताई. जिनमें एक वजह ये थी कि कोई भी राज्य अपनी तरफ से आरक्षण की सूची में किसी जाति का नाम नहीं जोड़ सकता. चाहे पिछड़े वर्ग का आरक्षण केंद्र को देना हो या राज्य को, इस पर फैसला राष्ट्रीय पिछड़ा आयोग को ही करना है. और पिछड़ी जातियों की लिस्ट सिर्फ राष्ट्रपति ही नोटिफाई कर सकते हैं. इसके साथ ही कोर्ट ने संविधान संशोधन 102 को सही माना. कोर्ट ने कहा कि ये संविधान के बुनियादी ढ़ांचे के विरुद्ध नहीं है.

अब देश में ऐसा होता आया है कि कई जातियों को राज्य की नौकरियों में OBC आरक्षण का लाभ मिलता रहा है, लेकिन केंद्र की नौकरियों में वो जाति OBC में नहीं आती है. कहने का मतलब OBC जातियों को लेकर एक लिस्ट राज्य की होती है और केंद्र की अपनी लिस्ट होती है. इसमें मुमकिन है कि कई जातियां जो राज्य की OBC सूची में हों, वो केंद्र की सूची में ना हों.

मतलब ये है कि राज्यों को अपनी OBC सूची तैयार करने का हक रहा है. और ये हक संविधान से मिलता है. अनुच्छेद 15(4), 15(5) और 16(4) ने राज्य को सामाजिक एवं शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों की सूची की पहचान करने और घोषित करने की शक्ति दी है. फिर ऐसा क्या हो गया कि मराठा आरक्षण के फैसले में सुप्रीम कोर्ट कहता है कि राज्य अपने तरफ से किसी जाति को OBC में नहीं जोड़ सकते. यहां बात आती है संविधान संशोधन 102 की.

2018 में मोदी सरकार संविधान में एक संशोधन लेकर आई थी. संशोधन नंबर 102. इस संशोधन के ज़रिए अनुच्छेद 338बी और 342ए संविधान में जोड़े गए. अनुच्छेद 338B राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की संरचना, कर्तव्यों और शक्तियों के बारे में है. अनुच्छेद 342A राष्ट्रपति को विभिन्न राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों को उल्लेखित करने का अधिकार प्रदान करता है. इसके लिए संबंधित राज्य के राज्यपाल से परामर्श किया जा सकता है.

तो संविधान में इन बदलावों के साथ राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग एक संवैधानिक संस्था बन गई. 102 संविधान संशोधन के बाद से नियम ये हो गया कि राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की सिफारिशों के आधार पर राष्ट्रपति ही नई OBC जातियों की सूची नोटिफाई करेंगे. इससे हुआ ये कि राज्य सरकारों के हाथ बंध गए. पहले जो राज्य सरकारें पिछड़े या अति पिछड़े वर्ग में अपने हिसाब से जातियों को जोड़ लेती थी, अब उस पर सुप्रीम कोर्ट ने संशोधन 102 के आधार पर रोक लगा दी. हमने मराठा आरक्षण के मामले में भी ये देखा.

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि राज्य OBC लिस्ट में नई जाति नहीं जोड़ सकते. हालांकि जब सुप्रीम कोर्ट ने इसकी वजह संविधान संशोधन 102 बताई तो मोदी सरकार फिर से कोर्ट में गई. कोर्ट में रिव्यू पिटीशन डाली. मोदी सरकार ने कोर्ट से कहा कि आप संविधान संशोधन 102 की व्याख्या फिर से करिए, राज्यों को OBC लिस्ट बनाने से रोकने के लिए हम ये संविधान संशोधन नहीं लाए थे. रिव्यू पिटीशन पर अभी कोर्ट का फैसला नहीं आया है.

रिव्यू पिटीशन के बाद भी संविधान में संशोधन की मांग हो रही थी. देवेंद्र फडणवीस समेत कई बीजेपी नेता भी केंद्र से दरख्वास्त कर रहे थे कि संविधान में संशोधन किया जाए और राज्य को OBC जातियां तय करने का हक मिले. गैर-बीजेपी शासित राज्यों से भी ऐसी मांग रही है. इसलिए केंद्र सरकार एक बार फिर से संविधान में संशोधन के लिए बिल लेकर आई है. ये संविधान संशोधन नंबर- 127 होगा.

इसके ज़रिए संविधान के अनुच्छेद 342 A की क्लॉज 1 और 2 में संशोधन होगा. और एक नया क्लॉज 3 जोड़ा जाएगा. 342 A (3) से राज्यों को अपनी OBC सूची तैयार करने का अधिकार मिल जाएगा. इसके अलावा संविधान के अनुच्छेद 366 में क्लॉज 26C और अनुच्छेद 338 में नई क्लॉज B(9) जोड़ी जाएगी. इसके ज़रिए राज्यों को OBC लिस्ट को बिना राष्ट्रीय पिछड़ा आयोग के पास गए सीधे नोटिफाई करने का अधिकार मिल जाएगा.

अगर सरकार ये संशोधन बिल लेकर नहीं आती, और OBC जातियों की सिर्फ केंद्र वाली लिस्ट रहती, राज्यों की खत्म कर दी जाती तो एक बड़ा तबका आरक्षण से वंचित रह जाता. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक अगर OBC की राज्य सूची खत्म कर दी जाए तो 671 जातियों का आरक्षण बंद हो जाएगा, ये कुल OBC का लगभग 5वां हिस्सा है. और अगर ऐसा होता है कि तो इसके नुकसान का कैलकुलेशन बीजेपी ने अच्छी तरह से कर ही लिया होगा. अगले साल यूपी में चुनाव है.

आप जानते ही हैं कि यूपी में आरक्षण और OBC ये दोनों चुनाव में बड़े फैक्टर रहते हैं. और किसी भी हाल में बीजेपी नहीं चाहेगी कि ये दोनों OBC आरक्षण का फैक्टर यूपी चुनाव में उसके खिलाफ जाए. इसलिए बीजेपी ने इस बिल को लाने में फुर्ती दिखाई है. विपक्षी पार्टियां भी इस बिल का विरोध कर खलनायक साबित नहीं होना चाहतीं. इसलिए हर तरफ से समर्थन है.

आज लोकसभा में संविधान संशोधन बिल पेश किया गया है. आपको पता ही है कि संविधान में संशोधन के लिए अनुच्छेद 368 के तहत स्पेशल मेजोरिटी चाहिए होती है. मतलब या तो सदन की कुल संख्या का बहुमत हो या फिर जितने सदस्य वोट कर रहे हों उसका दो तिहाई बहुमत हो. आज बिल पर चर्चा के लिए 4 घंटे अलॉट किए गए थे, लेकिन हंगामे की वजह से बिल पास नहीं हो पाया. हालांकि विपक्षी पार्टियां बिल के पक्ष में इसलिए बिना किसी दिक्कत के ये बिल संसद से पास हो जाएगा. और इस संशोधन को लागू करने केंद्र सरकार अपनी पुरानी गलती दुरुस्त कर लेगी.

देशभर की बड़ी खबरें

विश्व आदिवासी दिवस

विश्व आदिवासी दिवस. अंग्रेज़ी में The International Day of the World’s Indigenous Peoples. सादी अंग्रेज़ी में वर्ल्ड ट्राइबल डे. हर साल 9 अगस्त को मनाया जाता है. ताकि दुनियाभर में आदिवासियों के हितों के लिए जागरूगता को बढ़ाया जा सके. दुनिया भर के आदिवासी समाजों ने हमारे वर्तमान की कीमत चुकाई है. चाहे प्रकृति को दोहन हो या फिर हमारे वक्त की राजनैतिक व्यवस्था, सबसे ज़्यादा प्रभावित हर बार, हर जगह आदिवासी ही हुए. चाहे अफ्रीका के मैदान हों या अमेरिका के धूसर पहाड़. या फिर अमैज़ॉन से लेकर झारखंड तक के जंगल.

1994 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने इसका ऐलान किया तो इस दिन दुनिया भर में आदिवासी हितों की बात करना रवायत बन गया. भारत के आदिवासियों की कहानी भी वही है जो दुनियाभर के आदिवासियों की है – विस्थापन, दमन और कथित आधुनिकता का वो वार, जो सीधे उनकी जड़ों पर होता है. भारत जैसे लोकतंत्रों ने आदिवासियों की संख्या को एक राजनैतिक शक्ति बना दिया है. इसका इस्तेमाल आदिवासियों के हितों के लिए कितना हुआ, ये अलग बहस है. पहले मुख्यमंत्री आदिवासियों के साथ फोटो खिंचवाते थे, अब नाचते हुए वीडियो बनवाते हैं. इन वीडियोज़ को देखिए और सोचिए कि प्रतीकों में बसी हमारी राजनीति आदिवासियों को प्रतीकों के अलावा क्या दे पाई है.

वैसे भारत में आदिवासी अधिकारों के नाम पर जो राजनीति होती है, उसका अभी हाल क्या है, आप मध्यप्रदेश के उदाहरण से समझ सकते हैं. हमारे यहां सरकारें किसी दिन को महत्व देना चाहती हैं, तो उस दिन छुट्टी घोषित कर देती हैं. वो तो मजबूरी है कि 26 जनवरी, 15 अगस्त और 2 अक्टूबर को सरकारी कार्यक्रम रखना पड़ता है. सो मध्यप्रदेश में कमलनाथ सरकार ने विश्व आदिवासी दिवस पर सरकारी छुट्टी घोषित कर दी. मार्च 2020 में ये सरकार गिर गई. ज्योतिरादित्य सिंधिया भाजपा में आए तो शिवराज सत्ता में लौट गए. और शिवराज सरकार ने ये छुट्टी खत्म कर दी.

अब मध्यप्रदेश विधानसभा का मॉनसून सत्र चल रहा है तो कांग्रेस विधायकों ने फिर छुट्टी घोषित करने की मांग की. स्पीकर गिरीश गौतम ने इस मांग पर फौरी इनकार करते हुए कहा, कि इस मुद्दे पर बाद में चर्चा की जाएगी. तो कांग्रेस विधायकों ने सदन से वॉकआउट. तो ये हाल है भारत में आदिवासी हितों और उनपर हो रही राजनीति का.

टोक्यो ओलंपिक से लौटा भारतीय दल

ओलंपिक खेलों के इतिहास में भारत ने इस बार अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दर्ज कराया है. भारतीय दल कुल 7 मेडल लेकर लौटा है. दशकों बाद हमारे हाथ हॉकी में मेडल आया. नीरच चोपड़ा के रूप में हमें इतिहास में पहली बार किसी एथलेटिक ईवेंट में गोल्ड मेडल मिला. खिलाड़ी जिस हवाई अड्डे पर उतर रहे हैं, उसके बाहर भारी भीड़ जुट जा रही है. हमारे नायकों को वैसा ही सम्मान मिल रहा है, जिसके वो हकदार हैं. उम्मीद ही की जा सकती है कि खेलों और खिलाड़ियों के लिए ये प्यार और समर्थन हमेशा बना रहेगा.

ओलंपिक पदक तालिका को एक और तरीके से देखा जाता है. ताकतवर देशों का प्रभाव और संसाधन. अमेरिका एक वक्त निर्विवाद चैंपियन होता था. लेकिन हाल के सालों में चीन ने उसे कड़ी टक्कर दी है. इस बार चीन ने बाज़ी पलट ही दी थी, लेकिन आखिरी समय में अमेरिका ने अपनी लाज बचा ली. 2024 के ओलंपिक खेल होंगे पैरिस में. और तब तक का वक्त बीतेगा तैयारी में. लेकिन अभी वक्त है उत्सव मनाने का. दी लल्लनटॉप परिवार बधाई देता है सभी मेडल विजेताओं को और उन्हें भी, जिन्होंने अपनी पूरी कोशिश की, लेकिन इस बार वो पहले तीन में जगह नहीं बना पाए.

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 9वीं किस्त जारी

प्रधानमंत्री मोदी ने आज प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 9वीं किस्त जारी कर दी. सरकार ने 9 करोड़ 75 लाख किसान हितग्राहियों के खातों में डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर के लिए 19 हज़ार 500 करोड़ रुपए जारी किए. अगर आप इस स्कीम में पात्र हैं और किसी कारण आपकी किस्त नहीं आई, तो आप सभी किस्तों की जानकारी पाने के लिए आगे बताए कदम अपना सकते हैं –

– प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (PM-Kisan) की आधिकारिक वेबसाइट pmkisan.gov.in पर जाएं.

– वेबसाइट के होमपेज पर राइट साइड में दिए ‘Farmers Corner दिखाई देगा.

– Farmers Corner सेक्शन में Beneficiary List के विकल्प पर क्लिक करना होगा.

– नया पेज खुलने पर आपको आधार नंबर, बैंक खाता संख्या या मोबाइल नंबर में से किसी एक विकल्प को चुनना होगा.

– विकल्प के अनुसार डिटेल्स भरने के बाद ‘Get Data’ पर क्लिक करते ही आपको सभी किस्तों की जानकारी मिल जाएगी.


 

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