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मनोज तिवारी के मुताबिक पीएम मोदी न बुद्धिमान हैं, न देशभक्त!

मनोज तिवारी. दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष. अक्सर जब मुंह खोलते हैं, छिछली बातें बोलते हैं. विधानसभा चुनाव में प्रचार के लिए वो छत्तीसगढ़ पहुंचे. वहां सरगुजा नाम का एक जिला है. मनोज वहां एक चुनावी रैली में भाषण दे रहे थे. चुनाव का मौका. यानी, राजनीति और छिछलई का पीक टाइम. ऐसी चीजों में मनोज तिवारी भला कैसे पीछे रहते? दांत निपोरकर, खींसे निकालकर, सिर हिलाते हुए बोले-

अगर सोनिया गांधी ने छठ किया होता, तो उनके घर बुद्धिमान बच्चा पैदा होता. छठ पूजा करने से संतान बुद्धिमान और देशभक्त पैदा होती है.

मनोज तिवारी की ये बकवास सुनने के लिए यहां क्लिक कीजिए. 

मनोज तिवारी ने फिर से अपना चरित्र दिखाया है
मनोज तिवारी नेता बनने से पहले भोजपुरी फिल्मों के सुपरस्टार थे. उनकी कई फिल्मों में एक किस्म का फूहड़पना होता था. तब हमको लगता था कि ये शायद ‘स्क्रिप्ट की डिमांड’ होती हो. लेकिन जब मनोज पॉलिटिक्स में आए, तब पता चला कि फूहड़पना उनके अंदर कूट-कूटकर भरा है. उनका स्टाइल ऐसा ही है- फालतू और घटिया बातें करना. अव्वल तो ऐसा घटियापन दिखाने वाले नेताओं को रत्तीभर भी फुटेज नहीं दी जानी चाहिए. लेकिन बीजेपी ने जिस इंसान को दिल्ली में पार्टी का नंबर वन बनाया हो, उसकी ऐसी बेहूदगी चाहकर भी नजरंदाज नहीं की जा सकती है. ये जनाब एक बार एक महिला सांसद को ‘सांसद होने की गरिमा’ सिखा रहे थे. हमारे इधर कहावत है- अपन माथ के टेटर ककरो नइ देखाई छई. मतलब अपने सिर पर लगी चोट नहीं दिखती लोगों को. वरना मनोज तिवारी को समझ होती कि वो एक साथ तीन सांसदों की मर्यादा गिरा रहे हैं. एक- सोनिया गांधी. दूसरे- राहुल गांधी. तीसरे खुद मनोज तिवारी. चूंकि राहुल और सोनिया का उनके इस ओछेपन से कुछ बिगड़ना नहीं है, सो मनोज तिवारी ने बस अपना ही चरित्र दिखाया है. खुद के मुंह से खुद पर दाग लगाया है.

इस हिसाब से तो मोदी भी ‘समझदार और देशभक्त’ नहीं हुए
एक और बात. चूंकि जिक्र छठ का हुआ था. क्या छठ रखने वाली सारी मांओं के बच्चे ‘समझदार और देशभक्त’ निकलते हैं? ऐसा होता, तो बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में समझदारों की बाढ़ आई होती. हमारे यहां तो होता है छठ. हमने तो पहले कभी ये ‘देशभक्ति’ वाली बात नहीं सुनी. देशभक्ति न हुई, नमक हो गया. जहां मन करो, स्वादानुसार छिड़क लो. और क्या जो मांएं छठ नहीं रखती हैं, उनके बच्चे ‘समझदार और देशभक्त’ नहीं निकलते? मनोज तिवारी अपनी ही पार्टी में ये सवाल पूछ लें. नरेंद्र मोदी, लालकृष्ण आडवाणी, राजनाथ सिंह, अमित शाह, निर्मला सीतारमण, अरुण जेटली इनमें से किन्हीं के यहां छठ नहीं मनाया जाता होगा. मनोज तिवारी इन्हें ‘समझदार और देशभक्त’ मानेंगे या नहीं? संघ वाले मोहन भागवत के यहां भी नहीं मनता होगा छठ? मनोज तिवारी के मुताबिक क्या वो भी ‘समझदार और देशभक्त’ नहीं हैं? गोलवलकर और सावरकर के यहां भी छठ नहीं मनता था, उन्हें मनोज तिवारी क्या मानेंगे? जिन एपीजे अब्दुल कलाम को भाजपा पूजती नहीं थकती, उनका क्या? और जिन सरदार पटेल की दुनिया की सबसे बड़ी मूर्ति पीएम नरेंद्र मोदी ने लगवाई, उनका क्या?

कोरबा जिले के कटघोरा विधानसभा क्षेत्र में चुनावी भाषण देते हुए मनोज तिवारी. जिनका हाथ पकड़कर उठाया है, वो हैं इलाके के बीजेपी उम्मीदवार लखनलाल देवांगन (फोटो: बीजेपी)
कोरबा जिले के कटघोरा विधानसभा क्षेत्र में चुनावी भाषण देते हुए मनोज तिवारी. जिनका हाथ पकड़कर उठाया है, वो हैं इलाके के बीजेपी उम्मीदवार लखनलाल देवांगन (फोटो: बीजेपी)

…फिर तो मनोज तिवारी ही ‘समझदार’ हो गए होते
देश के एक बेहद छोटे हिस्से में मनाया जाता है ये पर्व. यानी बाकी भारत में पैदा होने वाले सारे बच्चे ‘मूर्ख और देशद्रोही’ निकलते हैं? मनोज तिवारी को अपने दिमाग और अपनी जुबान का इलाज करवाना चाहिए. जैसा इनपुट, वैसा आउटपुट. दिमाग में कूड़ा भरा है, इसीलिए मुंह से कचरा निकालते हैं. ताज्जुब है कि उनके यहां छठ मनाया जाता है, फिर भी वो ऐसे हुए! उनकी थिअरी के हिसाब से तो उनको ‘समझदार’ होना चाहिए था! एक सबक लोगों के लिए है. जब भी कोई नेता किसी दूसरे नेता की आलोचना करने के लिए गंदे लेवल पर जाए, तो समझिए कि उसके पास शायद आलोचना और विरोध की कोई ठोस वजह नहीं है. बात कहने को बात हो, तो कोई बकवास क्यों करेगा? बकवास कर रहा है, माने उसको बस यही आता है.


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