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हिलेरी-ट्रंप छोड़ो, अमेरिका की असली प्रेसिडेंशियल डिबेट ये वाली थी

भारत के लोग जब सोमवार की सुबह उठे तो अमेरिका टीवी से चिपका था. प्रेसिडेंट के दो अहम दावेदार, ट्रंप और हिलेरी दूसरी टीवी डिबेट कर रहे हैं. रिपब्लिकन, डेमोक्रेट और इन दोनों खेमों से मुक्त, हर कोई टकटकी लगाए देख रहा होगा. 90 मिनट का तमाशा. तीखा शो, जिसमें एक मिनट की चूक हुई और आप राष्ट्रपति का पद गंवा सकते हैं. दुनिया के सबसे ताकतवर आदमी की कुर्सी फिसल सकती है. आप कहेंगे कि ये बकवास है. बढ़ा चढ़ाकर की गई बात है. ठीक टीवी न्यूज वालों की तरह. मैं कहूंगा. ये दो सच्चे वाकये पढ़ लीजिए. फिर कुछ खारिज कीजिए.

1 नर्वस निक्सन, रॉक स्टार कैनेडी

nixon

रिचर्ड निक्सन. फौजी. अमरीका के लिए दूसरा वर्ल्ड वॉर लड़ा. फिर पॉलिटिक्स में आ गए. अपने जनरल और वॉर हीरो आइजनहावर की तरह. जनरल प्रेसिडेंट बने. 1952 में. निक्सन उनके डिप्टी. आठ साल दोनों ने हुकूमत की. अमरीका में कोई भी नेता दो टर्म के लिए ही राष्ट्रपति बन सकता है. तो आईजनहावर की विदाई का वक्त आया. उनकी पार्टी यानी रिपब्लिक पार्टी में निक्सन के अलावा टॉप पोस्ट के लिए कोई दावेदार दिख ही नहीं रहा था. जो छोटे मोटे चैलेंज थे नॉमिनेशन से पहले, वो जल्द खुड्डेलाइन हो गए.

निक्सन, आठ साल से उपराष्ट्रपति. निक्सन, खुद को राष्ट्रपति का सहज और एकमात्र दावेदार समझते. एग्रेसिव अप्रोच वाले. रूस के मुखिया खुर्श्चेव की उनकी ही जमीं पर उंगली दिखा दिखा खिल्ली उड़ाने वाले.

उनके सामने 43 साल के यंग सेनेटर जॉन एफ कैनेडी. पॉपुलर नाम जैक. प्रतिष्ठित पैसे वाले परिवार से ताल्लुक. सेकंड वर्ल्ड वॉर में नेवी के लिए नौकरी की. फिर पॉलिटिक्स में आ गए. डेमोक्रेटिक पार्टी का नॉमिनेशन जीता. उनकी यंग अप्रोच, नई स्टाइल की हर ओर धूम मच गई. रेडियो पर पहली बार गेय जिंगल वाले पॉलिटिकल ऐड सुनाई दिए. सिनात्रा जैसे कल्ट सिंगर ने उनके लिए होप नाम से गाना गाया.

अब निक्सन बनाम कैनेडी का मंच सज चुका था. साल 1960. और पहली मर्तबा प्रेसिडेंशियल टीवी डिबेट हुई. कैमरे के सामने. एक एंकर. दो कैंडिडेट और खूब सारे सवाल. स्पीच, फिर एक दूसरे से सवाल. निक्सन तब तक एक गलती कर चुके थे. उन्होंने तय किया था कि वह अमरीका के सभी 50 स्टेट घूमेंगे. वहां भी जाएंगे जहां ज्यादा वोट नहीं हैं. इस फेर में वह थक गए. एक बार उनका घुटना कार के दरवाजे से टकरा जख्मी हो गया. नतीजतन दो हफ्ते उन्हें बेड रेस्ट भी करना पड़ा. वहीं कैनेडी ने चुनी हुई जगहों पर प्रचार किया. मगर जहां किया, ऐसा किया कि मीडिया ने हर जगह उसे गाया.

टीवी डिबेट वाले दिन निक्सन सुबह से दौरे करते रहे. शाम तक थक गए. जैसे ही कार से निकले, जख्मी घुटना फिर दरवाजे से भिड़ गया. कराहते हुए स्टूडियो में घुसे. उधर कैनेडी थे. सुबह से रिलैक्स करते. पूल किनारे सुकून से बैठे कुछ नोट्स पलटते. वह आराम से और निक्सन से जान बूझकर कुछ देर बाद स्टूडियो पहुंचे. दोनों में हैलो हुई. एंकर ने मेकअप के लिए पूछा. कैनेडी ने मना कर दिया. अब निक्सन कैसे हां कहते.


कैनेडी इसके बाद अपने स्टाफ के साथ बैकरूम चले गए. और वहां बेसिक क्विक मेकअप करवा लिया. निक्सन को इसका पता चला तो उनका स्टाफ बाजार से एक सफेद चमकीली सी क्रीम ले आया. उन्होंने इसे यूं पोत लिया जैसे तेज धूप के लिए सनस्क्रीन लगाई हो. फिर निक्सन स्टेज पर पहुंच गए. लोगों से सवाल पूछने लगे. अभी माइक सेट हो रहा था. कैमरा फोकस बना रहा था. और निक्सन नर्वस लग रहे थे. उधर कैनेडी डिबेट शुरू होने से ठीक एक मिनट पहले पहुंचे. और सुकून के साथ अपनी कुर्सी पर जाकर बैठ गए. कैनेडी यहीं पर पहला राउंड जीत चुके थे.


स्पीच शुरू हुई. कैनेडी ने अपने नए आइडिया शेयर किए. निक्सन का कम से कम नाम लिया. निक्सन आए. हर दूसरी बात में बोले, आई एग्री विद सेनेटर कैनेडी. और फिर अपनी बात जोड़ी. पब्लिक को लगा कि सब एग्री ही है, तो सेकंड बेस्ट क्यों लें.

इसके बाद कैनेडी की तरफ पलड़ा झुक गया. इसमें उनकी प्रेस के साथ दोस्ती ने भी अहम रोल किया. वह यंग थे, फनी थे, उपलब्ध थे. उनके पास बातें थीं, गर्मजोशी थी, स्टाइल था. उधऱ निक्सन एक ब्यूरोक्रेट की तरह बोरिंग, रिजर्व रहने वाले और प्रोटोकॉल के मारे थे. उनसे प्रेस वालों से मिलने को कहा जाता. वो आते जहां जर्नलिस्ट पूल पार्टी कर रहे थे. पूल में एक डुबकी लगाते और बाय कर चले जाते.

वहीं कैनेडी आते तो जाम शेयर करते, जोक्स मारते. ज्यादातर को नाम लेकर पुकारते.

नतीजा आया. पॉलिटिक्स का वेटरन शेर निक्सन ढेर हो गया. कैनेडी अमरीका के सबसे यंग राष्ट्रपति बन गए. 43 साल की उम्र में. और दुर्भाग्य कि वह पद पर रहते हुए मारे जाने वाले राष्ट्रपति भी बन गए. लिंकन के बाद दूसरे. 22 नवंबर 1963 को उन्हें गोली मार दी गई.

और हां. निक्सन की कहानी खत्म नहीं हुई. 1960 में वह राष्ट्रपति का चुनाव हारे. 1962 में कैलिफोर्निया के गवर्नर का भी चुनाव हार गए. मगर उन्होंने छह साल बाद वापसी की. 1968 में हूबर्ट हंफ्री को हरा वह राष्ट्रपति बने. उन्होंने वियतनाम से सेना वापस बुलाई. अमेरिका की यहां बड़ी छीछालेदर हुई थी. चीन के साथ रिश्ते शुरू किए. जबकि यूएस में कॉमरेड बोलना भी शक की नजर से देखा जाता था. उन्हीं के वक्त अमरीका चांद पर पहुंचा. और इन सबके दम पर 1972 में वह फिर बड़ी जीत के साथ दोबारा राष्ट्रपति बने. मगर दो साल बाद ही वॉटरगेट स्कैंडल सामने आया. नेताओं की सरकारी जासूसी का कांड. शानदार पत्रकारिता का नमूना. और 1974 में निक्सन को महाभियोग के डर से कुर्सी छोड़नी पड़ी.

अमरीकी इतिहास की पहली प्रेसिडेंशियल डिबेट:


2 जब क्लिंटन ने बुश के नीचे से दरी सरका दी

clinton

एक और रोचक टीवी डिबेट. जिसने मोमेंटम बदल दिया. साल था 1992. एक तरफ थे सिटिंग प्रेसिडेंट. रिपब्लिकन पार्टी के जॉर्ज बुश. मंझे हुए नेता. पहले उपराष्ट्रपति रहे और फिर व्हाइट हाउस पहुंचे. इराक युद्ध में उन्होंने अमरीका को शानदार जीत दिलाई. और जंग जीते नेता से ज्यादा ताकतवर कोई नहीं होता. बुश को लगा, दूसरी बार राष्ट्रपति बनना तय है. इस फेर में उन्होंने अपने कैंपेन को देर से शुरू किया. तब तक रिपब्लिकन पार्टी में ही एक और दावेदार खड़ा हो गया. हालांकि बुश ने इससे पार पा लिया, मगर उनकी अजेय छवि पर पहली खरोंच लग गई.

उधर डेमोक्रेट पार्टी में कोई बुश के मुकाबले रगड़ खाकर हारने को तैयार नहीं हो रहा था. तब सामने आए अरकंसास के यंग गवर्नर बिल क्लिंटन. बिल में कई लोगों को जॉन कैनेडी की झलक दिखती थी. वो यंग थे, नए तरीकों और जुमलों से लैस थे. कैनेडी की ताकत उनकी खूबसूरत और स्मार्ट पत्नी जैकलिन थीं. वैसे ही बिल की ताकत उनकी पत्नी हिलेरी क्लिंटन थीं. यंग, सक्सेसफुल प्रोफेशनल, मदर. बिल ने बाकी डेमोक्रेट दावेदारों को किनारे लगा पार्टी नॉमिनेशन हासिल किया. इस दौरान कई स्कैंडल सामने आए. एक औरत ने दावा किया, मैं 12 साल से बिल के साथ अफेयर में हूं. ये एक क्लब सिंगर थी. बिल का बचाव करने के लिए हिलेरी क्लिंटन आगे आईं. टीवी पर दोनों ने सब बातें रखीं और तूफान थम गया. उधर जॉर्ज बुश का वो वीडियो सामने आया, जिसमें वह सेकंड वर्ल्ड वॉर के दौरान गोली खा जख्मी हुए थे. इस फुटेज ने बुश के कल्ट को और मजबूत कर दिया.

डिबेट के दिन तक पलड़ा बराबर था. बल्कि बुश की तरफ हलका झुका था. उनकी टीम क्लिंटन के खिलाफ एग्रेसिव कैंपेन कर रही थी. अरकंसास के उनके कार्यकाल पर सवालिया निशान उठाए जा रहे थे. चाहे बेरोजगारी हो या टैक्स में बढ़ोतरी.

मगर टीवी कैमरों के सामने सब बदल गया. क्लिंटन की टीम ने उनकी जोरदार तैयारी करवाई थी. यहां तक कि डिबेट शो के दौरान जो स्टूल रखे जाने थे बैठने के लिए, वे तक चुरा कर अपने हिसाब से दूसरे रखवा दिए. उन्होंने एक और चाल चली थी, जो सफल रही. बिल क्लिंटन ने कहा कि सिर्फ एंकर ही सवाल क्यों पूछें. टाउन हॉल स्टाइल में जनता भी पूछे. बुश की टीम रामजाने क्यों इस प्रपोजल पर तैयार हो गई. और यहीं वे चित्त हुए.

बुश की स्पीच हुई. क्लिंटन की स्पीच हुई. और फिर पब्लिक के सवाल. बुश पर इल्जाम था कि उन्होंने देश में टैक्स खूब बढ़ाए. एक अश्वेत महिला ने पूछा. इस टैक्स बढ़ोतरी से आप पर व्यक्तिगत रूप से क्या असर पड़ेगा. बुश ने जवाब दिया. महिला संतुष्ट नहीं हुईं उनके जार्गन से. उसने फिर सवाल पूछा. अब बुश ऑफेंसिव होने लगे. उनके भीतर का सिटिंग प्रेसिडेंट जाग गया. और यहीं पर क्लिंटन ने दखल दिया. वह स्टूल से उठे, महिला की तरफ बढ़े. और उसके सवालों को तारतम्यता देने लगे. वे उसके स्पोकपर्सन बन गए. और पांच मिनटों में वे उन तमाम अमेरिकियों के स्पोकपर्सन बन गए, जो नौकरी जाने से खफा थे. बुश हैरानी से भर गए. आगे की डिबेट में उनकी दिलचस्पी खत्म हो गई. उन्हें दरअसल क्लिंटन के अलावा एक और आदमी ने चरस बो रखी थी. जीरो से शुरूआत कर अरबपति बनने वाले कंप्यूटर प्रफेशनल पेरोट ने, जो निर्दलीय मुकाबले में दाखिल हुए थे. पेरोट को 20 फीसदी वोट मिले. इनसे सबसे बड़ा नुकसान बुश को पहुंचा. वह क्लिंटन के हाथों बुरी तरह चुनाव हारे.

क्लिंटन को इस दौरान दो बार टीवी ने बचाया. पहली बार अफेयर के मुद्दे पर हिलेरी के टीवी पर जोरदार बचाव ने. और दूसरी बार उनके बुश पर पलटवार ने.

पूरी डिबेट, ये रही:

इन किस्सों को याद करिए और मंगलवार सुबह देखिए. कौन हीरो बनता है और कौन जीरो. सिर्फ 90 मिनट में.

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