Submit your post

Follow Us

चीन ने कोरोना जांच को लेकर WHO को वुहान क्यों नहीं जाने दिया?

अकबर-बीरबल सीरीज़ की एक बड़ी चर्चित कहानी है- बीरबल की खिचड़ी. इस कहानी में बीरबल दो बांसों के ऊपर एक हंडिया टांगकर ज़मीन पर आग जलाते हैं. फिर बादशाह अकबर से कहते हैं, आसमान में टंगी हंडिया के भीतर उनकी खिचड़ी पक रही है. ऐसी ही एक खिचड़ी विश्व स्वास्थ्य संगठन पका रहा है. वो दुनिया को बताकर निकला कि चीन जाकर कोरोना की पैदाइश का सिरा खोजेगा. तीन हफ़्तों की जांच के बाद WHO की टीम चीन से लौट आई. मगर इस दौरान कुछ ऐसा हुआ, जिसपर अब हो-हल्ला मच रहा है. ये क्या मामला है, विस्तार से बताएंगे आपको.

कोरोना से अब तक सवा आठ लाख से ज़्यादा की मौत हो चुकी है

इस पूरे मामले की शुरुआत करने से पहले आपको कुछ आंकड़े बता देते हैं. आज है अगस्त महीने की 28 तारीख़. यानी, साल 2020 का 8वां महीना ख़त्म समझिए. इन आठ महीनों का सबसे बड़ा कीवर्ड है कोरोना. ये दुनिया के 213 देशों में फैल चुका है. इनमें बेनिन, अरुबा, टोगो और लिसोथो जैसे देश भी हैं, जिनका नाम शायद आपने कभी न सुना हो. अब तक करीब ढाई करोड़ लोग कोरोना संक्रमित हो चुके हैं. इनमें से सवा आठ लाख से ज़्यादा की मौत हो चुकी है. कोरोना के चलते दुनिया में अब तक कितने करोड़ लोगों की नौकरी गई, इसका कोई ठीक-ठीक हिसाब नहीं है. सबसे ज़्यादा बुरा हाल है इनफॉर्मल सेक्टर में काम कर रहे तकरीबन डेढ़ अरब लोगों का. इनके ऊपर अपना सबकुछ गंवाने का ख़तरा है. आशंका है कि कि कोरोना के चलते दुनिया की GDP सवा पांच पर्सेंट नीचे लुढ़केगी. दुनिया के ज़्यादातर देश आर्थिक मंदी में जाएंगे.

Coronavirus World
कोरोना से अब तक सवा आठ लाख से ज़्यादा की मौत हो चुकी है.

आंकड़े बता दिए. प्रॉजेक्शन गिना दिए. अब आते हैं इस बर्बादी की शुरुआत पर. दक्षिण-पश्चिम चीन में युन्नान नाम का एक प्रांत है. इसकी राजधानी है कुनमिंग. इसी शहर के उत्तर में पड़ती है एक गुफा. नाम, शिकाऊ केव्स. चीन की मंडारिन भाषा में शिकाऊ के कई मतलब हैं. मसलन- ताकत, गति. शिकाऊ शब्द का एक मतलब ‘प्रवृत्ति’ भी है. प्रवृत्ति माने किसी ख़ास तरह के बर्ताव या गुण की तरफ झुकाव.

शिकाऊ केव्स के साथ ये शब्द परफेक्ट कैसे फिट होता है?

बताते हैं. ये जो गुफा है, वहां चमगादड़ों के कई मुहल्ले हैं. इन चमगादड़ों पर ख़ूब रिसर्च होते हैं. 2013 में हुई ऐसी ही एक रिसर्च में वैज्ञानिकों ने इन चमगादड़ों के मल और बाकी नमूने जमा किए. इन सैंपल्स की लैब में जांच हुई. वैज्ञानिकों को इन सैंपल्स में WIV1 नाम का एक वायरस मिला. पता चला कि ये वायरस बंदर, चूहा और इंसान सबको संक्रमित कर सकता है. इसी वायरस को सार्स नाम की महामारी का कारण माना गया.

Kunming
चीन का कुनमिंग शहर. (गूगल मैप्स)

इस रिसर्च के सात साल बाद 2020 में शिकाऊ केव्स फिर से फोकस में आया. इस गुफ़ा की चमगादड़ कॉलोनियों से लिए गए सैंपल्स में एक विषाणु मिला वैज्ञानिकों को. इसका नाम रखा गया- RaTG13. इस वायरस और कोरोना फैलाने वाले विषाणुओं में 96.2 पर्सेंट समानता पाई गई. क्या मतलब हुआ इसका? इसका मतलब ये हुआ कि शायद कोरोना की शुरुआत भी इसी गुफ़ा से जुड़ी है. मगर इस अनुमान के आगे कई अनसुलझे सवाल हैं.

सबसे बड़ा सवाल ये है कि वायरस इंसानों तक कैसे पहुंचा?

क्या चमगादड़ों के सीधे संपर्क में आने से ये बीमारी इंसानों तक आई? या फिर किसी और जानवर ने इस विषाणु को चमगादड़ों से इम्पोर्ट किया और इंसानों तक पहुंचाया? वो क्या कड़ी थी, कौन सा रास्ता था, जिसके मार्फ़त वायरस इस गुफ़ा से निकलकर वुहान पहुंचा? कौन था इस बीमारी का पेशेंट ज़ीरो? उस शुरुआती मरीज़ को खोजा जाना बेहद ज़रूरी है. इसलिए नहीं कि कोरोना से हुई ग्लोबल बर्बादी का दोष उसपर मढ़ा जाए. बल्कि इसलिए कि उस पेशेंट ज़ीरो के रास्ते हम कोविड 19 के इंसानों तक पहुंचने की पहेली सुलझा सकेंगे. इस पहेली को बूझकर इस तरह की महामारियों पर बेहतर रिसर्च हो सकेगी. हम ऐसी महामारियों से निपटने की तैयारी कर सकेंगे.

ये ही वजहें वुहान को कोरोना जांच का सबसे अहम लोकेशन बताती हैं. इसीलिए वैज्ञानिकों का इंटरनैशनल तबका कोरोना फैलने के बाद से ही चाहता था कि वुहान में जाकर विस्तृत तफ़्तीश की जाए. मगर ये काम करेगा कौन? बाकी देशों के वैज्ञानिकों को चीन से परमिशन चाहिए थी. ये परमिशन चीन दे नहीं रहा था. ऐसे में सबकी नज़र टिकी WHO पर.

Untitled Design
चीन के वुहान से निकला कोरोना वायरस दुनिया के 213 देशों तक पहुंच चुका है. (फोटो: एएफ़पी)

WHO चीनी सरकार की तारीफ़ में लगा हुआ है?

WHO अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य संगठन है. ऐसी ग्लोबल आपदा में जांच और बाकी दिशानिर्देश जारी करने का मुख्य जिम्मा उसी का था. मगर कोरोना मामले में WHO की अपनी भूमिका संदिग्ध थी. उसने कोरोना को अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य आपदा बताने में काफी देर की थी. इसके अलावा जब बाकी दुनिया, यहां तक कि चीन के लोग भी महामारी से निपटने के रवैये पर अपनी सरकार से खफ़ा थे, तब WHO चीनी सरकार की तारीफ़ कर रहा था. इन सबको लेकर WHO की काफी आलोचना हो रही थी.

इन्हीं आलोचनाओं के बीच फरवरी के दूसरे हफ़्ते में WHO की एक टीम चीन पहुंची. इस टीम ने चेंगदू, गुआनदोंग और वुहान का दौरा किया. मगर ये पूरी यात्रा चीनी सरकार की देखरेख में हो रही थी. वो जहां ले जाते, टीम वहीं जाती. जितने कदम चलाते, उतना ही टीम चलती. टीम के कई सदस्यों ने बाद में शिकायत की कि उन्हें खुलकर जांच करने का मौका ही नहीं दिया गया. मगर WHO ने आधिकारिक तौर पर जांच में सहयोग के लिए चीन की तारीफ़ की. इस दौरे का मकसद बताते हुए WHO ने कहा-

हमारी टीम एक बड़े अंतरराष्ट्रीय दल के दौरे के लिए ज़मीन तैयार करने गई है. ये इंटरनैशनल टीम विस्तृत जांच के लिए जल्द से जल्द चीन जाएगी.

WHO का ये बयान ध्यान रखिएगा. इसका ज़िक्र दोबारा भी आएगा.

फ़रवरी 2020 के बाद जुलाई 2020

फरवरी वाली उस विज़िट के बाद आते हैं जुलाई 2020 पर. इस महीने की 10 तारीख़ को WHO की एक टीम दोबारा चीन पहुंची. इस यात्रा का मकसद था, कोरोना के ऑरिजिन की तलाश करना. दो लोगों की ये टीम तीन हफ़्ते रही चीन में. 3 अगस्त को ये अपना काम पूरा करके चीन से लौट आए. कितना सफल रहा ये दौरा? इस सफलता की ख़बर आई 27 अगस्त को. पता चला कि कोरोना के शुरुआत की जांच करने गई ये टीम वुहान ही नहीं गई. 21 दिनों तक चीन में रहने के बावजूद चीन ने उन्हें वुहान नहीं जाने दिया. इस बात पर जब हो-हल्ला मचा, तो WHO का बयान आया. इस बयान में कहा गया-

हमारा ये दौरा तो बस एक बड़े अंतरराष्ट्रीय दल की विज़िट के लिए ज़मीन तैयार करने चीन गया था. ये इंटरनैशनल टीम विस्तृत जांच के लिए जल्द से जल्द चीन जाएगी.

ये बयान और फरवरी वाली विज़िट के बाद दिया गया बयान, दोनों बिल्कुल एक से हैं. दोनों में एक विस्तृत इंटरनैशनल टीम को वुहान भेजने की बात कही गई. दोनों ही दौरों को WHO ने उस इंटरनैशनल विज़िट के लिए ग्राउंडवर्क बताया. ये ग्राउंडवर्क कब तक चलता रहेगा, कोई नहीं जानता. वो इंटरनैशनल टीम कब वुहान जाकर निष्पक्ष जांच करेगी, ये भी कोई नहीं जानता.

अब सवाल है कि क्या WHO और चीन ऐसी किसी स्वतंत्र जांच के प्रति गंभीर हैं?

क्या चीन सच में कोरोना की शुरुआत का राज़ खुलने देगा. उसका अब तक का रवैया ऐसी कोई उम्मीद नहीं देता है. ऐसा नहीं कि WHO को चीन के इस रवैये का इल्म न हो. उन्हें अच्छी तरह पता है कि चीन जानकारियां छुपा रहा है. इसी मिजाज़ की एक ख़बर जून में आई थी.

Maria Van Kerkhove
WHO की कोविड टेक्निकल हेड मारिया केरख़ोवे. (फोटो: एएफ़पी)

ये ख़बर दी थी इंटरनैशनल न्यूज़ एजेंसी AP ने. इसके मुताबिक, WHO चीफ भले चीनी सरकार की पीठ थपथपा रहे हों. मगर WHO के कई अधिकारी चीन से नाराज़ हैं. नाराज़गी की वजह है चीन द्वारा जानकारियां छुपाना. उनके मुताबिक, चीन ने कोरोना वायरस के जेनेटिक मैप की जानकारियां भी लंबे समय तक छुपाईं. उसने WHO को कोरोना मरीज़ों से जुड़े विस्तृत ब्योरे देने में देर की. इस देरी के कारण समय रहते इस महामारी के ख़तरे का अनुमान नहीं लगाया जा सका. AP ने अपनी रिपोर्ट में WHO की कई मीटिंग्स के ब्योरे दिए. इसमें एक जगह WHO की कोविड टेक्निकल हेड मारिया केरख़ोवे का भी बयान था. जनवरी में हुई एक मीटिंग में चीन के रवैये पर असंतोष जताते हुए मारिया ने अपने सहयोगियों से कहा था-

हमें कम से कम जानकारी मुहैया कराई जा रही है. ऐसे में तो हम सही प्लानिंग कभी नहीं बना सकेंगे.

Gauden Galea
WHO के एक आला अधिकारी डॉक्टर ग्वाडेन गालेया. (फोटो: एएफ़पी)

एक अन्य मीटिंग में WHO के एक आला अधिकारी डॉक्टर ग्वाडेन गालेया ने चीनी तौर-तरीकों पर झुंझलाते हुए कहा था-

सरकारी टेलिविजन पर ख़बर चलाए जाने के 15 मिनट पहले हमें वो जानकारी दी जाती है.

पुरानी बातें बताने के बाद फिर लौटते हैं वर्तमान पर. चीन के हालिया दौरे के बाद हो रही आलोचनाओं के बीच WHO चीफ ने फिर से वायदा किया है. कहा है कि वो जल्द ही वुहान में जांच शुरू करवाएंगे. ताकि कोरोना के शुरुआती मामलों का संभावित सिरा खोजा जा सके. मगर ये आश्वासन अभी भी खोखला है. टीम चीन कब जाएगी? कितनी बड़ी टीम होगी? इस जांच को लेकर WHO और चीन में क्या बातचीत हुई है? ये ब्योरे अभी कोई नहीं जानता. कुल मिलाकर WHO की ये कोरोना जांच अभी बीरबल की खिचड़ी लग रही है. वैसे भी, कोरोना की शुरुआत को कई महीने बीत चुके हैं. इतने टाइम बाद काम के सैंपल मिल सकेंगे, इसकी उम्मीद अब बहुत धुंधली है.


विडियो- हज़ारों मुस्लिम शरणार्थियों को मारने वाला जनरल रिहा हो जाएगा?

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

कौन हो तुम

विधायक विजय मिश्रा, जिन्हें यूपी पुलिस लाने लगी तो बेटियां बोलीं- गाड़ी नहीं पलटनी चाहिए

चलिए, विधायक जी की कन्नी-काटी जानते हैं.

नेशनल हैंडलूम डे: और ये है चित्र देखो, साड़ी पहचानो वाली क्विज

कभी सोचा नहीं होगा कि लल्लन साड़ियों पर भी क्विज बना सकता है. खेलो औऱ स्कोर करो.

सौरव गांगुली पर क्विज़!

सौरव गांगुली पर क्विज़. अपना ज्ञान यहां चेक कल्लो!

कॉन्ट्रोवर्सियल पेंटर एमएफ हुसैन के बारे में कितना जानते हैं आप, ये क्विज खेलकर बताइये

एमएफ हुसैन की पेंटिंग और विवाद के बारे में तो गूगल करके आपने खूब जान लिया. अब ज़रा यहां कलाकारी दिखाइए.

'हिटमैन' रोहित शर्मा को आप कितना जानते हैं, ये क्विज़ खेलकर बताइए

आज 33 साल के हो गए हैं रोहित शर्मा.

क्विज़: खून में दौड़ती है देशभक्ति? तो जलियांवाला बाग के 10 सवालों के जवाब दो

जलियांवाला बाग कांड के बारे में अपनी जानकारी आप भी चेक कर लीजिए.

बजट का कितना ज्ञान है, ये क्विज़ खेलकर चेक कर लो!

कितना नंबर पाया, बताते हुए जाना. #Budget2020

संविधान के कितने बड़े जानकार हैं आप?

ये क्विज़ जीत लिया तो आप जीनियस हुए.

क्रिकेट के पक्के वाले फैन हो तो इस क्विज़ को जीतकर बताओ

कित्ता नंबर मिला, सच-सच बताना.

सलमान खान के फैन, इधर आओ क्विज खेल के बताओ

क्विज में सही जवाब देने वाले के लिए एक खास इनाम है.