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31 अगस्त तक अपने लोगों को अफगानिस्तान से कैसे निकाल पाएगा अमेरिका?

आंकड़ों के हिसाब से हवाई यात्रा दुनिया में यात्रा का सबसे सुरक्षित साधन है. फिर भी हज़ारों फ़ीट की ऊंचाई पर उड़ते हुए इंसान का डर बना रहता है. मानवीय मन का सर्वाइवल इन्स्टिंक्ट किसी भी आंकड़े से दिलासा नहीं पाता. इतनी ऊंचाई पर अगर कुछ हो गया. तो क्या करेंगे? कैसे बचेंगे?

ये सवाल वाजिब ही हैं. इसी को देखते हुए अमेरिका में हुए 9/11 के हमलों के बाद से एयरपोर्ट्स की सुरक्षा बिल्कुल सख़्त कर दी गई. ऐसी कि कोई परिंदा भी पर नहीं मार सकता. चाहे आप आम व्यक्ति हों या शाहरुख़ ख़ान. सुरक्षा के नाम पर कोई ढिलाई नहीं दी जाती.

इसी अमेरिका ने जब अफ़ग़ानिस्तान से अपना बोरिया-बिस्तर सम्भालने की ठानी. तो तय हुआ कि इसके लिए काबुल स्थित हामिद करज़ई इंटरनैशनल एयरपोर्ट का इस्तेमाल किया जाएगा. लेकिन इस एयरपोर्ट पर अमेरिका के सारे इंतज़ाम धरे के धरे रह गए. 26 अगस्त को एयरपोर्ट पर एक आतंकी हमला हुआ. जिसमें कई लोगों की जान चली गई.

इसके बाद से इवैक्यूएशन का काम ठप पड़ गया है. राष्ट्रपति बाइडन ने वादा किया था कि 31 अगस्त तक वो अफ़ग़ानिस्तान से निकल जाएंगे. तालिबान के डर से औरतें, पत्रकार और सरकारी अधिकारी काबुल से निकलने की जुगत में हैं. डेडलाइन में सिर्फ़ एक दिन बाक़ी है और ऐसे हज़ारों लोग अभी भी काबुल एयरपोर्ट पर अटके हुए हैं.

इस बीच आज सुबह खबर आई है कि काबुल के आसमान में दर्जन भर रॉकेट उड़ते हुए देखे गए हैं. सुरक्षा एजेंसियां लगातार चेतावनी दे रही हैं कि आगे और हमले हो सकते हैं.

26 अगस्त को हुआ था आतंकी हमला

26 अगस्त को काबुल एयरपोर्ट पर एक आतंकी हमला हुआ. जिसमें 13 अमेरिकी जवान और 100 से अधिक आम नागरिकों की जान चली गई. इस हमले की ज़िम्मेदारी ली, इस्लामिक स्टेट ऑफ़ ख़ुरासान प्रॉविंस (ISKP) ने.

अमेरिका को लग रहा था कि 31 अगस्त तक वो अपने बाक़ी बचे लोगों को निकाल लेगा. लेकिन 26 अगस्त के हमले ने इस काम को और कठिन बना दिया है. इस कारण अमेरिका की आंतरिक राजनीति में भूचाल आ गया है. सैनिकों की मौत को लेकर बाइडन पर चौतरफ़ा हमला हो रहा है. उनकी खुद की पार्टी के कई लोग दबी ज़ुबान में इस हमले को बाइडन की व्यक्तिगत नाकामी बता रहे हैं.

Kabul Airport
हमले के बाद काबुल एयरपोर्ट के पास से उठता धुआं. फोटो- PTI

लेकिन बाइडन अपने निर्णय पर क़ायम हैं. हमले के तुरंत बाद उनका एक बयान आया. जिसमें उन्होंने कहा कि हमले के बावजूद एयरलिफ़्ट कैंपेन चलता रहेगा. साथ ही उन्होंने ये वादा भी किया कि हमले में शहीद हुए सैनिकों का बदला लिया जाएगा.

विशेषज्ञ मान रहे हैं कि बदला लेने की बात सिर्फ़ मुंह ज़बानी है. जबकि अमेरिका पहले ही तय कर चुका है कि वो अफ़ग़ानिस्तान में कोई मौजूदगी नहीं रखेगा. इसलिए ISIS से बदला लेने की बात सिर्फ़ सेना का मनोबल बनाए रखने के लिए है. कुछ ड्रोन हमलों के सिवाय अमेरिका ज़्यादा कुछ नहीं कर सकता.

अमेरिका ने किया था ड्रोन अटैक

हालांकि शुक्रवार, 27 अगस्त को बाइडन के बयान का असर दिखना शुरू हो गया. अमेरिकी रक्षा बलों ने ISIS के ठिकानों पर ड्रोन से हमला करना शुरू किया. इस दौरान अफ़ग़ानिस्तान के नंगरहार प्रांत में ड्रोन से हमला किया गया. खबर है कि इस हमले में अमेरिका ने काबुल एयरपोर्ट अटैक के सूत्रधार को मार गिराया है.

रविवार 29 अगस्त को एक और हमले की खबर आई. पता चला कि विस्फोटकों से भरा एक वाहन काबुल एयरपोर्ट की तरफ़ बड़ रहा है. ये वाहन फ़िदायीन हमले के मकसद से आ रहा था. 26 अगस्त को हुए हमले के बाद सुरक्षा बल चौकन्ने थे. जैसे ही इस वाहन का पता चला. अमेरिकी सुरक्षा बलों ने ड्रोन से हमला कर वाहन को उड़ा दिया. वाहन में भारी मात्रा में विस्फोटक भरे हुए थे. इससे हुए धमाके में कई लोगों के हताहत होने की सूचना आई.

काबुल ब्लास्ट में शामिल आतंकी अफ़ग़ानिस्तान के लोगार प्रांत का रहनेवाला था.
काबुल ब्लास्ट में शामिल आतंकी अफ़ग़ानिस्तान के लोगार प्रांत का रहनेवाला था.

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार ड्रोन अटैक का निशाना फ़िदायीन हमलावर था. लेकिन चूक से एक ड्रोन काबुल हवाई अड्डे के निकट स्थित ख्वाजा बुगरा आवासीय इलाके में गिरा. जिसकी चपेट में एक अफ़ग़ानी परिवार आ गया. इस हमले में बच्चों, महिलाओं समेत 7 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए. इस मामले में अमेरिकी अधिकारियों ने एक बयान जारी कर कहा,

“हमें पता चला है कि काबुल में हुए ड्रोन स्ट्राइक में कुछ नागरिकों की जान चली गई है. हमने ये कदम आत्मरक्षा में उठाया. किसी मासूम की मृत्यु होना खेदजनक है. हम इस मामले की छानबीन कर रहे हैं.”

उन्होंने आगे कहा,

“हम कॉन्फ़िडेंट हैं कि जिस वाहन को निशाना बनाया गया, उसमें कोई आम नागरिक मौजूद नहीं था. लेकिन कार में रखे विस्फोटकों के कारण हो सकता है ‘कोलैटरल डैमेज’ हुआ हो”

हमले के बाद के वीडियो सोशल मीडिया पर घूम रहे हैं. इसमें आसपास की इमारतों से धुआं उठता दिखाई दे रहा है. हमले के बाद तालिबान का भी बयान आया. तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि अमेरिकी ड्रोन हमले का निशाना एक आत्मघाती हमलावर था. जिसका इरादा काबुल हवाई अड्डे पर हमला करना था.

लेकिन जैसा कि अपेक्षित था, इसके कुछ ही घंटे बाद तालिबान के सुर बदल गए. उसने अमेरिकी ड्रोन हमलों की निंदा करते हुए कहा कि अमेरिका का कोई हक़ नहीं कि वो विदेशी ज़मीन पर इस तरह से हमला करे.

पिछले दिनों जब खबर आई थी कि लोगों को काबुल से निकालने में कुछ और वक्त लग सकता है. तब भी तालिबान ने अमेरिका को चेतावनी दी थी कि 31 अगस्त के बाद अगर कुछ गड़बड़ हुई तो इसकी ज़िम्मेदारी तालिबान की नहीं होगी.

कुल मिलाकर तालिबान का मामला ‘कभी नरम कभी गरम’ वाला है. कभी वो अमेरिका के साथ मिलकर ISIS के हमले की निंदा करता है. और अगले ही पल अमेरिका से कहता है कि किसी भी हमले की जानकारी पहले उसे मिलनी चाहिए.

काबुल एयरपोर्ट पर अफरा-तफरी

उधर काबुल एयरपोर्ट पर अभी भी अफ़रातफ़री मची हुई है. शुक्रवार की रात अमेरिकी दूतावास ने नागरिकों को तुरंत हवाई अड्डा छोड़ने की चेतावनी दी. लेकिन जान के ख़तरे के बावजूद लोगों का एयरपोर्ट पर इकट्ठा होना नहीं रुका.

फ़िलहाल अमेरिका की प्राथमिकता है, अपने लोगों को काबुल से निकालना. जिनकी संख्या 300 के आसपास है. और इसी कारण अभी अफ़ग़ानी नागरिकों को एयर लिफ़्ट कराने पर रोक लगा दी गई है. अमेरिका के इस फ़ैसले से बाक़ी लोग निराश और परेशान हैं. लेकिन उन्हें अभी भी उम्मीद है कि पश्चिमी देशों की मदद से वो तालिबान के चंगुल से बच जाएंगे.

इसमें एक ग्रुप है अमेरिकन यूनिवर्सिटी ऑफ़ अफ़ग़ानिस्तान के छात्र और शिक्षकों का. आइए इनकी कहानी जानते हैं-

2006 में अमेरिका की मदद से अफ़ग़ानिस्तान में उच्च-शिक्षा के लिए एक यूनिवर्सिटी बनाई गई, अमेरिकन यूनिवर्सिटी ऑफ़ अफ़ग़ानिस्तान. इसमें क़रीब 1200 के लगभग छात्र पढ़ते हैं, या कहिए कि पढ़ते थे. क्योंकि 14 अगस्त को जैसे ही पता चला कि काबुल को तालिबान लड़ाकों ने घेर लिया है. यूनिवर्सिटी कैम्पस को खाली कर दिया गया. तालिबान का शिक्षा से प्रेम जग ज़ाहिर है. जैसा की अपेक्षित था, तालिबान ने सबसे पहले इसी यूनिवर्सिटी पर धावा बोला. ये लोग इल्म को ईमान से तोलने आए थे. ज़ाहिर था कि इल्म हल्का पढ़ गया. कैम्पस में अमेरिका और अफ़ग़ानिस्तान का झंडा हटाकर तालिबान का झंडा लगा दिया गया. अगले ही दिन सोशल मीडिया में तालिबानी लड़ाकों की पोस्ट घूमने लगी-

जिसका कैप्शन था-‘इस यूनिवर्सिटी में कुफ़्र सिखाया जाता है. अमेरिकी भेड़िए यहां मुसलमानों को काफ़िर बनाते हैं.’

पांच साल पहले भी तालिबान ने इसी यूनिवर्सिटी को अपना निशाना बनाया था. तब 15 छात्रों की जान चली गई थी. उस वक्त तालिबान अफ़ग़ानिस्तान के एक लिमिटेड हिस्से में क़ाबिज़ था. काबुल में कई सरकारी महकमे और बिल्डिंग हैं. ऐसे में सबसे पहले यूनिवर्सिटी को निशाना बनाया जाना एक ख़ास बात की ओर इशारा करता था- शिक्षा से तालिबान की नफ़रत.

Afghanistan Airport 1
काबुल एयरपोर्ट के बाहर गाड़ियों की लंबी क़तार. (Foto- Satellite image ©2021 Maxar Technologies, इंडिया टुडे)

यूनिवर्सिटी के प्रेसिडेंट हैं इयान बिकफ़ोर्ड. जो पहले ही काबुल से निकल चुके हैं. न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि वो स्टेट डिपार्टमेंट के साथ मिलकर 1200 छात्रों को काबुल से निकालने का प्रयास कर रहे हैं.

अमेरिकी मदद की उम्मीद में शनिवार 28 अगस्त को यूनिवर्सिटी के छात्र और शिक्षक एक सेफ़ हाउस में इकट्ठा हुए, और एक बस में बैठकर काबुल हवाई अड्डे पहुंचे. लेकिन उन्हें अमेरिकी सुरक्षा बलों द्वारा गेट पर ही रोक दिया गया. उन्हें बताया गया कि अमेरिकी नागरिकों के अलावा और किसी को अंदर जाने की परमीशन नहीं है. जब छात्रों को ये पता चला तो वो बहुत निराशा हो गए. कई छात्र रोने भी लगे. इतना ही नहीं, उन्हें ये भी बताया गया कि उनके नामों की लिस्ट तालिबान के साथ साझा कर दी गई है.

काबुल पर कब्जे के बाद तालिबान एक-एक कर लोगों को निशाना बनाता जा रहा है. सरकारी अधिकारी, महिलाएं और छात्र उसकी लिस्ट में सबसे ऊपर हैं. ऐसे में यूनिवर्सिटी के छात्रों को डर है कि वो ज़्यादा दिनों तक तालिबान की नज़रों से बच नहीं पाएंगे.

काबुल एयरपोर्ट पर किसका निशाना?

काबुल हवाई अड्डे की बातकरें तो वहां हालात बद से बदतर होते जा रहे है. ड्रोन हमले के बाद अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियां आशंका जता रही थीं कि ISIS वापसी हमला कर सकता है. ये आशंका आज सुबह सच साबित हुई जब काबुल के आसमान में कई रॉकेट देखे गए.

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार इनका निशाना काबुल हवाई अड्डा था. काबुल स्थित सलीम कारवां इलाक़े में खड़ी गाड़ी से ये रॉकेट छोड़े गए थे. हमलों का अंदेशा पहले से था. इसलिए हवाई अड्डे पर मिसाइल डिफ़ेंस सिस्टम लगाया गया था. इसी सिस्टम से हमले को रोकने में कामयाबी मिल पाई. अभी तक किसी ने हमले की ज़िम्मेदारी नहीं ली है. बहुत सम्भावना है कि इसके पीछे ISKP का ही हाथ हो.

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि आज सुबह लगभग 6.30 बजे उन्होंने तीन धमाकों की आवाज सुनी. अभी तक हमलों से किसी के हताहत होने की कोई खबर नहीं आई है. हवाई अड्डे को भी कोई क्षति नहीं हुई है. हालांकि इस हमले से कई जगह आग लग गई और बहुत से वाहनों को नुक़सान भी पहुंचा.

व्हाइट हाउस के प्रवक्ता ने इस हमले की पुष्टि करते हुए कहा कि इसके बावजूद लोगों को निकालने का काम जारी रहेगा. उन्होंने बताया कि अमेरिका 31 तारीख़ तक अपने नागरिकों को काबुल से सुरक्षित निकालने के लिए प्रतिबद्ध है.

उधर तालिबान काबुल में अपनी सरकार के गठन का काम शुरू कर चुका है. रविवार को तालिबान के प्रवक्ता ने खुलासा किया कि उनका सर्वोच्च नेता हिबतुल्ला अखुंदजादा जल्द ही सबके सामने आएगा. रिपोर्ट्स के मुताबिक़ वो लम्बे समय से कंधार में ही रह रहा है. और अमेरिका के वापिस लौटने का इंतज़ार कर रहा है.

इसके अलावा अफ़ग़ानिस्तान में भविष्य की रणनीति को लेकर अमेरिका के स्टेट सेक्रेटेरी ब्लिंकन ने एक बयान जारी किया है. उन्होंने कहा है कि 31 अगस्त के बाद कोई भी अमेरिकी राजदूत अफ़ग़ानिस्तान में नहीं रहेगा. हालांकि काबुल से लोगों को निकालने का काम जारी रहेगा. इसके लिए पाकिस्तान और UAE स्थित दूतावास की मदद ली जाएगी. वहीं दूसरी ओर तालिबान चाहता है कि काबुल में अमेरिकी और बाक़ी पश्चिमी देशों के दूतावास बने रहें. ताकि उसकी सरकार की वैधता बनी रहे.

आने वाले कुछ दिन अफ़ग़ानिस्तान की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण साबित होने वाले हैं. अगले हफ़्ते यूनाइटेड नेशन्स में फ़्रांस और बाक़ी देश काबुल की स्थिति पर एक मीटिंग करने वाले हैं. ताकि UN की देख-रेख में काबुल एयरपोर्ट पर एक सेफ़ पैसेज बनाया जा सके. फ़्रांस और ब्रिटेन अपने सभी नागरिकों को काबुल से निकाल चुके हैं. लेकिन अभी भी हज़ारों ऐसे लोग वहां फ़ंसे हुए हैं जिन्होंने पिछले 20 सालों में NATO फोर्सेस की मदद की है. ऐसे में उनकी नैतिक ज़िम्मेदारी बनती है कि वो इन लोगों को काबुल से निकालकर एक सुरक्षित जगह पर पहुंचाएं. वो भी तब, जब उन पर ISIS और तालिबान की दुधारी तलवार लटक रही है.


 

वीडियो- अफगानिस्तान: तालिबान ने मशहूर लोक गायक फवाद अंदराबी की गोली मारकर हत्या कर दी

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