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उस महिला IPS की कहानी, जिन्होंने बिना डंडा चलाए लोगों को घर पर रोका और कोरोना भगा दिया

दिल्ली में रहने वाले फार्मासिटिकल कंसल्टेंट दिनेश गौतम एक दिन अपनी बेटी के साथ बैठे थे. बेटी जो, अभी क्लास थर्ड में थी. बोले –

देखो बेटा, एक चीज होती है IAS. ये सबसे अच्छी नौकरी होती है. इससे बेहतर कुछ नहीं. तुझे यही बनना है.

बेटी पिता के काफी करीब थी. उसने इस एक बात को इतना सीरियसली लिया कि 14 साल बाद अपने दूसरे ही अटेंप्ट में यूपीएससी फोड़ दिया. साल था 2013. आईएएस नहीं, IPS बन गईं. पापा की बात थी, तो दो बार और अटेंप्ट दिए. पर दोनों ही बार हाथ लगी खाकी वर्दी. लड़की समझ गई कि ये एक इशारा है. उसे इसी वर्दी में कुछ करना है. हम बात कर रहे हैं राजस्थान के चूरु जिले की एसपी तेजस्विनी गौतम की, जो अपनी अलग तरह की पुलिसिंग के लिए इस वक्त चर्चा में हैं. कोरोना वायरस के वक्त में उन्होंने लोगों को घरों में कैद रखने के लिए अनोखा आइडिया निकाला है.

क्या है आइडिया?

देखिए, ये कोरोना वायरस का टाइम है. पूरे देश में लॉकडाउन है. मगर फिर भी कुछ वक्त के लिए बाहर निकलने में ढील दी जाती है. इसका कई लोग बेजा फायदा उठाते हैं. बाहर निकल आते हैं. इनको अंदर रखने का काम पुलिस का है. पुलिस के पास इसके लिए दो ही रास्ते हैं. या तो डंडा चलाए या प्यार से समझाए. चूरु एसपी तेजस्विनी ने तीसरा रास्ता अपनाया. लोग घर पर रहें, इसके लिए उन्होंने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स का सहारा लिया. लोगों को अलग-अलग एक्टिविटीज में एंगेज करने की कोशिश की. मोटा-मोटी इसके तीन तरीके थे –

1. पहला काम किया ऑनलाइन कॉन्टेस्ट करवाने का. इसका आइडिया उन्होंने ‘फिल्मस्थान’ और ‘संप्रीति’ नाम की संस्था के मुदित तिवारी के साथ मिलकर तैयार किया. इसमें डांस, स्केचिंग, कुकिंग, सिंगिंग जैसी 17 कैटेगरी में कॉन्टेस्ट करवाए. लोगों ने इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और बाहर निकलना कम हुआ.

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17 तरह के कॉन्टेस्ट करवा रही चूरु पुलिस.

2. दूसरा तरीका अपनाया गया उन लोगों के लिए, जिनको शाम की सैर किए बिना चैन नहीं मिलता. माने पांच से सात बजे के बीच किसी न किसी बहाने बाहर निकलने वाले लोग. उन्हें रोकने के लिए एसपी ने लाइव सेशन शुरू करवाने का प्लान बनाया. इसमें हर फील्ड से जुड़े लोगों को बुलाना शुरू किया. इन लाइव में स्पोर्ट्स, थियेटर, हेल्थ, योग, सिंगर, बॉलीवुड से जुड़े लोगों के सेशन करवाए गए. इनकी रीच 60-70 हजार तक गई. सेशंस के दौरान सैकड़ों कॉल, मैसेज आते. नतीजा ये हुआ कि शाम को लोग बाहर निकलने के बजाए इससे जुड़ने लगे.

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3. तीसरा तरीका एक और कैंपेन के शक्ल में सामने आया. नाम- मेरा चूरु मेरा फर्ज. इसमें शहर के लोगों को दो तरह की शपथ दिलवाई गई. पहली तो ये कि मेरी गली में कोई बाहर न निकले. और दूसरी शपथ ये कि मेरी गली में कोई भूखा नहीं सोएगा. इसमें लोगों के साथ, आवारा जानवर, पंक्षी सब थे. इसको प्रमोट करने के लिए कई सेलेब्रिटीज से अपील रिकॉर्ड करवाई गई. अपील भेजने वालों में एक थे मिर्जापुर के अखंडानंद त्रिपाठी यानी पंकज त्रिपाठी. बाकी हेमंत पांडेय, नीलू कोहली, अनूप सोनी जैसी हस्तियों ने भी लोगों से शहर को सुरक्षित रखने की अपील की.

नतीजा ये है कि चूरु में इस वक्त एक भी कोरोना पॉजिटिव मरीज नहीं है. 14 केस आए थे, मगर अब सभी 14 लोग ठीक होकर घर जा चुके हैं.

आइडिया के पीछे की स्टोरी

आइडिया के पीछे की कहानी समझने के लिए आपको तेजस्विनी के बारे में एक और बात जाननी होगी. तेजस्विनी ने दिल्ली के लेडी श्रीराम कॉलेज से बीए किया है पॉलिटिकल साइंस में. गोल्ड मेडलिस्ट रही हैं. डीयू टॉपर. फिर लॉ की पढ़ाई की. इन्हीं कॉलेज के ही दिनों में उनको उनका दूसरा प्यार मिला. थियेटर. उनका स्ट्रीट प्लेज, ड्रामा से जुड़ाव हुआ. और ये शौक उनको मिला था अपनी मां से, जिनको हिंदुस्तानी क्लासिकल संगीत में महारत में हासिल था. इसी थियेटर से जुड़ाव, 17 साल के जुड़ाव से निकला उनका ये आइडिया. माने मंच की कला में माहिर तेजस्विनी को पता था कि लोगों को कैसे एंगेज करना है. उन्होंने चूरु से पहले अजमेर, जयपुर, बांसवाड़ा में भी ऐसे प्रयोग किए हैं. विमिन, चाइल्ड अब्यूज जैसे तमाम सोशल इशूज पर प्ले करवाएं हैं, जिन्होंने पुलिस की छवि सुधारी.

‘हर कदम खुद को साबित करना होता है’

तेजस्विनी से हमने ये भी जानना चाहा कि एक महिला ऑफिसर होने के नाते उनके सामने किस तरह की चुनौतियां थीं. उन्होंने कहा-

ऐसा होता है कि लेडी ऑफिसर के तौर पर आपको खुद को हर कदम पर प्रूव करना होता है. आपको ऐसे ही कोई कंपिटेंट नहीं मानता. क्योंकि माना ये जाता है कि भई ये तो पुलिस का काम है, तो लड़के ही कर सकते हैं, जबकि हम सेम एग्जाम पास करते हैं. सेम ट्रेनिंग करते हैं. मगर फिर भी हमें बराबर नहीं माना जाता.

उन्होंने ऐसे ही एक चैलेंज का जिक्र भी किया. बताया कि जब वो जयपुर और अजमेर में पोस्टेड थीं, तो उन्होंने ‘आवाज’ और ‘गुमराह’ नाम के प्ले शहर में करवाए. कुछ लोगों ने उनके इनीशिएटिव की तारीफ की. मगर कुछ सीनियर्स को ये पसंद नहीं आया. कहा गया कि पुलिसिंग नहीं आती, तो ये सब नाटक कर रही हैं.

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चूरु एसपी तेजस्विनी ने जिले में क्राइम पर कंट्रोल करने के लिए पुलिसवालों के बीच जाकर काम किया.

गैंग्स और चूरु को किया सीधा

तेजस्विनी बताती हैं कि वो चूरु में 55वीं एसपी हैं. और पहली बार है कि इस जिले में कोई महिला एसपी आई है. वजह चूरु राजस्थान-हरियाणा बॉर्डर पर पड़ता है. इलाका भी एकदम वही ‘मिर्जापुर’, ‘वासेपुर’ पिच्चर टाइप. आए दिन गैंगवार और बवाल होता रहता है. इसलिए भी ये जिला महिलाओं को देने से अधिकारी कतराते थे. तेजस्विनी कहती हैं कि इसके बावजूद उनके डीजी ने उनको ये जिला दिया. वरना होता ये है कि जो क्राइम वाले जिले नहीं हैं, वहीं पर महिला एसपी को तैनात करो.

चूरु आने पर सबकी नजरें तेजस्विनी पर थीं. वजह थी इतिहास. कुछ वक्त पहले ही चूरु में तीन कस्टोडियल डेथ हुई थीं. लॉरेंस बिश्नोई और संपत नेहरा गैंग का आतंक था. कई पुलिस वाले और एसपी तक सस्पेंड हो चुके थे, तो पुलिस का मॉरल डाउन था. ऐसे में तेजस्विनी ने सबसे पहला काम उनको मोटिवेट करने का किया.

तेजस्विनी कहती हैं कि उन्होंने इसके लिए ऑफिस से ज्यादा फील्ड में रहना पसंद किया. रात-रातभर पुलिस वालों के साथ गश्त मारी. उनको ये भरोसा दिलाया कि उनकी एसपी उनके साथ है. नतीजा ये रहा कि पुलिसिंग फिर पटरी पर लौटी. संपत नेहरा को पकड़ा गया. गैंगवार कम हुए. और अब कोरोना के वक्त में सब चूरु को सुरक्षित रखने में जुटे हुए हैं.


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