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आखिर किसी शहर का तापमान नापा कैसे जाता है, आज जान लीजिए

इस स्टोरी की शुरुआत एक लाइन की खबर से करते हैं.

एक जुलाई को दिल्ली में गर्मी ने पिछले 90 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया. मौसम विभाग के मुताबिक, दिल्ली का अधिकतम तापमान 43.1 डिग्री सेल्सियस रहा. वहीं न्यूनतम तापमान 31.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया.

इस खबर में हमें जानने को मिला कि एक जुलाई को दिल्ली का न्यूनतम और अधिकतम तापमान कितना रहा? आगे हम इस स्टोरी में यही जानने की कोशिश करेंगे कि किसी शहर का तापमान कैसे नापा जाता है, क्या सिस्टम होता है, क्या शहर में जगह-जगह लगे वेदर स्टेशन तापमान का ऐवरेज निकालते हैं, वगैरा-वगैरा.

इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए हमने बात की भारतीय मौसम संबंधी भविष्यवाणी करने और मौसम की जानकारी देने वाली प्राइवेट कंपनी Skymet Weather के वाइस प्रेसिडेंट महेश पलावत से. उन्होंने बताया कि किसी भी शहर के मिनिमम और मैक्सिमम टेंप्रेचर को थर्मामीटर से नापते हैं. इसके लिए शहर में ऑब्ज़र्वेटरी होती हैं. मौसम विभाग, एयर फोर्स और प्राइवेट संस्थानों की. यहां एक Stevenson Screen (नीचे तस्वीर देखें) होती है. इसकी फेसिंग नॉर्थ की तरफ होती है जिससे किरणें डायरेक्ट उसके अंदर नहीं पड़ पातीं.

Stevenson Screen
Stevenson screen कुछ इस तरह की होती है.

Stevenson Screen को किसी भी स्ट्रक्चर से कम से कम 10 मीटर की दूरी पर लगाते हैं ताकि सूर्य के प्रकाश में कोई बाधा न आए. इसे पृथ्वी की सतह से कम से कम 1.2 मीटर की ऊंचाई पर लगाया जाता है, क्योंकि सतह पर मौजूद घास या खुद सतह के तापमान और 1.2 मीटर ऊंचे यंत्र के तापमान में 6-7 डिग्री सेल्सियस का अंतर आ जाता है.

Stevenson Screen में चार थर्मामीटर लगे होते हैं. ड्राई बल्ब थर्मामीटर, वेट बल्ब थर्मामीटर, मिनिमम थर्मामीटर और मैक्सिमम थर्मामीटर. ड्राई बल्ब थर्मामीटर लगातार टेंप्रेचर बताता है. जो सेंसर होते हैं, उनमें देखा जाता है कि कहीं उनमें एरर तो नहीं है. मान लीजिए कि चार थर्मामीटर लगे हैं, और चारों में अलग-अलग टेंप्रेचर आ रहा है तो फिर वो एरर हो जाएगा. एक्चुअल टेंप्रेचर वाले थर्मामीटर के साथ उसे सेट किया जाता है. कई दिनों तक कंपेयर किया जाता है. अगर उसमें कुछ एरर है तो उसे नोट कर लिया जाता है. मान लीजिए कि -1 पॉइंट का अंतर पड़ रहा है तो -1 पॉइंट का टैग लगा देंगे, जिससे कि रीडिंग के टाइम -1 पॉइंट एरर ध्यान में रहे. ये सारे थर्मामीटर कैलिबरेटेड होते हैं.

Stevenson Screen1
Stevenson Screen में लगे चारों थर्मामीटर को देखें.

आजकल ऐसे सेंसर भी आ गए हैं जिन्हें ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन यानी AWS कहते हैं. इनमें RTD रेजिस्टेंस टेंप्रेचर डिटेक्टर सिस्टम लगा होता है जो हर सेकंड होने वाले तामपान के बदलाव को भी रिकार्ड कर लेता है. इससे तापमान के आंकड़े और सटीक आते हैं.

न्यूनतम और अधिकतम तापमान कब नापते हैं?

महेश पलावत का कहना है कि मैक्सिमम टेंप्रेचर शाम को साढ़े पांच बजे नापा जाता है. क्योंकि तब तक तापमान मैक्सिमम पहुंच चुका होता है. थर्मामीटर में जो मार्क होता है, वो मैक्सिमम तक पहुंचता है. उसके बाद अगर तापमान गिरने लग जाता है तो वो वहीं पर रुक जाता है. अगर बाद में भी तापमान नापा जाएगा तो पता चल जाएगा कि दिन में कितना अधिकतम तापमान गया. वहीं अगर मिनिमम टेंप्रेचर की बात करें तो इसे सुबह साढ़े आठ बजे नापते हैं. क्योंकि सूरज उगने से कुछ देर पहले ही तापमान सबसे कम होता है.

किसी शहर का तापमान कैसे बताते हैं?

इसके लिए किसी भी शहर की एक विशेष ऑब्ज़र्वेटरी के तापमान को बेंचमार्क माना जाता है. दिल्ली की बात करें तो यहां का ऑब्जर्वेटरी बेंचमार्क सफदरजंग है. दिल्ली में कई जगहों पर तापमान नापने वाले सेंटर हैं. पीतमपुरा, आया नगर, लोधी रोड, पालम. लेकिन इन सबकी रीडिंग नहीं मानी जाती.

ऐसे ही हर शहर में एक विशेष ऑब्ज़र्वेटरी होती है. उसे मानते हैं. इसे चुनने के पीछे कोई खास वजह नहीं है. शहर में कई सारे डेटा पॉइंट होते हैं और हर जगह कुछ ना कुछ डिफरेंस रहता ही है. इसलिए एक ऑब्ज़र्वेटरी को चुन लिया जाता है.

‘रिकॉर्ड टूट गया’ का क्या मामला है?

इस स्टोरी की शुरुआत में हमने जिक्र किया था- ‘एक जुलाई को दिल्ली में गर्मी ने पिछले 90 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया’. इसका पता मौसम विभाग के पास पड़े डेटा से लगाते हैं. मान लीजिए एक जुलाई 2021 को दिल्ली का तापमान 43.1 डिग्री सेल्सियस रहा तो ये देखा जाएगा कि पिछले 100 सालों में एक जुलाई के दिन तापमान कितना रहा. फिर तुलना कर बताएंगे कि रिकॉर्ड टूटा या बना.

मोबाइल में ‘कल का तापमान’ कैसे आ जाता है?

ये फोरकास्ट होता है. स्काईमेट वेदर के उपाध्यक्ष महेश पलावत ने हमें बताया कि ज्यादातर स्मार्टफोन कंपनियों का अमेरिका की एक मीडिया कंपनी AccuWeather से टाइअप है. ये पूरी दुनिया में मौसम की भविष्यवाणी से जुड़ी सर्विसेज देती है. इसके डेटा के आधार पर फोन पर मौसम की जानकारी मिलती है. महेश ने ये भी बताया कि जियो के साथ स्काईमेट का टाइअप होने वाला है. यानी जियो के फोन में भी स्काईमेट वेदर के जरिए मौसम की जानकारी मिलेगी.


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