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डेटिंग ऐप पर 150 से ज्यादा गे पुरुषों को फंसाया, लेकिन विक्टिम शिकायत भी नहीं कर पा रहे

डेटिंग ऐप का इस्तेमाल कर लोगों से मिलना कुछ पुरुषों के लिए बहुत बड़ी मुसीबत साबित हुआ. दिल्ली NCR के करीब 150 लोगों को डेटिंग ऐप Grindr पर बेवकूफ बनाया गया. उन्हें फंसाया गया. डेट पर बुलाया गया. अश्लील तसवीरें खींची गईं, लूटा गया, फिर उन तस्वीरों से उन्हें ब्लैकमेल भी किया गया.

मामला क्या है?

नवंबर, 2019 में इस रैकेट का भंडाफोड़ हुआ. छह लोग इसे चला रहे थे. ये लोग भोंडसी से थे. इन्होंने डेटिंग ऐप पर नकली प्रोफाइल्स बनाने के लिए तीन इंजीनियर्स हायर किए थे. हिन्दुस्तान टाइम्स में छपी रिपोर्ट के मुताबिक़, इन इंजीनियर्स को महीने के 30,000 रुपये देने का वादा किया गया था. इनके पास से करीब 300 लोगों का डेटा निकला है. ये लोग डेटिंग ऐप की मदद से गे पुरुषों से बात करते थे. उन्हें मिलने बुलाते थे. ड्राइव के बहाने उन्हें सुनसान जगह पर ले जाते थे, फिर गाड़ी रुकवा कर उनको लूट लेते थे. पुलिस ने बताया कि तीन महीनों में इन लोगों ने 150 से ज़्यादा लोगों को लूटा है.

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डेटिंग ऐप्स पिछले चार पांच सालों में काफी पॉपुलर हुए हैं. उसी के साथ इनका क्राइम में इस्तेमाल भी बढ़ा है. (सांकेतिक तस्वीर: पिक्साबे)

कैसे सामने आया पूरा केस?

नवंबर के पहले हफ्ते में एक व्यक्ति ने अपने एक दोस्त को इस बारे में बताया. उसने बताया कि उसे डेटिंग ऐप पर मिले लड़के ने लूटा. बाद में ब्लैकमेल करके पैसे मांगे. इसके बाद दोस्त उसे पुलिस के पास लेकर गया.

कैसे फंसाते थे लोगों को?

गूगल से ये लोग ढेर सारी फोटोज डाउनलोड करते थे. उनका इस्तेमाल करके डेटिंग ऐप पर प्रोफाइल बनाते थे. लोगों से बात करते थे. अधिकतर दिल्ली, गुरुग्राम, नोएडा, गाज़ियाबाद के होते थे. बातचीत पक्की होने के बाद उन्हें सेक्टर 29 बुलाते थे. उनमें से कोई एक वहां मिलने आता था डेट पर. वह वहां से सदर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे (गुरुग्राम से निकलने वाली सड़क. बीच में गोल्फ कोर्स एक्सटेंशन रोड आता है) पर ड्राइव के लिए चलने को कहता था. सुनसान जगह देखकर अपने साथियों को इन्फॉर्म कर देता था. वो लोग आकर गाड़ी को घेरकर लूट लेते थे. फिर वहां से चम्पत हो जाते थे.

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इनके विक्टिम्स खुलकर सामने आने से हिचक रहे हैं. क्योंकि होमोसेक्सुअलिटी को लेकर अभी भी समाज में टैबू बना हुआ है. (सांकेतिक तस्वीर: पिक्साबे)

कैसे पकड़े गए?

गुरुग्राम के पुलिस कमिश्नर मोहम्मद अकील ने बताया,

‘हमने चार टीमें बनाईं. फिर विक्टिम की मदद से गैंग के उन लोगों का पता लगाया. क्राइम टीम के दो सदस्यों से कहा गया कि वो डेटिंग ऐप पर उनसे दोस्ती करें. हफ्ते भर बाद वो लोग जाल में फंस गए’.

एक कांस्टेबल सेक्टर 29 की पार्किंग में पहुंचा. लक्जरी कार में. वहां पर गैंग वाले लड़के ने उससे मुलाक़ात की. वो लोग SPR गए. वहां पर लड़के ने कार रोकने को कहा. कांस्टेबल ये सब देख रहा था. पीछे से गैंग वालों की दो गाड़ियां आ रही थी. लेकिन उन्हें ये पता नहीं था कि उनके पीछे पुलिस भी तीन निजी गाड़ियों में चल रही है. जैसे ही गैंग वालों ने गाड़ी रोकी, पुलिस ने उन्हें घेर कर पकड़ लिया. दो अभी भी फरार हैं.

मामले में पेच क्या है?

पुलिस के सामने इन लोगों ने करीब 150 लोगों को लूटने और ब्लैकमेल करने की बात कही है. लेकिन अभी तक पुलिस के पास सिर्फ एक ही ऑफिशियल कम्प्लेंट है. पुलिस ने आरोपियों के पास से निकले डेटा का इस्तेमाल कर उनके विक्टिम्स से सम्पर्क किया. ताकि वो उन्हें शिकायत दर्ज करने का मौका दे सकें. लेकिन कई लोग तैयार नहीं हैं. क्यों? क्योंकि ये डेटिंग ऐप गे, बाइसेक्सुअल और ट्रांसजेंडर लोगों के लिए है. यानी ऐसे लोग, जिनकी सेक्सुअल प्रेफरेंस समाज में अभी भी स्वीकृत नहीं है. इन विक्टिम्स में से कई लोग अभी भी अपनी सेक्सुअल प्रेफरेंस को लेकर लोगों के सामने ओपन नहीं हैं. कई तो शादी-शुदा हैं और उनके बच्चे हैं. उनके लिए गे होना एक सामाजिक टैबू है. इसलिए उनके लिए इस मामले में इन्वॉल्व होना आसान नहीं है. हालांकि पुलिस ने अपनी तरफ से उन्हें आश्वासन दिया है कि उनकी पहचान और बाकी जानकारी पूरी तरह से गोपनीय रखी जाएगी. लेकिन फिर भी अभी तक कोई तैयार नहीं हुआ है.

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पुलिस को परेशानी आ रही है बाकियों की कम्प्लेंट दर्ज करने में. वो कोशिश में लगे हैं कि किसी तरह केस को आगे बढ़ाया जाए. गैंग के दो मेंबर अभी भी फरार हैं. (सांकेतिक तस्वीर: पिक्साबे)

क्या गे डेटिंग ऐप्स बाकियों से अलग हैं?

नहीं. जैसे बाकी डेटिंग ऐप्स हैं, वैसे ही ये भी हैं. दूसरे ऐप्स में भी ऑप्शन होता है कि आप डेटिंग के अलावा दोस्ती, नेटवर्किंग इत्यादि भी चुन सकते हैं. वैसा ही इनमें भी होता है. केवल अंतर ये है कि यहां पर लोग थोड़ा सहज महसूस करते हैं. क्योंकि इन ऐप्स पर मिलने वाले लोग उन्हें जजमेंट नहीं देते. वे खुद भी उन्हीं की आइडेंटिटी का एक हिस्सा होते हैं. भारत में सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में होमोसेक्सुअलिटी को अपराध की श्रेणी से हटा दिया था. लेकिन उससे जुड़ा टैबू अभी भी वैसा ही है. इस वजह से भी लोग खुलकर शिकायत दर्ज कराने से हिचक रहे हैं. एक विक्टिम ने तो ये भी कहा कि अगर उनके पास तस्वीरें इत्यादि हुईं, तो वो जेल से निकलने के बाद भी ब्लैकमेल कर सकते हैं. उनके भीतर बैठे इसी डर और स्टिग्मा का फायदा उठाकर उनसे इस गैंग ने लाखों रुपये ऐंठे. और शायद अभी और लोगों को निशाना बनाते, अगर पुलिस के पास वो एक कम्प्लेंट न आई होती तो.


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