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अफज़ल गुरु ने पहले ही बताया था आतंकियों के साथ पकड़े गए DSP का संसद हमले से कनेक्शन

शनिवार. 11 जनवरी 2020. साउथ कश्मीर के कुलगाम जिले का मीर बाज़ार एरिया. पुलिस चेकपोस्ट पर एक तेज़ रफ़्तार गाड़ी को रोका गया. इस गाड़ी में चार लोग सवार थे. पुलिस ने गाड़ी को तलाशा. और हुई गिरफ्तारी. गाड़ी में दो शख्स हिज़बुल मुजाहिदीन के सदस्य थे. एक का नाम नावीद बाबा और दूसरे का नाम रफ़ी अहमद. साथ में एक अन्य व्यक्ति था, जिसे कहा जा रहा कि पेशे से वकील है. और चौथा व्यक्ति था जम्मू-कश्मीर पुलिस का अधिकारी. शुरुआत में पुलिस ने नाम नहीं लिया. लेकिन Kashmir Observer समेत तमाम मीडिया संस्थानों ने अपने सूत्रों के हवाले से खबर छापी कि पकड़े गए पुलिस अधिकारी का नाम देविंदर सिंह है. डीएसपी देविंदर सिंह. इन लोगों के साथ पुलिस को गाड़ी से पांच ग्रेनेड मिले.

स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) में डीएसपी के पद पर कार्यरत रहे देविंदर सिंह इस समय श्रीनगर एयरपोर्ट पर कार्यरत थे. राज्य पुलिस के सम्मानित अधिकारी थे. राष्ट्रपति सम्मान मिला था. और हिज़बुल के दो उग्रवादियों के साथ गिरफ्तार किये गए थे.

खबरें चलीं कि देविंदर सिंह हिज़बुल आतंकियों को दिल्ली लेकर जा रहे थे. ये भी कहा गया कि 2001 संसद हमलों जैसे हमले की साजिश रची जा रही थी. मीडिया खबरों में ये भी बताया जा रहा है कि उग्रवादियों को चंडीगढ़ ले जाया जा रहा था. और वहां सिखों को मारकर पाकिस्तान के खिलाफ रोष भड़काने की साजिश रची गयी थी. हालांकि आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि अभी तक नहीं हो पायी है.

India Today में छपी रिपोर्ट ये भी बताती है कि पकड़े जाने पर देविंदर सिंह ने कहा वो दोषी नहीं हैं. वे इन आतंकियों को सरेंडर के लिए ले जा रहे थे. लेकिन वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि उनके पास सरेंडर से जुड़ी कोई जानकारी नहीं थी. वहीं ये भी कहा गया कि पकड़े गए हिज़बुल सदस्य नावीद बाबा और रफ़ी अहमद से जब अलग-अलग पूछताछ की गयी, तो भी उन लोगों ने किसी सरेंडर का ज़िक्र नहीं किया.

आईजी विजय कुमार ने मीडिया ये बातचीत में बताया कि इस घटना के सामने आने के बाद जम्मू-कश्मीर में कई जगहों पर छापे मारे गए. कई जगहों से भारी मात्रा में हथियार और कारतूस बरामद हुए. हाई सेक्यूरिटी बादामीबाग़ कैंट एरिया के शिवपोरा में मौजूद देविंदर सिंह के घर से भी.

प्रेसवार्ता को संबोधित करते आईजी विजय कुमार, जिन्होंने प्रेसवार्ता में बताया कि हिज़बुल उग्रवादियों को पकड़ने के लिए कैसे चेकपोस्ट लगाए गए थे. बाद में साउथ कश्मीर के आईजी अतुल गोयल ने खुद छापा मारा, हिज़बुल उग्रवादियों के साथ देविंदर सिंह भी गिरफ्तार हुए

FIR नंबर 5/22 सेक्शन 7/20, आर्म्स एक्ट तथा 18, 19, 20 UAPA आदि आईपीसी की तमाम धाराओं के साथ काजीगुंडा थाने में मुकदमा दर्ज किया गया. इसके साथ ही देविंदर सिंह के घर से बरामद हथियारों और सामान पर श्रीनगर स्थित राम मुंशीबाग थाने में अलग से FIR दर्ज की गयी है.

कुछ मीडिया खबरें दावा कर रही हैं कि बीते कुछ समय से देविंदर सिंह की गतिविधियों पर सुरक्षा बलों को संदेह था. India Today से बातचीत में सूत्रों ने बताया है कि बीते दो महीने से डीएसपी देविंदर सिंह सर्विलांस पर थे. आईजी विजय कुमार ने प्रेसवार्ता में बताया कि उन्होंने खुद साउथ कश्मीर के डीआईजी अतुल गोयल से चेकपॉइंट लगाने के लिए कहा था.

Scroll में छपी खबर बताती है कि चेकपॉइंट पर अतुल गोयल खुद मौजूद थे. उन्होंने कार में देविंदर सिंह को उग्रवादियों के साथ देखा, और गुस्से में उन्होंने देविंदर सिंह को कई थप्पड़ लगाए.

यहां किस देविंदर सिंह की बात हो रही है? वही देविंदर सिंह, जिसका नाम उन 76 पुलिसकर्मियों में शामिल था, जिन्हें पिछले साल राष्ट्रपति पुलिस मैडल से नवाज़ा गया था. वही देविंदर सिंह, जो 9 जनवरी को जम्मू-कश्मीर में दौरे पर आ रहे विदेशी राजनयिकों का स्वागत कर रहा था. वही देविंदर सिंह, जिस पर संसद भवन पर हुए हमलों के आरोपी अफज़ल गुरु ने खुद को फंसाने के आरोप लगाए थे.

Devinder Singh With Diplomats From Foreign Countries
9 जनवरी को देविंदर सिंह ने उन विदेशी राजनयिकों का स्वागत किया, जो भारत सरकार के बुलावे पर कश्मीर के दौरे पर आये थे. (देविंदर सिंह लाल घेरे में)

2001. संसद भवन में सफ़ेद अम्बेसडर में पांच आतंकी घुस आए. कार बारूद से भरी हुई. सुरक्षा बलों की कार्रवाई में पांचों आतंकी तो मारे गए. 8 सुरक्षाकर्मी और संसद भवन का 1 माली भी मारे गए. घटना की जांच शुरू. अफज़ल गुरु नाम के शख्स को श्रीनगर से गिरफ्तार किया गया. दिल्ली लाया गया. अफज़ल गुरु पर मुक़दमा चला. फांसी की सज़ा हुई. फरवरी 2013 में अफज़ल गुरु को फांसी दी गयी. फांसी के बाद अफज़ल गुरु के घरवालों ने अफज़ल का एक पत्र सार्वजनिक किया. ये पत्र अफज़ल गुरु ने 2004 में जेल से अपने वकील को लिखा था. इस पत्र में अफज़ल गुरु ने देविंदर सिंह का नाम लिया था. साथ ही पत्रिका “कैरवान” के सम्पादक विनोद के. जोश के साथ जेल में हुई बातचीत में अफज़ल गुरु ने देविंदर सिंह का ज़िक्र किया था. ये इंटरव्यू उस समय पत्रिका “तहलका” में प्रकाशित हुआ था. 

अफज़ल गुरु के “टॉर्चर” से शुरू हुई कहानी

2006 में तिहाड़ जेल में विनोद के. जोश के साथ हुई बातचीत में अफज़ल गुरु ने ज़िक्र किया कि वह एक बार बॉर्डर पार करके पाकिस्तान के तरफ वाले कश्मीर चला गया था. उसने उग्रवादियों के साथ ट्रेनिंग शुरू की. बाद में अफज़ल गुरु को लगा कि सीमापार के नेता कश्मीर को भारत के नेताओं की तरह ही इस्तेमाल कर रहे हैं. अफजल गुरु भारत वापिस. सरेंडर किया और अफज़ल को मिला सरेंडर किए गए उग्रवादी का सर्टिफिकेट. 

Afzal Guru
अफज़ल गुरु, संसद पर हमलों का आरोपी जिसने देविंदर सिंह पर सबसे पहले आरोप लगाए थे.

अफज़ल ने नया जीवन शुरू किया. स्कूटर खरीदा. शादी की. लेकिन, बकौल अफज़ल, जब भी कश्मीर में आतंकियों या अलगाववादियों की ओर से किसी घटना को अंजाम दिया जाता था, तो अफज़ल गुरु को जम्मू-कश्मीर पुलिस और एसटीएफ की ओर से सबसे अधिक परेशान किया जाता था. कई बार कई हफ्तों तक बेबुनियाद हिरासत में रखा जाता था. 

अफज़ल को हुमहुमा के एसटीएफ टॉर्चर कैम्प में रखा जाता था. और डीएसपी विनय गुप्ता और डीएसपी देविंदर सिंह की अगुवाई में उसे टॉर्चर किया जाता था. देविंदर सिंह इस समय स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) का हिस्सा था. इंस्पेक्टर शांति सिंह उनका टॉर्चर एक्सपर्ट था. अफज़ल गुरु ने कहा कि टॉर्चर के दौरान उसके प्राइवेट पार्ट्स में बिजली के झटके दिए जाते थे. और मोटी घूस देने पर छोड़ा जाता था. 

अफज़ल गुरु ने बताया कि घूस देने के लिए उसे अपनी पत्नी के गहने और अपनी स्कूटर भी बेचने पड़े. घूस इसलिए क्योंकि अधिकारी अफज़ल को झूठे केसों में फंसा देने की धमकी देते थे. अफज़ल गुरु ने कहा कि बिजली के झटके खाकर उसकी हालत ऐसी हो गयी थी कि वो अपनी पत्नी के साथ शारीरिक संबंध नहीं बना पाता था.

देविंदर सिंह का “एक छोटा-सा काम”

बकौल कैरवान, आर्थिक तौर पर अफज़ल गुरु पूरी तरह से टूट चुका था. खुद को और परिवार को टॉर्चर न सहना पड़े, इसलिए अफज़ल गुरु ने आंख मूंदकर एसटीएफ का साथ दिया. ऐसे ही एक मौके पर देविंदर सिंह ने अफज़ल गुरु को “एक छोटे-से काम” के लिए बुलाया, अफज़ल गुरु मना नहीं कर पाया.

संसद भवन पर हमले में अफज़ल गुरु को मुख्य आरोपी बनाया गया था, लेकिन अफज़ल गुरु ने कहा कि हमले में मारे गए आतंकी मोहम्मद को दिल्ली लाकर बसाने की ज़िम्मेदारी अफज़ल को देविंदर सिंह ने दी,
संसद भवन पर हमले में अफज़ल गुरु को मुख्य आरोपी बनाया गया था, लेकिन अफज़ल गुरु ने कहा कि हमले में मारे गए आतंकी मोहम्मद को दिल्ली लाकर बसाने की ज़िम्मेदारी अफज़ल को देविंदर सिंह ने दी,

देविंदर सिंह ने अफज़ल गुरु से कहा कि उसे एक आदमी को दिल्ली लेकर जाना है. अफज़ल ने कहा,

“मुझे उस आदमी के लिए दिल्ली में किराए पर एक घर ढूंढना था. मैं उस आदमी से पहली बार मिला था. लेकिन वो आदमी कश्मीरी नहीं बोल पा रहा था इसलिए मुझे लगा कि वो आदमी बाहरी है. उसने मुझे अपना नाम मोहम्मद बताया.” 

बाद में मोहम्मद की पहचान संसद भवन पर हमले में मारे गए आतंकी के तौर पर हुई. अफज़ल गुरु और मोहम्मद दिल्ली आ गए. दिल्ली में रहने के दौरान दोनों की देविंदर सिंह से बातचीत होती रहती थी. अफ़ज़ल गुरु ने ध्यान दिया कि मोहम्मद दिल्ली में बहुत सारे लोगों से मिलता था. उसने दिल्ली में एक कार खरीदी. और कार खरीदने के बाद उसने अफज़ल गुरु को 35 हज़ार रूपए दिए और अपने घर कश्मीर चले जाने को कहा. अफज़ल गुरु अपने घर की ओर रवाना. और श्रीनगर बस स्टैंड पर सोपोर की बस पकड़ने की तैयारी थी, उसी समय अफज़ल गुरु को गिरफ्तार कर लिया गया. दिल्ली लाया गया. और अफज़ल गुरु को पता चला कि वो संसद भवन पर हुए हमलों का मुख्य आरोपी है.

अफ़ज़ल गुरु को फांसी दी गयी 2013 में. फांसी दिए जाने के बाद अफ़ज़ल गुरु के परिवार ने उनका 2004 में लिखा पत्र जारी किया, जिसमें देविंदर सिंह से जुड़े खुलासे शामिल थे.

अफज़ल गुरु के इस बयान के बाद भी देविंदर सिंह पर कोई कार्रवाई नहीं की गयी. अलबत्ता, लम्बे समय तक इस बयान की लोगों को भनक तक नहीं हुई. हिज़बुल के उग्रवादियों के साथ देविंदर सिंह की गिरफ्तारी के बाद अफज़ल गुरु की ये कहानी फिर से चल निकली है. 

पहले भी आया देविंदर सिंह का विवादों में नाम

गिरफ्तारी के दौरान देविंदर सिंह श्रीनगर एयरपोर्ट पर एंटी-हाईजैकिंग स्क्वाड में शामिल थे. उनकी जम्मू-कश्मीर पुलिस के एक “डेकोरेटेड” अधिकारी के रूप में पहचान शुरू होती है 1994 में. जब राज्य की पुलिस से अलग STF का गठन किया गया था. इसे उस समय जम्मू-कश्मीर पुलिस का एसटीएफ कहा जाता था. देविंदर सिंह की इच्छा थी कि STF में शामिल हों. हो गए. बाद में STF का नाम बदलकर SOG कर दिया गया. देविंदर सिंह की पोस्टिंग कश्मीर के बडगाम में.

साल 2001. ख़बरें आने लगीं कि SOG की कस्टडी में लोगों की मौतें हो रही हैं. बहुत बड़े स्तर पर कश्मीर में प्रदर्शन होने लगे. SOG के DSP के रूप में तैनात देविंदर सिंह का ट्रांसफर कर दिया गया. उन्हें सेन्ट्रल कश्मीर के स्टेट इंटेलिजेंस में इंस्पेक्टर बनाकर भेज दिया गया.

इसके बाद 2015 में भी देविंदर सिंह का नाम खबरों में आया था. उनके साथ-साथ डीएसपी मुहम्मद यूसुफ़ मीर के खिलाफ FIR दर्ज की गयी. दोनों पर आम लोगों से पैसे उगाहने और उन्हें झूठे मुकदमों में फंसाने का आरोप लगा था.


लल्लनटॉप वीडियो : जम्मू-कश्मीर में डीएसपी देविंदर सिंह दो आतंकियों के साथ अरेस्ट किए गए

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