Submit your post

Follow Us

DU: ऑनलाइन एग्जाम कराने के फैसले का विरोध क्यों कर रहे टीचर्स-स्टूडेंट?

14 मई 2020. दिल्ली यूनिवर्सिटी ने एक नोटिफिकेशन जारी किया. इस नोटिफिकेशन में बताया गया कि ग्रेजुएशन और मास्टर्स के सभी फाइनल ईयर/सेमेस्टर स्टूडेंट्स की परीक्षा 1 जुलाई 2020 से आयोजित की जाएगी. यदि कोरोना वायरस महामारी के कारण स्थिति बिगड़ती है, तो फाइनल सेमेस्टर/ईयर के लिए ओपन बुक एग्जामिनेशन (OBE) के जरिए परीक्षा आयोजित की जाएगी. कहा गया कि मई के अंत तक एग्जाम का पूरा शेड्यूल जारी कर दिया जाएगा.

डीन एग्जाम द्वारा जारी किया गया नोटिफिकेशन
डीन एग्जाम द्वारा जारी किया गया नोटिफिकेशन

ओपन बुक एग्जाम यानी स्टूडेंट्स अपने किताब, नोट्स साथ रखकर एग्जाम दे सकते हैं. क्वेश्चन को सॉल्व करने के लिए इनकी मदद ले सकते हैं. और ऑनलाइन ओपन बुक एग्जाम में स्टूडेंट्स अपने घर से ही क्वेश्चन पेपर डाउनलोड करेंगे और अपनी शीट पर सारे प्रश्नों के जवाब लिखेंगे. इसके बाद ऑन्सर शीट को स्कैन करेंगे और वेबसाइट पर अपलोड कर देंगे.

जैसे ही यूनिवर्सिटी की तरफ से ये सर्कुलर जारी हुआ स्टूडेंट्स और टीचर्स सबने इसका विरोध करना शुरू कर दिया. 15 मई को ट्विटर पर #DUAgainstOnlineExams ट्रेंड करने लगा और इस हैशटैग पर 48000 से ज्यादा ट्वीट हुए. डीयू में लॉ की पढ़ाई कर रहीं अमीशा कहती हैं,

जिस तरह से एडमिनिस्ट्रेशन ने हॉस्टल खाली करवाया था कई लोग जैसे तैसे की स्थिति में दो-दो जोड़ी कपड़े लेकर घर गए हैं. किताबें, स्टडी मैटेरियल, नोट्स सब यहीं है. इस माहौल में क्या आपको लगता है कि एग्जाम कराना सही है? जिस दिन हमारा रिजल्ट आता है उस दिन वेबसाइट हैंग हो जाती है. और अब ये कह रहे हैं कि 3 घंटे ऑनलाइन एग्जाम कराएंगे. जब इन्होंने एग्जाम का फॉर्म निकाला था तभी इन्हें पूछ लेना चाहिए था कि क्या आपके पास इंटरनेट फैसिलिटी है, लैपटॉप है?

ऑल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन (AISA) ने DU के लगभग 1500 स्टूडेंट्स पर एक सर्वे किया. इस सर्वे के मुताबिक 72 प्रतिशत स्टूडेंट ऐसे हैं जो खराब नेटवर्क की वजह से ऑनलाइन क्लासेज नहीं अटेंड कर पा रहे हैं. जब स्टूडेंट क्लास ही अटेंड कर पाने की स्थिति में नहीं हैं तो फिर ऑनलाइन एग्जाम उनके लिए दूर की कौड़ी साबित होती है. AISA से जुड़ी दामिनी केन कहती हैं,

3 घंटे के अंदर क्वेश्चन पेपर डाउनलोड करना. सॉल्व करना और फिर उसे स्कैन करके अपलोड करना काफी लंबी प्रक्रिया है और ये सब उसी 3 घंटे में करना है. इसके लिए काफी इंटरनेट भी चाहिए होगा. बहुत सारे लोग ऑनलाइन क्लासेज नहीं ले पा रहे हैं. क्योंकि उनके यहां इंटरनेट कनेक्शन उस तरह का नहीं है. स्टूडेंट्स को भी कोई क्लैरिटी नहीं है कि किस तरह से एग्जाम होगा. ये सिर्फ लास्ट ईयर की बात नहीं है. ये रिजल्ट आपके ग्रेजुएशन या मास्टर्स के रिजल्ट को प्रभावित करेगा. अगर किसी के कम मार्क्स आते हैं ग्रेजुएशन में तो उसे मास्टर्स में एडमिशन लेने में भी दिक्कत होगी. क्योंकि दिल्ली यूनिवर्सिटी में 50 प्रतिशत सीट मार्क्स के आधार पर जाती हैं.

सोशल मीडिया पर डीयू के फैसले के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराते स्टूडेंट.
सोशल मीडिया पर डीयू के फैसले के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराते स्टूडेंट.

ऑनलाइन एग्जाम कराने के यूनिवर्सिटी के फैसले का विरोध सभी छात्र संगठन कर रहे हैं. दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ और ABVP ने भी यूनिवर्सिटी के इस फैसले का विरोध किया है. NSUI ने ऑनलाइन एग्जाम पैटर्न का विरोध करते हुए साइन कैंपन चलाया. जिस पर अब तक करीब 70 हजार स्टूडेंट्स साइन कर चुके हैं. NSUI की मीडिया को-ऑर्डिनेटर रश्मि कहती हैं,

डीयू में हर जगह के बच्चे आते हैं. दूर दराज के गांवों से भी बच्चे आते हैं, लद्दाख से बच्चे आते हैं. कश्मीर से भी आते हैं. नॉर्थ-ईस्ट स्टेट्स के बच्चे भी आते हैं. वो कैसे देंगे एग्जाम? बहुत सारे स्टूडेंट्स के पास तो लैपटॉप भी नहीं है. वे ऑनलाइन क्लासेज भी नहीं ले पा रहे हैं. यूनिवर्सिटी को उनके बारे में भी सोचना चाहिए कि वे एग्जाम कैसे देंगे?

दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (DUTA) ने ऑनलाइन एग्जाम आयोजित करने के सिस्टम को “भेदभावपूर्ण” और “अनुचित” बताया.  DUTA ने वीसी को लेटर लिखकर इस फैसले से असहमति व्यक्त की है. DUTA ने लिखा है,

डीयू जैसे बड़े विश्वविद्यालय के लिए यह प्रक्रिया सही नहीं है जहां बड़ी संख्या में अलग-अलग बैकग्राउंड से स्टूडेंट्स आते हैं. और यह चौंकाने वाली बात है कि संस्थान ने इसे एकमात्र साधन के रूप में अपनाया है. हम सभी स्टूडेंट्स के लिए पेन-पेपर के जरिए एग्जाम देने के विकल्प की मांग करते हैं. 

ओपन-बुक एग्जाम का कॉन्सेप्ट और जिस तरह से अब तक हमारे स्टूडेंट एग्जाम देते आ रहे हैं उससे बहुत अलग है. कोरोना महामारी की वजह से सामान्य टीचिंग-लर्निंग प्रोसेस बुरी तरह से प्रभावित हुई है. ऐसे कठिन समय में इस तरह के फैसले स्टूडेंट्स को और ज्यादा परेशान करेंगे.

DUTA ही नहीं स्टूडेंट्स भी ऑनलाइन एग्जाम को एकतरफा थोपा गया फैसला बताते हैं. अमीशा यूनिवर्सिटी के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहती हैं,

महामारी के समय में इस तरह के प्लान लाकर ये यही सिद्ध करना चाहते हैं कि इनका कभी आइडिया ऑफ लर्निंग था ही नहीं. इनका बस यही सिद्धांत है कि एग्जाम करवाना है , डिग्री देनी है. बस किसी तरह से करवा लो. स्टूडेंट को क्या दिक्कत है, उसके लर्निंग का क्राइटेरिया पूरा हुआ कि नहीं हुआ? उससे इन्हें मतलब नहीं.

कोरोना वायरस की वजह से लॉकडाउन किया गया. और लॉकडाउन हुआ तो शुरूआत में स्टूडेंट्स को कैंपस से घर जाने के लिए कह दिया गया. ऐसे में ढेर सारे स्टूडेंट्स ऐसे हैं जो अपना सारा स्टडी मैटेरियल हॉस्टल या अपने रूम में ही छोड़ गए. अब वे जहां पर हैं वहां इंटरनेट कनेक्टिविटी उतनी अच्छी है नहीं कि एग्जाम की तैयारी सही तरीके से की जा सके. ऐसे में स्टूडेंट्स मांग कर रहे हैं कि यूनिवर्सिटी को इस तरह के किसी भी फैसले से पहले टीचर्स, स्टूडेंट्स सभी स्टेकहोल्डर्स से बात करनी चाहिए. इस तरह के एकतरफा निर्णय उन स्टूडेंट्स के साथ ज्यादती होगी जो संसाधनों के लिहाज से कमजोर हैं.


कोरोना लॉकडाउन के इस दौर में स्टूडेंट्स कई मोर्चों पर लड़ाई लड़ रहे हैं. लेकिन ये लड़ाई अकेले की नहीं. इसलिए अनुभव साझा करना है जरूरी. अगर आप भी अपने दोस्त दी लल्लनटॉप के साथ शेयर करना चाहते हैं अपनी दिक्कतें और एक्सपीरिएंस तो हमें मेल करें YUVA.LALLANTOP@GMAIL.COM पर.


वीडियो: क्या है यूपी के 69 हजार शिक्षकों की भर्ती का मामला?

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

कौन हो तुम

'हिटमैन' रोहित शर्मा को आप कितना जानते हैं, ये क्विज़ खेलकर बताइए

आज 33 साल के हो गए हैं रोहित शर्मा.

क्विज़: खून में दौड़ती है देशभक्ति? तो जलियांवाला बाग के 10 सवालों के जवाब दो

जलियांवाला बाग कांड के बारे में अपनी जानकारी आप भी चेक कर लीजिए.

मधुबाला को खटका लगा हुआ था इस हीरोइन को दिलीप कुमार के साथ देखकर

एक्ट्रेस निम्मी के गुज़र जाने पर उनको याद करते हुए उनकी ज़िंदगी के कुछ किस्से

90000 डॉलर का कर्ज़ा उतारकर प्राइवेट जेट खरीद लिया था इस 'गैंबलर' ने

उस अमेरिकी सिंगर की अजीब दास्तां, जो बात करने के बजाए गाने में ज़्यादा कंफर्टेबल महसूस करता था

YES Bank शुरू करने वाले राणा कपूर कौन हैं, जिन्होंने नोटबंदी को 'मास्टरस्ट्रोक' बताया था

यस बैंक डूब रहा है.

सात साल पहले केजरीवाल ने वो बात कही थी जो आज वो ख़ुद नहीं सुनना चाहते

बरसों पुरानी इस बात की वजह से सोशल मीडिया पर घेर लिए गए हैं.

क्या भारत सरकार से पूछे बिना पाकिस्तान चली गई इंडियन कबड्डी टीम?

अब ढेरों खेल-तमाशा हो रहा है.

बजट का कितना ज्ञान है, ये क्विज़ खेलकर चेक कर लो!

कितना नंबर पाया, बताते हुए जाना. #Budget2020

संविधान के कितने बड़े जानकार हैं आप?

ये क्विज़ जीत लिया तो आप जीनियस हुए.

क्रिकेट के पक्के वाले फैन हो तो इस क्विज़ को जीतकर बताओ

कित्ता नंबर मिला, सच-सच बताना.