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2 से 18 साल के बच्चों के लिए आई कोविड-19 वैक्सीन हम-आप तक कब तक पहुंचेगी?

कोरोना महामारी की शुरुआत में ही वैज्ञानिकों ने चेता दिया था कि इस बला का एक ही इलाज है – टीका. दुनियाभर के वैज्ञानिक काम में जुट गए. अलग-अलग रास्तों से टीके का सफर शुरू हुआ, लेकिन पहुंचना सभी को एक ही जगह था – पूरी आबादी को संक्रमण से सुरक्षा दिलाना. ये तय करना कि वायरस के संपर्क में लोग आएं, तब भी उन्हें बीमारी न हो. अगर हो, तो उनकी तबीयत न बिगड़े और अगर बिगड़े तो सामान्य इलाज से वो ठीक हो सकें. अब तक दुनिया भर में जितने टीके बने हैं – पूर्व या पश्चिम में – उन सबने इस लक्ष्य को प्राप्त किया है.

महामारी की शुरुआत में ही एक और चीज़ देखने को मिली थी. वो ये, कि संक्रमण से ज़्यादा खतरा वयस्कों या बुज़ुर्गों को था. इसीलिए दुनिया में ज़्यादातर जगह जब-जब क्रमबद्ध तरीके से लॉकडाउन लगाया गया, स्कूल सबसे आखिर में बंद किए गए. और जब खोला गया, तब सबसे पहले शुरू किये गए. भारत में ज़रूर इसका उलटा हुआ लेकिन यहां के विशेषज्ञों ने भी उम्र के आधार पर संक्रमण के इस पैटर्न में विश्वास दिखाया. इसीलिए तो जब आम लोगों के लिए टीका आया, सबसे पहले 60 से ऊपर की उम्र के लोगों को लगाया गया. इनके बाद 45 से ऊपर के लोगों को और फिर आखिर में नंबर आया 18 से ऊपर की उम्र के लोगों का. इस स्कीम से बच्चे शुरुआत में ज़रूर बाहर थे लेकिन सरकार ने जब 21 जून को टीकाकरण की नई नीति लागू की थी, तभी कह दिया था साल के आखिर तक टीकों का उत्पादन ऐसे स्तर पर पहुंच जाएगा, जहां उन समूहों को भी टीका दिया जाएगा, जिन्हें अभी शामिल नहीं किया गया है. सरकार इसी भाषा में बात करती है. सादी भाषा में इसका मतलब यही था कि बच्चों का नंबर आएगा, लेकिन बाद में. अब बच्चों को टीका देने की तरफ भारत एक और कदम बढ़ाता दिख रहा है.

बच्चों का टीका

12 अक्टूबर को ये खबर आई कि Central Drugs Standard Control Organisation माने CDSCO की सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी ने बच्चों के लिए कोवैक्सीन टीके को आपात अनुमति देने का फैसला कर लिया है. सीडीएससीओ भारत में दवाओं और मेडिकल उपकरणों को मंज़ूरी देने का काम करता है. ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया का दफ्तर इसी संस्थान का हिस्सा है और यहां से मंज़ूरी मिलने के बाद ही भारत में किसी दवा का इस्तेमाल किया जा सकता है. और इस मंज़ूरी के लिए ज़रूरी है सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी की अनुशंसा. तो बच्चों के लिए कोवैक्सीन के मामले में हाथी निकल चुका है, बस पूंछ बाकी है. कोवैक्सीन का टीका 2 साल से 18 साल तक के बच्चों दिया जा सकेगा.

12-17 साल के बच्चों के लिए ज़ायडस

ये अच्छी खबर है, कि बच्चों के लिए कोवैक्सीन को मंज़ूरी मिल गई है. लेकिन कोवैक्सीन से पहले भी भारत में बच्चों के लिए एक टीका मौजूद था. इसे बनाया है ज़ायडस कैडिला ने. नाम है ज़ायकोव-डी. ये टीका 12-17 साल के बच्चों के लिए है. इसे 20 अगस्त को अनुमति मिल गई थी. ज़ायकॉव डी को भारत में ही बनाया गया है. सुई से डरने वालों को ये टीका बहुत पसंद आएगा क्योंकि ये टीका लगाने के लिए सुई का इस्तेमाल नहीं होता. लेकिन डोज़ तीन होती है. मान लीजिए आज आपने टीका लिया, तब आपको 28 वें दिन दूसरी डोज़ लेनी होगी और 56 वें दिन तीसरी. ज़ायकॉव डी भारत सरकार द्वारा चलाए गए टीकाकरण कार्यक्रम में 20 अक्टूबर से शामिल होगा. 75 फीसदी उत्पादन जाएगा केंद्र सरकार के पास, जो इसे राज्यों को आवंटित करेगी और 25 फीसदी टीके निजी अस्पतालों को दिए जाएंगे. सरकारी टीकाकरण केंद्रों में टीका मुफ्त ही रहेगा. निजी अस्पताल इसके लिए एक तय फीस लेंगे. खबर है कि ज़ायडस ने 1900 रुपए के दाम का प्रस्ताव रखा है. लेकिन सरकार ने कीमत पर अंतिम फैसला नहीं लिया है.

सीरम भी बच्चों का टीका ला सकता है

भारत बायोटेक और ज़ायडस के अलावा सीरम इंस्टीट्यूट भी बच्चों के लिए अपने टीके को अनुमति दिलाने में लगा है. इसका नाम होगा कोवावैक्स. एक चौथी कंपनी है बायोलॉजिकल ई. ये भी बच्चों के लिए टीके को अनुमति मिलने का इंतज़ार कर रही है. बायोलॉजिकल ई और सीरम इंस्टीट्यूट दोनों, अभी अप्रूवल प्रोसेस के अलग अलग चरणों में हैं जिनमें एप्लिकेशन, टेस्टिंग वगैरह शामिल है.

तो अब भारत के पास बच्चों के लिए टीके तो हैं. इंतज़ार है बस सरकार द्वारा गाइडलाइन सार्वजनिक करने का. भारत में किसी भी तरह के टीकाकरण कार्यक्रम पर अंतिम निर्णय होता है National Technical Advisory Group on Immunization (NTAGI)में. यहां कोविड 19 स्टैंडिंग कमेटी है, जो गाइडलाइन बनाकर National Expert Group on Vaccine Administration for Covid-19 (NEGVEC). ये गाइडलाइन जल्द सामने आ सकती है. ये माना जा रहा है बच्चों को भी टीका चरणबद्ध तरीके से दिया जाएगा. इसका मतलब ये हुआ कि बच्चों के कुछ समूहों को प्राथमिकता मिल सकती है.

12 अक्टूबर की दोपहर केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री डॉ भारती प्रवीण पवार ने कहा कि कोवैक्सीन टीके के बच्चों में आपात इस्तेमाल की अनुमति फिलहाल मिली नहीं है. इस अनुमति पर फिलहाल विशेषज्ञ विचार कर रहे हैं. इससे कुछ कंफ्यूज़न हुआ कि अनुमति मिली है या नहीं. तो पूरी बात ये है कि सबजेक्ट एक्सपर्ट कमेटी ने टीके के लिए अनुशंसा की है. लेकिन अभी ड्रग कंट्रोलर जनरल के दफ्तर द्वारा इस अनुशंसा पर लिए फैसले का ऐलान नहीं हुआ है. टीके का इस्तेमाल तभी हो सकता है, जब ड्रग कंट्रोलर इस बाबत एक आधिकारिक तौर पर अनुमति दें. लेकिन इतनी बात सभी मान रहे हैं कि अंतिम अनुमति में अब ज़्यादा वक्त नहीं रह गया है.


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