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पाकिस्तान की टीम के जीतने पर भारत में जश्न मनाने वालों को जेल में डालना सही है?

2001 में एक फिल्म आई थी – गदरः एक प्रेम कथा. इसका एक सीन हमारे देश में खूब पसंद किया गया था. वही, जिसमें तारा सिंह हैंड पंप उखाड़ देता है. तारा सिंह गुस्से में है. वो अपने बीवी बच्चों के लिए किसी का सर काट सकता है. इसके बाद तारा सिंह एक पूरी भीड़ से अकेले लोहा लेता है, और अपनी बीवी सकीना, बच्चे और दोस्त के साथ वहां से निकल जाता है. हमें भी ये सीन खूब पसंद है. हैंडपंप का उखड़ना मनोरंजक है. लेकिन मनोरंजन से कहीं कीमती है गर्व. जो हमें तारा की बात सुनकर होता है. एक ट्रक मालिक और किसान – तारा के पास पाकिस्तान से नाराज़ होने की लाख वजहें हैं. उसने बंटवारे का दंश भोगा है. फिर भी उसका विवेक कायम है. उसे मालूम है कि पाकिस्तान ज़िंदाबाद और हिंदुस्तान मुर्दाबाद एक चीज़ नहीं है. उसे पहले नारे से कोई दिक्कत नहीं. उसका खून दूसरे नारे पर खौलता है.

अफसोस की बात है कि जो अक्ल 2001 में आई एक फिल्म के एक ठेठ देसी पात्र के पास थी, वो हमारे सिस्टम, समाज और नेतागणों के पास बाकी नहीं रह गई है. एक क्रिकेट मैच में पाकिस्तान की जीत के बाद लोगों का जश्न 138 करोड़ की आबादी के हमारे मुल्क के लिए इतनी बड़ी समस्या है कि इन मामलों में राजद्रोह से लेकर आतंकवाद की धाराएं लग रही हैं, लोगों की नौकरियां जा रही हैं. मारपीट तो जो हुई, सो हुई ही.

आज यही सवाल पूछेंगे कि क्या क्रिकेट में भारत पर पाकिस्तान की जीत का जश्न महज़ एक छोटी गुस्ताखी है या फिर एक गंभीर अपराध. और इन दोनों सूरतों में एक समाज और देश के तौर पर हमारी प्रतिक्रिया क्या होनी चाहिए.

24 अक्टूबर को हम पाकिस्तान से 10 विकेट से हार गए. हमें अफसोस हुआ. और इसी अफसोस में हम सो भी गए. सुबह उठे तो हर बार की तरह वो खबरें देखीं जिनमें कुछ जगह पाकिस्तान की जीत पर जश्न का ज़िक्र मिला. हमने इन मूर्खों को इग्नोर किया और अपने काम में लग गए. अब इस चक्कर में न पड़िएगा कि लल्लनटॉप एक टीम के समर्थक मूर्ख कैसे हो सकते हैं. उतनी बात समझाने जाएंगे तो पूरी रात में भी खत्म नहीं होगी. खैर, तो हम कह रहे थे कि हम लगे अपने काम में. लेकिन रविवार से लेकर गुरुवार की शाम हो गई, मामला खत्म होने की जगह बड़ा होता जा रहा है. कहीं यूएपीए लग रहा है, कहीं राजद्रोह और कहीं पाकिस्तान की जीत पर जश्न मनाने वालों की नौकरियां जा रही हैं. इसीलिए हमें लगा कि अब इसपर बात कर लेनी चाहिए.

पहले राजस्थान की बात करते हैं

सबसे पहले राजस्थान के मामले की बात करते हैं. उदयपुर के नीरजा मोदी स्कूल की टीचर नफीसा अटारी. इन्होंने 24 अक्टूबर के मैच में पाकिस्तान की जीत के बाद वॉट्सऐप पर स्टेट्स लगाया. जिसमें पाकिस्तानी खिलाड़ियों की फोटो थी, और लिखा था वी वन. हम जीत गए. ये स्टेट्स देखकर किसी अभिभावक ने पूछ लिया कि क्या आप पाकिस्तान के समर्थन में हैं. इस पर टीचर ने कहा – हां. फिर ये स्क्रीनशॉट वायरल हुआ. ABVP के लोगों ने स्कूल में जाकर नारेबाज़ी की. देश के गद्दारों, गोली मारो वाले नारे भी लगे.

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स्कूल की टीचर नफीसा अटारी

वैसे इस नारेबाज़ी पर भी हिंसा के लिए उकसाने के मामले में केस दर्ज हो सकता है. खैर, टीचर वाले अपराध पर लौटते हैं. ABVP कार्यकर्ताओं ने बवाल मचाया तो स्कूल ने टीचर को निकाल दिया. फिर राजेंद्र नाम के आदमी की तहरीर पर पुलिस ने केस दर्ज कर लिया. IPC की धारा 153A लगाई गई. क्या है इस धारा में – इसमें धर्म, जाति, जन्म के स्थान, निवास, भाषा आदि के आधार पर दो समूहों में दुश्मनी बढ़ाने या सौहार्द बिगड़ाने के अपराध आते हैं . दोषी साबित होने पर 3 साल तक की जेल या जुर्माना या दोनों का प्रावधान हैं. अगर अपराध किसी धार्मिक स्थल पर हुआ है तो सजा 5 साल तक की भी हो सकती है.

तो इस धारा में उदयपुर पुलिस ने टीचर को बुधवार को गिरफ्तार किया. फिर मजिस्ट्रेट ने 20 हज़ार रुपये के निजी मुचलके पर ज़मानत दे दी. आरोपी टीचर ने अपने बचाव में कहा,

हम मैच देख रहे थे तो हमने घर में ही दो टीम डिवाइड कर ली थी. हम अपनी-अपनी टीम को सपोर्ट कर रहे थे. इसका ये मतलब नहीं था कि मैं पाकिस्तान को सपोर्ट कर रही हूं. किसी ने मुझे मैसेज किया कि आप पाकिस्तान को ही सपोर्ट कर रहे हो, हंसी मजाक का मूड चल रहा था, उन्होंने अपने मैसेज के आगे इमोजी डाले थे, तो मुझे लगा कि ये हंसी मजाक वाला मैसेज है तो मैंने यस कर दिया. लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि मैं पाकिस्तान से प्यार करती हूं. मैं इंडिया को उतना ही प्यार करती हूं जितना आपलोग करते हैं. किसी को भी ऐसा लगा हो, जैसे ही मुझे एहसास हुआ कि ये गलत वे में जा रहा है तो मैंने मैसेज डिलीट कर दिया.

तो नफीसा अटारी कह रही हैं कि उनका मतलब पाकिस्तान की तारीफ नहीं था, उनके पोस्ट को गलत समझा गया. हो सकता वो सही कह रही हों या हो सकता है उनका इरादा कुछ और रहा हो. बहरहाल, वो माफी मांग चुकी हैं. इसलिए इस मामले से आगे बढ़ना चाहिए.

यूपी में क्या चल रहा है?

कांग्रेस शासित राज्य राजस्थान के बाद अब बीजेपी शासित उत्तर प्रदेश चलते हैं. यूपी में कुल 7 लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज हुए हैं. यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ का भी बयान है कि पाकिस्तान की जीत का जश्न मनाने वालों के खिलाफ राजद्रोह लगेगा. तो यूपी में पुलिस ने ज्यादा सख्ती दिखाई. कहां क्या हुआ, एक एक करते बात करते हैं.

पहले आगरा का केस आगरा पुलिस ने कश्मीर के तीन छात्रों को गिरफ्तार किया है. तीनों आगरा के जगदीशपुर इलाके में पड़ने वाली राजा बलवंत सिंह मैनेजमेंट टेक्निकल कॉलेज के स्टूडेंट हैं. इंजीनियरिंग कर रहे हैं. इनके खिलाफ भाजपा युवा मोर्चा के नेता गौरव राजावत ने थाने में तहरीर दी थी. तहरीर में 6 छात्रों का नाम है. क्या आरोप हैं तहरीर में – कि इन छात्रों ने भारत देश के टुकड़े होंगे, पाकिस्तान ज़िंदाबाद जैसे नारे लगाए. और इस तरह की पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल करते हैं. और इस तहरीर पर पुलिस ने FIR लिखा है – भारत- पाकिस्तान क्रिकेट मैच में भारत के हारने पर पाकिस्तान के समर्थन में नारेबाज़ी किया जाना, और राजद्रोही नारे लगाया जाना.

Agra
कश्मीर के तीनों छात्र.

आगरा के एसपी विकास कुमार का कहना है,

जगदीशपुरा के एक कॉलेज में एक वाक्या सामने आया जिसमें वॉट्सऐप और सोशल मीडिया के माध्यम से भारत-पाकिस्तान के क्रिकेट मैच के बाद कुछ ऐसी टिप्पणी की गई थी जो देश विरोधी थी. इस वाकये पर पुलिस को एक तहरीर प्राप्त हुई जिसमें पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया. उसकी जांच करने के बाद उसमें तीन लोग नामजद थे, तीनों को आज गिरफ्तार किया गया है. और उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है.

पुलिस ने इस मामले में IPC की धारा 153(A), 505(1)B और आईटी एक्ट की धारा 66(F) लगाई है.

#153A के बारे में थोड़ी देर पहले आपको बताया मैंने.
#सेक्शन 505 (1)(B) लोगों के मन में डर फैलाने के इरादे से देश के खिलाफ या जन शांति के खिलाफ कोई कृत्य करना. ये अपराध साबित होने पर 3 साल तक की जेल या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं.

आईटी एक्ट की धारा 66(F) क्या है – साइबर टेररिज़्म के मामलों में ये धारा लगती है.

# इसके सेक्शन A में लिखा है – देश की एकता, अखंडता, सुरक्षा और संप्रभुता को नुकसान पहुंचाने के इरादे से या लोगों के मन में डर फैलाने के इरादे से अगर कोई किसी अधिकृत व्यक्ति को अपने कम्प्यूटर का एक्सेस देने से मना करता है. या बिना इजाजत के किसी कम्प्यूटर को एक्सेस करता है. और इनके पीछे इरादा किसी की जान लेने, या शारीरिक नुकसान या प्रॉपर्टी का नुकसान आवश्यक सेवाओं को बाधित करना हो, तो ये धारा लगती है.

#सेक्शन (B) – कोई जानबूझकर या अनजाने में किसी ऐसे कम्प्यूटर से सूचना निकालता हो, जिसकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से परमिशन ना हो. तो इस तरह के मामलों IT एक्ट की धारा (F) लगाई जाती है.

तो ये सारी धाराएं लगाई गई हैं आगरा पुलिस ने तीन कश्मीरी छात्रों पर.

अपुष्ट खबरों के मुताबिक इन छात्रों को पेशी के दौरान वकीलों ने ही पीट भी दिया.

अब असल में हुआ क्या था. ये हमें नहीं पता. क्या देशविरोधी नारेबाज़ी हुई थी, इसका कोई वीडियो नहीं है. ना ही ऐसा वीडियो शिकायत करने वालों ने पुलिस को दिया है. आरोपी छात्रों के कुछ वॉट्सऐप स्टेट्स हैं जो सबूत के तौर पर पुलिस को बीजेपी युवा मोर्चा के नेता ने दिए हैं. क्या है इनमें – एक स्क्रीन शॉट में वॉट्सऐप के स्टेट्स में बाबर आज़म की फोटो है और उसमें दिल वाला ईमोजी लगा रखा है. एक स्क्रीनशॉट है जिसमें वॉट्सऐप चैट है. इसमें ये समझ में आ रहा है कि पाकिस्तानी टीम का स्टेटस लगाने वाले स्टूडेंट को किसी ने चैट में पूछा कि इंडिया तुम्हारी कंट्री नहीं है क्या, उधर से जवाब आता है. नहीं, मेरा देश कश्मीर है. फिर सामने वाला किसी स्टेट की फोटो पर कमेंट करके लिखता है कि ये टेररिस्ट था. तो सामने वाला लिखता है कि इंडिया का बाप था. वॉट्सऐप स्टेट्स का एक और स्क्रीनशॉट है. इसमें लिखा है – क्या हुआ इंडिया – रिज़वान, बाबर आई लव यू भी लिखा है.

तो इन स्क्रीनशॉट के आधार पर ये पूरा मामला दर्ज किया गया है. आरोपी कश्मीरी छात्रों का पक्ष हमें नहीं मिला. कश्मीर के ये छात्र पीएम स्पेशल स्कॉलरशिप स्कीम के तहत आगरा की कॉलेज में पढ़ रहे थे. इस स्कीम में हर साल 5 हजार कश्मीरी छात्रों को मेडिकल, इंजीनियरिंग, होटल मैनेजमेंट जैसे कोर्सेस करने के लिए स्कॉलरशिप दी जाती है. ट्टूशन फी के अलावा 1 लाख रुपये रहने का खर्च भी दिया जाता है. इस स्कीम के आगरा के कॉलेज RBS कॉलेज में 6 छात्र पढ़ रहे हैं, जिनमें से 3 को कॉलेज से निकाल दिया गया है और अभी वो जेल में हैं.

बदायूं का मामला. यहां फैजगंज में रहने वाले नियाज़ नाम के शख्स को राजद्रोह के मामले में जेल भेजा गया है. हिंदू जागरण मंच ने नेताओं की शिकायत पर पुलिस ने ये कार्रवाई की है. बंदायूं में आज तक के संवाददाता अंकुर चतुर्वेदी ने हमें बताया कि पहले पुलिस ने शांतिभंग के मामले में आरोपी को हिरासत में लिया था. लेकिन फिर बवाल हुआ तो राजद्रोह का मामला लगा दिया गया. तो आरोप क्या हैं इस मामले में – तहरीर में लिखा है कि नियाज़ नाम के शख्स ने पाकिस्तान की जीत के बाद फेसबुक पर पाकिस्तान के समर्थन में लिखा. ‘आई लव यू पाकिस्तान’, मिस यू पाकिस्तान, जीत मुबारक जैसी बातें लिखी. इसके अलावा अपनी फेसबुक वॉल पर पाकिस्तान का झंडा लगाया. और इन शिकायतों के आधार पर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. इस मामले में पुलिस ने IPC की धारा 124A लगाई है. यानी राजद्रोह का मुकदमा.

इनके अलावा यूपी के बरेली में दो लोगों पर और सीतापुर में पाकिस्तानी टीम के समर्थन पर वॉट्सऐप स्टेट्स लगाने के मामले में एक व्यक्ति के खिलाफ केस दर्ज किया गया है. उनकी गिरफ्तारी भी हो गई है.

बिहार में क्या हुआ?

अब बिहार का भी एक मामला सुनिए. बिहार के किशनगंज में पाकिस्तान की जीत के बाद पटाखे जलाने के दावे के साथ पोस्ट वायरल हुई. लोगों को गुस्सा उबाल मारने लगा. पुलिस ने जब जांच की तो मामला कुछ और ही निकला. असल में पाकिस्तान की जीत पर नहीं एक शादी में पटाखे जलाए जा रहे थे.

पुलिस ने बताया,

एक व्यक्ति के फेसबुक वॉल पर पाकिस्तान की जीत पर पटाखे छोड़ने संबंधी एक पोस्ट की गई थी. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक ने कार्रवाई का निर्देश दिया. जांच में पता चला कि स्थानीय मोहल्ले में एक शादी समारोह में पटाखे छोड़े गए थे जिसे पाकिस्तान की जीत से जोड़ दिया गया.

जम्मू-कश्मीर का क्या मामला है?

अब जम्मू कश्मीर की बात. राजौरी की राजकीय मेडिकल कॉलेज की प्रिंसिपल सफिया मजीद को नौकरी से बर्खास्त कर दिया है. वजह ये बताई गई कि उसने पाकिस्तान की जीत का जश्न मनाया था. आपको मालूम होगा, हाल ही जम्मू कश्मीर प्रशासन एक नया नियम लेकर आया था जो देश से वफादारी ना रखने वाले सरकारी कर्मचारियों को नौकरी से हटाने को लेकर था. उसी के तहत ये कार्रवाई हुई. इसके अलावा एक और मामले में पुलिस ने जश्न मनाने वाले छात्रों पर UAPA के तहत मुकदमा दर्ज किया है. क्या होता है कि UAPA- अनलॉ फुल एक्टिविटीज़ प्रिवेंशन एक्ट. आतंकी गतिविधियों के मामले में ये कानून लगाया जाता है.

Safiya
राजौरी की राजकीय मेडिकल कॉलेज की प्रिंसिपल सफिया मजीद को नौकरी से बर्खास्त कर दिया है.

अब आते हैं इस सवाल पर कि क्या पाकिस्तान की जीत के समर्थन में कुछ लिख देना- राजद्रोह या UAPA का मामला बनता है क्या. या किसी भी तरह का अपराध है? इसके कानूनी पहले पर जाने से पहले ये समझिए कि क्या पाकिस्तान हमारे लिए एनमी स्टेट है. यानी दुश्मन मुल्क है. इसका जवाब तीन साल पहले एक RTI के जवाब में विदेश मंत्रालय ने दिया था. कहा था- कोई देश भारत का दुश्मन नहीं है.

पाकिस्तान में हमारा दूतावास है. कारोबारी रिश्ते हैं. रिश्ते अच्छे या खराब हो सकते हैं, लेकिन रिश्ते तो हैं. और पाकिस्तान दुश्मन मुल्क नहीं है, इसीलिए भारत की टीम ने पाकिस्तान के साथ मैच भी खेला है. तो फिर पाकिस्तान के समर्थन में लिखने या पाकिस्तान की टीम का समर्थन करना क्या कानून की नजर में कोई अपराध है भी या नहीं? हमने इस पर कानून के जानकारों से बात की.

सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट एमएल शर्मा का कहना है,

IPC के मुताबिक, किसी भी देश के जीतने पर अगर कोई भी नागरिक खुशी जताता है या हारने पर दुख जताता है, तो हारने या जीतने पर खुशी या दुख को कहने के लिए पोस्ट करता है तो ऐसा कोई ऑफेंस नहीं बनता. ऑफेंस का मतलब जब आप किसी के विरुद्ध में कुछ कर रहे हों. पाकिस्तान की जीत की खुशी अगर किसी ने मनाई है तो इसका मतलब ये नहीं हुआ कि उसने किसी कंट्री या किसी व्यक्ति के खिलाफ खुशी जताई है. इसमें क्या अपराध हुआ. इसमें कुछ भी गलत नहीं है. इस खुशी को जाहिर करने में किसका नुकसान हुआ. जब तक किसी का नुकसान नहीं हुआ तो ऑफेंस क्या हुआ? अगर आप किसी भी ऑफेंस में उसको जोड़कर किसी को अरेस्ट करते हैं, जेल भेजते हैं या सजा देते हैं ये तो आपकी गुंडागर्दी हो गई. आप अपनी मर्जी से लोगों का मुंह बंद करना चाहते हैं कि वो कुछ भी नहीं बोलें. जो वो बोलते हैं सिर्फ वही बोलें. ऐसा कानून तो दुनिया में कहीं नहीं है. तालिबान में भी ऐसा कानून नहीं है.

सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट गौरव भारद्वाज का कहना है,

आप पाकिस्तान को हटा दीजिए. ऑस्ट्रेलिया को शामिल कर लीजिए. क्या पाकिस्तान की जीत, ऑस्ट्रेलिया की जीत, इंग्लैंड की जीत में फर्क है. जब तक भारत ने पाकिस्तान को दुश्मन देश घोषित नहीं किया है तो जीत की खुशी मनाने को कानूनी तौर पर आप अपराध नहीं ठकरा सकते. 

तो पाकिस्तान का समर्थन करने वाले मुर्खता कर रहे हैं. इनसे किसी की भावना भड़कने की बात भी सही है. लेकिन ये मामले राजद्रोह या UAPA जैसे तो बिल्कुल नहीं हैं.


दी लल्लनटॉप शो: पाकिस्तानी टीम का समर्थन करने या ज़िंदाबाद कहने पर भारत का कानून क्या कहता है?

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