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वो क्रिकेटर जिसने स्टैंड्स में घुस के दर्शकों को दौड़ा कर मारा

1 अप्रैल 1982. इंडियन क्रिकेट टीम दुबई इंटरनेशनल एअरपोर्ट पे उतरी थी. साथ ही कुछ फिल्म स्टार्स भी थे. फिल्म ऐक्टर्स लाइन में पीछे थे और क्रिकेट प्लेयर्स आगे. दुबई में लाइव क्रिकेट अभी इतना ज़्यादा नहीं देखा जाता था. लेकिन हिंदी फिल्म ऐक्टर्स मशहूर थे. लिहाज़ा कस्टम ऑफिसर्स ने उन्हें पहचान लिया और उन्हें इंडियन प्लेयर्स के आगे आने को कह दिया.

हर किसी ने इस बात को अनदेखा कर दिया. एक खिलाड़ी को छोड़ कर. उसने मराठी में यूं ही कुछ बड़बड़ा दिया. साथ के कुछ प्लेयर्स ने धीमे से हंस भी दिया. कस्टम ऑफिसर्स को हालांकि इसे हंस कर टाल देना चाहिए था पर ये हुआ नहीं. उन्होंने अगली फ्लाइट से उस प्लेयर को वापस इंडिया डिपोर्ट कर दिया. किसी भी साथी प्लेयर ने उसका साथ नहीं दिया. लेकिन उसने भी माफ़ी नहीं मांगी. जो बात थी वो उसके लिए बात थी. अड़ गया. और वापस इंडिया चला गया. दिलीप वेंगसरकर. आज जिनका बर्थडे है.

‘कर्नल’ के नाम से मशहूर, मगर कर्नल नाम से चिढ़ने वाले दिलीप वेंगसरकर. इंडिया के लिए 24 जनवरी 1976 में खेलना शुरू किया. सुनील गावस्कर और गुंडप्पा विश्वनाथ के साथ इंडियन टीम की बैटिंग लाइन-अप की ढाल बने.


टेस्ट मैचों में 42 का ऐवरेज. मिड 80 में तीन साल तक दुनिया के बेस्ट बैट्समेन की लिस्ट में टॉप पर रहे. इंडियन टेस्ट टीम की कप्तानी की और दूसरे इंडियन प्लेयर बने जिसने 100 टेस्ट मैच खेले.


इंडियन नेशनल टीम के सेलेक्टर भी बने. कहते हैं, आज भी प्लेयर्स में इनका खौफ है. किस बात का, अपने को नहीं मालूम.

वानखेड़े स्टेडियम में 1994-95 में चल रहे मुंबई और पंजाब के मैच में वेंगसरकर बैठे मैच देख रहे थे. तब इन्होंने रिटायरमेंट ले लिया था. दिलीप वेंगसरकर प्रेस बॉक्स में बैठे हुए थे और कुछ दर्शक उन्हें परेशान कर रहे थे. जितनी देर तक बर्दाश्त कर सके, किया. उसके बाद जब बहुत हो गया तो अपने दाहिने साइड में बने स्टैंड में कूदे और उन दर्शकों को दौड़ाना शुरू कर दिया. हालांकि वो रिटायर हो चुके थे लेकिन फ़िट तब भी थे. एग्जिट पर जाके उन्हें पकड़ लिया और उनमें से एक को झन्नाटेदार तमाचा रसीद दिया.

उनकी ये दबंगई सिर्फ अपने होम ग्राउंड वानखेड़े पर ही नहीं चलती थी. वो एक मैदान के और दबंग थे. लॉर्ड्स! हां वही क्रिकेट का मक्का. दिलीप वेंगसरकर ने जितनी भी बार क्रिकेट की सबसे पवित्र ज़मीन पर कदम रखा, वहां के सेंचुरी बोर्ड पर अपना नाम लिखवाया. इंग्लैण्ड के अपने चार दौरों में 3 बार उन्हें लॉर्ड्स मैदान पर टेस्ट मैच खेलने का मौका मिला. तीनों मैचों में 100 रन के ऊपर बनाये. उन्हें लॉर्ड्स का लॉर्ड भी कहा जाता है. पहली बार 1979 में लॉर्ड्स पर मैच खेलते हुए वो पहली इनिंग्स में 0 पे आउट हो गए थे. दूसरी इनिंग्स में सेंचुरी ठोंकी. ऐसे ही फ़िरोज़ शाह कोटला में उन्होंने 4 सेंचुरी मारी हैं. जिसमे से तीन सेंचुरी वेस्ट इंडीज़ के खिलाफ़ बनाई हैं.

Dileep Vengsarkar

अपने इंग्लैंड के एक चार टूर में से एक टूर में राज सिंह डूंगरपुर उन्हें लता मंगेशकर के घर ले गए. डूंगरपुर उस वक़्त लंडन में टीम इंडिया को मैनेज करते थे. साल था 1986. वहां लता मंगेशकर ने उन्हें कोल्हापुरी मटन और गाजर का हलवा बना कर खिलाया.

दिलीप वेंगसरकर को 1981 में अर्जुन अवॉर्ड मिला. साथ ही इंडियन क्रिकेट में अपने योगदान के लिए भारत की सरकार ने उन्हें पद्म श्री भी दिया. 1987 में. इसी साल उन्हें विस्डन क्रिकेटर ऑफ़ द इयर भी घोषित किया. गया. उन्हें बीसीसीआई ने सीके नायडू लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड भी दिया. इन्हीं सीके नायडू के नाम पर उन्हें कर्नल कहा जाता था.

वेंगसरकर के बारे में सबसे बड़ा किस्सा तब का है जब उन्होंने अपना करियर बस शुरू किया था. साल 1974. फ़ास्ट बॉलर पांडुरंग सलगांवकर इंडियन डोमेस्टिक सर्किट में कहर ढा रहे थे. दिलीप ट्रॉफी के एक मैच में साउथ ज़ोन के ख़िलाफ़ उनका रौद्र रूप अपने चरम पर था. वो टर्निंग ट्रैक पर इंडिया के कुछ सबसे बेहतरीन बैट्समेन को धूल चटा रहे थे. गुंडप्पा विश्वनाथ, मंसूर अली खान पटौदी जैसे बैट्समेन पांडुरंग का शिकार बन चुके थे.

उस विकेट पर एक लड़का बैटिंग करने उतरा. 18 साल का दिलीप वेंगसरकर. स्टैंड्स में बैठे लोग अपने अपने तुक्के मार रहे थे कि आखिर ये लड़का कितनी देर में आउट होकर वापस जाएगा. वेंगसरकर को पहली गेंद से ही पांडुरंग ने बाउंसर फेंकनी शुरू की. कीपर विकेट्स के 30 मीटर पीछे खड़ा हो गया.

उस दिन वेंगसरकर ने ऑन-द-अप जिस तरह से शॉट्स खेले, हर कोई बस देखे ही जा रहा था. अटैकिंग फ़ील्ड की परवाह किये बिना वेंगसरकर फ्रंट फ़ुट पर खेल रहा था. विकेट्स के दोनों ही ओर रन्स बन रहे थे. जितनी भी बार वो गेंद को ड्राइव करता, अगली गेंद शॉर्ट पिच आती और वो स्क्वायर लेग बाउंड्री तक पहुंच जाती. बॉल जितनी तेज़ फेंकी जा रही थी, वो उतनी ही तेज़ बाउंड्री तक पहुंच रही थी. उस इनिंग्स में वेंगसरकर ने 86 रन बनाये.


अगले ही साल वेंगसरकर को पिच पर आगे बढ़ के बिशन सिंह बेदी और इरापल्ली प्रसन्ना को छक्के मारते देखा जा रहा था. ईरानी ट्रॉफी, नागपुर. देश की सबसे खतरनाक स्पिन जोड़ी को वेंगसरकर ने तहस नहस कर दिया था. इसी मैच की कमेंट्री के दौरान लाला अमरनाथ ने दिलीप वेंगसरकर की तुलना कर्नल सीके नायडू से कर डाली. और आगे चलकर इसी वजह से वेंगसरकर को ‘कर्नल’ कहा जाने लगा.


वीडियो- नारी कांट्रेक्टर: इंडिया का वो कप्तान जिसे गेंद लगी तो 6 दिन बेहोश रहा

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