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जंग में उलझे अज़रबैजान ने अमेरिका, रूस जैसे ताकतवर देशों की बात मानने से इंंकार क्यों कर दिया?

अज़रबैजान का गैंजा शहर. कल से पहले जिसने इस शहर को देखा होगा, उसके लिए शायद अब इस शहर को पहचानना मुश्किल हो. क्योंकि जिन इमारतों के नाम के आगे भव्य होने के विशेषण जुड़ते थे, अब वो खंडहरों में तब्दील हो गई हैं. सड़कों पर मलबा बिखरा दिख रहा है. कई घर बिना छत के हो गए हैं. दीवारों में बड़े-बड़े छेद हैं. सड़कों पर खड़े वाहन ऐसे दिख रहे मानो वो एक शताब्दी से यही खड़े हों. इस पूरे मंज़र को एक शब्द में समेटें तो ये गैंजा शहर की तबाही है. आसमान से बारूद बरसा और महज कुछ मिनटों में ही गैंजा शहर का एक हिस्सा खंडहरों औऱ मलबे में तब्दील हो गया.

और कब हुआ ये? रविवार को. गैंजा शहर के लोग रविवार को जब सुबह उठे तो सब कुछ सामान्य था. और फिर अचानक से आसमान के रास्ते गोला-बारूद गिरने लगा. धमाकों की आवाज़ से पूरा शहर दहलने लगा. नगोरनो-काराबाख की राजधानी है स्टेपैनाकेर्ट. वीडियो की शुरुआत में एक साफ-सुथरी सुंदर सड़क दिखती है. जिसके एक तरफ गाड़ियां खड़ी हैं, दूसरी तरफ एक बड़ी-सी सफेद इमारत है. वीडियो के 16वें सेकेंड में पहला धमाका होता है. और फिर एक के बाद एक कई धमाके होते हैं. ज़ोर का धुंआ उठने लगता है. धमाकों से मकानों और पेड़ों के हिस्से टूटकर गिरने लगते हैं. महज एक मिनट में शहर उजड़ जाता है.

युद्ध में ऐसा ही होता है, और ये युद्ध चल रहा है अज़रबैजान और आर्मेनिया के बीच. 27 सितंबर को शुरू हुई बमबारी, तमाम अंतर्राष्ट्रीय कोशिशों के बावजूद कम होने के बजाय ज्यादा बढ़ रही है. ज्यादा बढ़ने से मेरा मतलब ज्यादा बम बरसाने से ही नहीं है, युद्ध का दायरा भी बड़ा हो रहा है. अब तक युद्ध विवादित इलाके नगोरनो-काराबाख में ही चल रहा था लेकिन रविवार को अज़रबैजान के शहर गैंजा पर रॉकेट हमले शुरू कर दिए गए. गैंजा, नगोरनो-काराबाख से दूर है. कितना दूर है इस नक्शे में देखिए. पूर्व में अज़रबैजान और पश्चिम में आर्मेनिया. अज़रबैजान की सीमाओं के अंदर नगोरनो-काराबाख है, जो यूएन के हिसाब से अज़रबैजान का है लेकिन आर्मेनिया समर्थित सरकार यहां चलती है. अज़रबैजान के उत्तर-पश्चिम में आर्मेनिया की सीमा से लगता इलाका है गैंजा.

गैंजा शहर का मानचित्र. (साभार: गूगल)
गैंजा शहर का मानचित्र. (साभार: गूगल)

ये अज़रबैजान का दूसरा सबसे बड़ा शहर है, जिसमें 5 लाख लोगों की रिहाइश है. इसी शहर पर रविवार को कथित रूप से आर्मेनिया की सेना ने हमला कर दिया. अज़रबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलियेव के दफ्तर की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि बमबारी आर्मेनिया ने की है. जबकि आर्मेनिया का दावा है कि उसने ऐसा कुछ नहीं किया. हमले की जिम्मेदारी ले रही है नगोरनो-काराबाख की डिफेंस फोर्स. नगोरनो-काराबाख की सरकार ने कहा है कि हमने गैंजा शहर में मिलिट्री एयरपोर्ट को उड़ाया है. और क्यों उड़ाया है, इसके जवाब में नगोरनो-काराबाख के राष्ट्रपति आरायिक हारुतयुन्यान ने कहा है कि अज़रबैजान ने हमारी राजधानी स्टेपैनाकेर्ट के सिविलियन इलाकों में बम बरसाए थे, अब हम उनके हर बड़े शहर में सैन्य ठिकानों को उड़ाएंगे. नगोरनो-काराबाख के राष्ट्रपति ने अज़रबैजान की जनता से भी कहा है कि वो बड़े शहर खाली कर दें क्योंकि वहां हमले होंगे. हमारी लड़ाई जनता से नहीं, अज़रबैजान की सरकार से है.

आर्मेनिया ने बमबारी से इंकार कर दिया है.

अजरबैजान आरोप लगा रहा है, लेकिन आर्मेनिया ने बमबारी से इंकार किया है.

दूसरी तरफ आर्मेनिया ने कहा है कि हमने अज़रबैजान के तीन लड़ाकू विमान मार गिराए. जबकि अज़रबैजान इस नुकसान को नहीं मान रहा है. दोनों पक्षों में ये होड़ चल रही है कि अपना नुकसान छिपाएं और सामने वाले का ज्यादा नुकसान बताएं.  युद्ध में दोनों तरफ कितने लोगों की मौत अभी तक हो चुकी है, ये आंकड़ा सैकड़ों से लेकर हजारों तक में हो सकता है. नगोरनो-काराबाख सरकार के मुताबिक, उनके 150 जवानों की अभी तक युद्ध में मौत हुई है, और अज़रबैजान के 3 हज़ार लोग मारे जा चुके हैं. आर्मेनियाई रक्षा मंत्रालय ने अज़रबैजान के 2,300 सैनिकों की मौत का आंकड़ा दिया है, जिनमें से 400 की मौत तो रविवार को ही हुई. हालांकि अज़रबैजान ने इन दावों की पुष्टि नहीं की है. लेकिन मरने वालों का ये आंकड़ा अब तेज़ी से बढ़ सकता है क्योंकि युद्ध में अब तक जो मर्यादाएं बची थीं, अब वो टूट गई हैं.

दोनों देशों के बीच चल रही जंग का एक दृश्य.
दोनों देशों के बीच चल रही जंग का एक दृश्य.

आर्मेनिया के समर्थन वाली नगोरनो-काराबाख की सेनाओं ने अज़रबैजान के बड़े शहरों पर हवाई हमले शुरू कर दिए हैं. जवाब में अज़रबैजान नगोरनो-काराबाख के शहरों पर तो हमला कर ही रहा है, अब आशंका ये जताई जा रही है कि अगले कुछ दिनों में आर्मेनिया की राजधानी समेत बड़े शहरों को निशाना बनाया जा सकता है. वहीं, आर्मेनिया भी अज़रबैजान के बड़े शहरों को टारगेट कर सकता है. नतीजा होगा और ज्यादा तबाही. इतिहास का एक वाकया याद दिला दूं. दूसरे विश्व युद्ध की शुरुआत में भी ऐसा ही हुआ था. जर्मनी की एयरफोर्स ब्रिटेन की राजधानी लंदन पर बम बरसाती थी और ब्रिटेन जर्मनी के शहरों पर हवाई हमले करता था.

अब सवाल उठता है कि क्या ये युद्ध रुक नहीं सकता? इसका जवाब अज़रबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलियेव के उस वीडियो बयान में है जिसमें उन्होंने युद्ध को लेकर अपने देश को संबोधित किया. अलियेव ने बताया कि 7 गांवों को विद्रोहियों के कब्जे से छुड़ाकर अज़रबैजान की सेना वापस ले चुकी हैं. ये मिशन तब तक नहीं रुकेगा, जब तक पूरा नगोरनो-काराबाख दोबारा अज़रबैजान के कब्जे में नहीं आ जाता. राष्ट्रपति अलियेव ने जब ये ऐलान किया तो अज़रबैजान की जनता सड़कों पर आ गई, जश्न मनाया. युद्ध में सेना के साथ जनता भी शासकों की बड़ी ताकत होती है. और अज़रबैजान की सरकार को युद्ध के लिए उसकी जनता का समर्थन मिल रहा है.

युद्धग्रस्त क्षेत्र में एक आम नागरिक. (साभार: AP)
युद्धग्रस्त क्षेत्र में एक आम नागरिक. (साभार: AP)

अमेरिका, रूस और फ्रांस लगातार शांति की अपील कर रहे हैं. अज़रबैजान के राष्ट्रपति ने इन्हें मानने से इंकार कर दिया है. उन्होंने कहा कि तीन दशकों से उसकी ज़मीन पर आर्मेनिया का कब्जा है, ये कब्जा छुड़ाने अब तक विश्व समुदाय या यूएन क्यों नहीं आया था. अब हम अपनी ज़मीन वापस लिए बिना नहीं रुकेंगे. मतलब ये कि अज़रबैजान युद्ध रोकना नहीं चाहता. उसके पास इसकी वाजिब वजह भी है. साल 1993 में यूएन सुरक्षा परिषद ने 4 प्रस्तावों के आधार पर कहा था कि नगोरनो-काराबाख इलाका और उसके पास के 7 छोटे ज़िलों पर अज़रबैजान की पूरी संप्रभुता है, और आर्मेनिया को बिना शर्त इन इलाकों को छोड़ देना चाहिए.

2015 में यूरोपीय कोर्ट ने भी कहा था कि आर्मेनिया ने अज़रबैजान के इलाकों पर गैर-वाजिब कब्जा कर रखा है. यानी नगोरनो-काराबाख इलाका अज़रबैजान का ही है, इस पर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में कोई संशय नहीं है. सवाल इन इलाकों को वापस लेने के तरीके पर है. युद्ध न रुकने में अज़रबैजान से ज्यादा भूमिका तुर्की की मानी जा रही है. तुर्की नहीं चाहता कि युद्ध रुके. और तुर्की ऐसा क्यों नहीं चाहता, इसके लिए अमेरिका को भी थोड़ा बहुत जिम्मेदार माना जा रहा है. ट्रंप शासन के दौरान अमेरिका ने अपनी विदेश नीति में तुर्की को लूज़ छोड़ दिया. और इसीलिए तुर्की इस रीजन में अमेरिका का बड़ा सरदर्द बन गया है.

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