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द्रौपदी के स्वयंवर में दुर्योधन क्यों नहीं गए थे?

ऐसी मान्यता है कि अक्षय तृतीया के दिन महाभारत की रचना शुरू हुई थी. हम सबने बचपन में महाभारत भी देखा होगा, कुछ लोगों ने अपनी दादी या दादा जी से कहानियां भी सुनी होंगी. लेकिन इसी महाभारत के कुछ ऐसे भी तथ्य हैं जिसके बारे में आपको शायद ही पता हों-

1.एकमात्र कौरव जो नहीं मरा.

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युयुत्सु धृतराष्ट्र का ऐसा पुत्र था जो महाभारत युद्ध समाप्त होने के बावजूद बचा रहा. दरअसल युयुत्सु का जन्म धृतराष्ट्र की पत्नी से नहीं हुआ था. वो दासी का बेटा था. दासी से युयुत्सु का जन्म हुआ. युयुत्सु की उम्र लगभग दुर्य़ोधन की उम्र के बराबर थी.

2.वो कारण जिससे दुर्योधन ने द्रौपदी के स्वयंवर में भाग नहीं लिया था.

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दुर्योधन का विवाह पहले से ही कलिंग की राजकुमारी भानुमती से हो चुका था और दुर्योधन ने अपनी पत्नी को वचन दिया था कि वह दोबारा किसी से विवाह नहीं करेगा इसलिए दुर्य़ोधन ने द्रौपदी के स्वयंवर में भाग नहीं लिया.

3.सारे कौरव पांडवों के खिलाफ़ नहीं थे.

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धृतराष्ट्र के पुत्र युयुत्सु और विकर्ण ने पांडवों के खिलाफ किये कौरवों के ऐक्शन का विरोध किया था. उन्होंने भरे दरबार में द्रौपदी के चीरहरण का भी विरोध किया.

4.द्रौपदी का भाई एकलव्य का अवतार था.

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वास्तव में एकलव्य का जन्म वासुदेव के भाई देवाश्रव  के यहां हुआ था लेकिन वे जंगल में खो गए थे और उनका पालन-पोषण एक निषाद हिरण्यधनु ने किया. एकलव्य बाद में जरासंध के यहां तीरंदाज़ी करते थे. जब कृष्ण रुक्मिणी को विवाह के लिए लेकर जा रहे थे तब जरासंध और शिशुपाल ने उनका पीछा किया. एकलव्य ने जरासंध का साथ दिया. कृष्ण ने एकलव्य का वध कर दिया. लेकिन एकलव्य की गुरू निष्ठा के कारण उसे अवतार का वरदान दिया. दूसरे जन्म में एकलव्य द्रौपदी के जुड़वां भाई के रूप में जन्में. उनका नाम धृष्टद्युम्न था.

5.खतरनाक योजनाओं के पीछे शकुनि का छिपा हुआ एजेंडा था.

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दरअसल धृतराष्ट्र ने गांधारी के पूरे परिवार को बंदी बना लिया था. द्रौपदी के पिता सुबल ने निश्चय किया कि सभी लोग अपने हिस्से का भोजन छोड़ देंगे ताकि एक व्यक्ति मजबूत बने जो कि धृतराष्ट्र से प्रतिशोध से सके. इस काम के लिए शकुनि को चुना गया.

6.महाभारत का रचयिता खुद भी उसमें एक चरित्र है.

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कहानी के अनुसार सत्यवती का विवाह शान्तनु से होने के पहले उनके एक पुत्र महर्षि पराशर से था. महर्षि पराशर की बात मानने के पहले सत्यवती ने तीन वरदान मांगे थे, जिसमें से एक ये था कि उनसे उत्पन्न पुत्र बहुत बड़ा संत बनेगा. इसके बाद सत्यवती ने यमुना के एक द्वीप पर पुत्र को जन्म दिया. इसी बच्चे का नाम कृष्ण द्वैपायन था जो बाद में व्यास के नाम से जान गये. इन्होंने ही पुराणों और महाभारत की रचना की.

7.धृतराष्ट्र और पांडु के पिता एक ही थे.

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दरअसल भीष्म ने प्रतिज्ञा ली थी कि वह कभी भी राजसिंहासन पर नहीं बैठेंगे. शान्तनु से पैदा हुए सत्यवती के दोनों पुत्रों की मौत कम उम्र में हो गयी. अब  बचे थे भीष्म, दो विधवा बहुएं और खाली राजसिंहासन. अब सत्यवती ने अपने पहले पुत्र व्यास को बुलाया जिनके आने के बाद नियोग से दोनो  बहुएं गर्भवती हुईं. अंबिका ने धृतराष्ट्र को और अंबालिका ने पांडु को जन्म दिया.

8.दुर्योधन का नाम सुयोधन था.

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दुर्योधन का नाम सुयोधन था. इसी तरह से दुशासन से का नाम भी सुशासन था. लेकिन उनके खराब कार्यों के कारण उनके नाम से सु हट के दु लग गया.

9.भीम के पोते बर्बरीक के पास विशेष शक्ति थी इसलिए कृष्ण को उनसे सिर मांगना पड़ा.

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भीम के ग्रैंडसन व घटोत्कच के पुत्र के पास भगवान शिव के वरदान की वजह से एक विशेष तीर था जिससे लोगों को चिह्नित कर मारा जा सकता था. लेकिन बर्बरीक का प्रण था कि वह हमेशा हारने वाले पक्ष के साथ ही लड़ेंगे. इसलिए कृष्ण ने कहा कि वह जिस भी पक्ष की ओर से लड़ना शुरू करेंगे वह अपने आप जीतने वाला पक्ष हो जाएगा. तो पूरे युद्ध में सभी लोग मारे जायेंगे. फिर कृष्ण ने उनका सिर मांग लिया ताकि युद्ध के पहले रणक्षेत्र को पवित्र किया जा सके.

10.भीष्म राजसिंहासन के वास्तविक वारिस थे.

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इसके लिए सबसे पहले आपको थोड़ा सा पीछे की कहानी बताना ज़रूरी है. शान्तनु ने गंगा नाम की नारी से विवाह किया था, जिनसे उन्हे 8 पुत्र पैदा हुए. लेकिन ये पुत्र वास्तव में देवता था जिन्हें श्राप के कारण मनुष्य के रूप में जन्म लेना पड़ा था. इसलिए गंगा ने अपने सात पुत्रों की हत्या कर दी. लेकिन जब वह आठवें पुत्र की हत्या करने जा रही थी तो शान्तनु ने उन्हें रोक दिया. ये आठवें पुत्र भीष्म ही थे.


ये स्टोरी शिव ने की है


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