Submit your post

Follow Us

9 तरह के ट्रिब्यूनल्स पर ताला लगने का रास्ता हुआ साफ, संसद से बिल हुआ पास

पेगासस कथित जासूसी विवाद पर हंगामे के बीच राज्यसभा में 9 अगस्त को 3 बिल पारित हुए. इसके साथ ही इस मॉनसून सत्र में कुल 9 बिल पास हो चुके हैं. सोमवार को पारित विधेयकों में एक है ट्रिब्यूनल रिफ़ॉर्म्स बिल, 2021 (Tribunal Reforms Bill). इस बार ये एकमात्र ऐसा बिल रहा, जिसे सलेक्ट कमेटी को सौंपने के प्रस्ताव पर उप-सभापति ने डिविज़न ऑफ़ वोट्स का आदेश दिया. लेकिन विपक्ष एकजुटता नहीं दिखा पाया. सलेक्ट कमेटी को सौंपने के प्रस्ताव के पक्ष में महज़ 44 वोट पड़े और विरोध में पड़े 79 वोट. लिहाज़ा ये बिल भी पारित हो गया. आइए समझते हैं कि इस बिल के क़ानून में तब्दील होने से क्या कुछ बदलाव होंगे.

ट्रिब्यूनल होते क्या हैं?

ट्रिब्यूनल रिफ़ॉर्म्स बिल को समझने के लिए पहले ट्रिब्यूनल और इससे जुड़े संविधानिक प्रावधानों को समझ लेते हैं. ट्रिब्यूनल कानून द्वारा स्थापित न्यायिक और अर्ध-न्यायिक संस्थान होते हैं. कुछ खास विषयों के मामले देखने के लिए इन्हें बनाया जाता है. आमतौर ट्रिब्यूनल में तेज़ी से सुनवाई होती है और जल्दी फ़ैसले लिए जाते हैं.

भारत की न्याय व्यवस्था के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है लंबित मामले. देश की अदालतों में 58 लाख 70 हजार से ज्यादा केस पेंडिंग हैं. अगर सुप्रीम कोर्ट की बात करें तो 2 अगस्त 2021 तक यहां 69,476 मामले सुनवाई के इंतजार में थे. 9 अगस्त, 2021 तक अलग-अलग हाई कोर्ट्स में 91572 मामले ऐसे थे, जो 30 साल से भी ज़्यादा समय से सुनवाई पूरी होने की बाट जोह रहे हैं. (देखें आंकड़े). अदालतों पर इसी बोझ को हल्का करने के लिए ट्रिब्यूनल्स का गठन किया जाता है.

भारतीय संविधान में 1976 में 42वें संशोधन के ज़रिए अनुच्छेद 323A और 323B जोड़ा गया था. अनुच्छेद 323A के जरिए संसद को सरकारी अफ़सरों की भर्ती और सेवा शर्तों से संबंधित मामलों में फ़ैसला लेने के लिए प्रशासनिक ट्रिब्यूनल के गठन का अधिकार दिया गया. ये ट्रिब्यूनल केंद्र और राज्य दोनों स्तरों के लिए हो सकते हैं. वहीं अनुच्छेद 323बी में कुछ विषय जैसे टैक्स और भूमि सुधार शामिल किए गए, जिनके लिए संसद या राज्य विधानसभा कानून बनाकर ट्रिब्यूनल का गठन कर सकते हैं. 2010 में सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फैसले में साफ़ कहा था कि अनुच्छेद 323बी के तहत राज्य की विधायिकाओं को संविधान की सातवीं अनुसूची के अनुरूप किसी ख़ास विषय पर ट्रिब्यूनल बनाने का अधिकार है.

9 तरह के ट्रिब्यूनल होंगे बंद

ट्रिब्यूनल रिफ़ॉर्म्स बिल, 2021 को लोकसभा से 3 अगस्त को मंजूरी मिल चुकी है. राज्यसभा से भी 9 अगस्त को ये पास हो चुका है. अब इसे राष्ट्रपति की मंज़ूरी मिलते ही 9 तरह के अपीलीय ट्रिब्यूनल्स बंद हो सकेंगे. ये ट्रिब्यूनल इन कानून के तहत बने हैं. सिनेमैटॉग्राफ़ी ऐक्ट, कॉपीराइट ऐक्ट, कस्टम ऐक्ट, पेटेंट ऐक्ट, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण कानून, ट्रेडमार्क ऐक्ट, माल के भौगोलिक संकेत (पंजीकरण और संरक्षण) ऐक्ट (Geographical Indications of Goods (Registration and Protection) Act), पौधों की किस्मों और किसानों के अधिकार संरक्षण ऐक्ट, और राष्ट्रीय राजमार्ग नियंत्रण (भूमि और यातायात) ऐक्ट. इन ट्रिब्यूनल्स में चल रहे सारे मामलों को या तो वाणिज्यिक न्यायालय में या फिर उच्च न्यायालय में स्थानांतरित किया जाएगा.

सर्च-कम-सिलेक्शन कमेटी

इसके अलावा कुछ और संशोधन भी पारित किए गए हैं. विधेयक में ट्रिब्यूनल को चलाने के लिए चयन समितियों के गठन और कार्यकाल से जुड़े प्रावधानों को शामिल किया गया है. बिल की धारा 3(7) के मुताबिक़, अलग-अलग ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष और सदस्यों को सर्च-कम-सिलेक्शन कमेटी की सिफारिशों पर नियुक्त किया जाएगा.

इसके लिए फ़ाइनैंस ऐक्ट, 2017 में भी संशोधन होगा. इसमें सर्च-कम-सिलेक्शन कमेटी के सदस्यों की योग्यता का विवरण दिया गया है. जैसे केंद्रीय ट्रिब्यूनल्स की सिलेक्शन कमेटी के अध्यक्ष भारत के मुख्य न्यायाधीश या उनके द्वारा नामित सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश ही हो सकते हैं. कमिटी में चेयरपर्सन के अलावा केंद्र सरकार द्वारा नामित दो सचिव भी बतौर सदस्य रहेंगे. निवर्तमान चेयरपर्सन या सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट के रिटायर्ड मुख्य न्यायाधीश और उस मंत्रालय के सचिव भी कमेटी का हिस्सा हो सकेंगे, जिसके तहत ट्रिब्यूनल का गठन किया गया है. ट्रिब्यूनल सदस्यों के चुनाव करने वाली इन कमेटियों की सिफारिशों पर केंद्र सरकार को तीन महीने के अंदर निर्णय लेना होगा.

राज्य के ट्रिब्यूनल्स की भी अलग सर्च-कम-सिलेक्शन कमेटियां होंगी. इन कमेटियों में संबंधित राज्य के हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश चेयरपर्सन के रूप में रहेंगे. राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष, ट्रिब्यूनल के निवर्तमान अध्यक्ष या उच्च न्यायालय के रिटायर्ड जज, और राज्य के सामान्य प्रशासनिक विभाग के सचिव या प्रमुख सचिव कमेटी का हिस्सा होंगे.

इस बिल में चेयरपर्सन और सदस्यों का कार्यकाल 4 साल तय किया गया है. चेयरपर्सन की अधिकतम उम्र 70 साल हो सकेगी. सदस्यों के लिए यह सीमा 67 साल की है.

अध्यादेश की जगह लेगा ये बिल

यह विधेयक अप्रैल 2021 में लाए गए केंद्र सरकार के एक अध्यादेश की जगह लेगा. इस ऑर्डिनेन्स को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी. दावा किया गया कि येऑर्डिनेन्स ट्रिब्यूनल्स पर सुप्रीम कोर्ट के पिछले फैसलों का अनुपालन नहीं करता. वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन ने 9 अगस्त को राज्यसभा में इस बिल पर बोलते हुए स्पष्ट किया था कि शीर्ष अदालत ने इस ऑर्डिनेन्स की संवैधानिकता पर कोई टिप्पणी नहीं की थी. पिछले हफ्ते सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स बिल, 2021 पर चर्चा करने से इनकार कर दिया था. सीतारामन ने इन आशंकाओं को भी निराधार बताया कि ट्रिब्यूनल्स को खत्म करके सरकार जुडिशियल सिस्टम को कमजोर करने की कोशिश कर रही है.

2015 में 7 ट्रिब्यूनल बंद किए गए थे

भारत सरकार ने 2015 में ट्रिब्यूनल्स को बंद करने की प्रक्रिया शुरू की थी. फ़ाइनैंस ऐक्ट, 2017 के आने से 7 ट्रिब्यूनल को या तो बंद कर दिया गया था या उनका विलय कर दिया गया था. ट्रिब्यूनल की कुल संख्या 26 से घटाकर 19 कर दी गई थी. इसके पीछे पहला तर्क ये दिया गया कि उन ट्रिब्यूनल्स को बंद करना है, जिनका समान कार्यों के आधार पर विलय किया जा सकता है. दूसरे चरण में, ज्यादा खर्च के बावजूद अच्छा काम न करने वाले ट्रिब्यूनल्स पर गाज गिरी. पिछले तीन सालों के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि कई क्षेत्रों में ट्रिब्यूनल ने समय पर काम नहीं निपटाया जबकि वो सरकारी पैसे का बड़ा इस्तेमाल कर रहे थे.


वीडियो- दिल्ली में वायु प्रदूषण करने पर पांच साल की कैद के अलावा और क्या प्रावधान हैं?

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

कौन हो तुम

10 साल पहले भी शाहरुख़ का समीर वानखेड़े से सामना हुआ था, समीर ने ठोका था तगड़ा जुर्माना

10 साल पहले भी शाहरुख़ का समीर वानखेड़े से सामना हुआ था, समीर ने ठोका था तगड़ा जुर्माना

जगह थी मुंबई एयरपोर्ट. अब दस साल बाद फिर से दोनों का नाम एक साथ सुर्ख़ियों में है.

'स्क्विड गेम' के प्लेयर नंबर 199 'अली' की कहानी, जिनके इंडियन होने ने सीरीज़ में एक्स्ट्रा मज़ा दिया

'स्क्विड गेम' के प्लेयर नंबर 199 'अली' की कहानी, जिनके इंडियन होने ने सीरीज़ में एक्स्ट्रा मज़ा दिया

अली का रोल करने वाले इंडियन एक्टर अनुपम त्रिपाठी का सलमान-शाहरुख़ कनेक्शन क्या है?

IPL का कित्ता ज्ञान है, ये क़्विज़ खेलकर चेक कल्लो!

IPL का कित्ता ज्ञान है, ये क़्विज़ खेलकर चेक कल्लो!

ईमानदारी से स्कोर भी बताते जाना. हम इंतज़ार करेंगे.

'मनी हाइस्ट' वाले प्रोफेसर की पूरी कहानी, जिनकी पत्नी ने कहा था, 'कभी फेमस नहीं हो पाओगे'

'मनी हाइस्ट' वाले प्रोफेसर की पूरी कहानी, जिनकी पत्नी ने कहा था, 'कभी फेमस नहीं हो पाओगे'

अलवारो मोर्टे ने वेटर तक का काम किया हुआ है. और एक वक्त तो ऐसा था कि बकौल उनके कैंसर से जान जाने वाली थी.

एक्टर शरत सक्सेना की कहानी, जिन्होंने 71 साल की उम्र में ज़बरदस्त बॉडी बनाकर सबको चौंका दिया

एक्टर शरत सक्सेना की कहानी, जिन्होंने 71 साल की उम्र में ज़बरदस्त बॉडी बनाकर सबको चौंका दिया

हीरो बनने आए शरत सक्सेना कैसे गुंडे का चमचा बनने पर मजबूर हुए?

'भीगे होंठ तेरे' वाले कुणाल गांजावाला आजकल कहाँ हैं?

'भीगे होंठ तेरे' वाले कुणाल गांजावाला आजकल कहाँ हैं?

एक वक़्त इंडस्ट्री में टॉप पर थे कुणाल और उनके गाने पार्टियों की जान हुआ करते थे.

राज कुंद्रा की पूरी कहानी, 18 की उम्र में शॉल बेचने से शुरुआत करने वाले राज यहां तक कैसे पहुंचे?

राज कुंद्रा की पूरी कहानी, 18 की उम्र में शॉल बेचने से शुरुआत करने वाले राज यहां तक कैसे पहुंचे?

IPL स्कैंडल, मॉडल्स के आरोप, अंडरवर्ल्ड कनेक्शंस के आरोप, एक्स वाइफ के इल्ज़ाम सब हैं इस कहानी में.

रिचर्ड ब्रैनसन: जिन्होंने पहले अंतरिक्ष के दर्शन करके जेफ बेजोस का मजा खराब कर दिया

रिचर्ड ब्रैनसन: जिन्होंने पहले अंतरिक्ष के दर्शन करके जेफ बेजोस का मजा खराब कर दिया

रिचर्ड ब्रेन्सन की कहानी, जहां भी गए तहलका मचा दिया.

'सिंघम' IPS से तमिलनाडु BJP के सबसे युवा अध्यक्ष बने अन्नामलाई की कहानी

'सिंघम' IPS से तमिलनाडु BJP के सबसे युवा अध्यक्ष बने अन्नामलाई की कहानी

पहला चुनाव हार गए थे, बीजेपी ने राज्य की जिम्मेदारी सौंपी है.

'तड़प-तड़प के' जैसा प्रेमियों का ब्रेकअप एंथम देने वाले सिंगर के के आजकल कहां हैं?

'तड़प-तड़प के' जैसा प्रेमियों का ब्रेकअप एंथम देने वाले सिंगर के के आजकल कहां हैं?

उनके गाए 'पल' गाने के बगैर आज भी किसी कॉलेज का फेयरवेल पूरा नहीं होता.