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शरद पवार के भतीजे अजित को सबसे बड़ी राहत तो अब मिली है

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बीते दिनों महाराष्ट्र के घटनाक्रम से जुड़ी कुछ तारीख़ें अहम रहीं. लिस्ट में हैं-

23 नवंबर- देवेंद्र फडणवीस ने CM पद की शपथ ली. अजीत पवार उपमुख्यमंत्री बनाए गए.
26 नवंबर- देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार ने इस्तीफ़ा दिया.
28 नवंबर- महाराष्ट्र में शिवसेना, NCP, कांग्रेस गठबंधन सरकार ने शपथ ली.

देवेंद्र फडणवीस के इस्तीफ़ा देने. और, शिवसेना, NCP और कांग्रेस की गठबंधन सरकार के शपथ लेने. इन दोनों तारीख़ों के बीच का दिन- 27 नवंबर. इस दिन महाराष्ट्र के ऐंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने बॉम्बे हाई कोर्ट के आगे एक हलफनामा दायर किया. इसमें राज्य के पूर्व जल संसाधन विकास मंत्री अजित पवार को उनपर चल रहे भ्रष्टाचार के आरोप से बरी कर दिया गया था. अजित पवार महाराष्ट्र में सामने आए सिंचाई घोटाले में आरोपी थी. ACB की तरफ से उन्हें क्लीन चिट दे दी गई.

‘अजित पवार गड़बड़ियों के लिए जिम्मेदार नहीं’
‘इंडियन एक्सप्रेस’ के मुताबिक, हलफ़नामे के 16वें पन्ने पर लिखा है-

विदर्भ इरिगेशन डिवेलपमेंट कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष/जल संसाधन विकास मंत्री को काम करने से जुड़ी एजेंसियों (एक्ज़िक्यूटिंग एजेंसियां) के किए पर जिम्मेदार नहीं माना जा सकता है.

ये एफिडेविट दाख़िल करने से पहले 25 नवंबर की बात है. फडणवीस और अजित पवार के इस्तीफ़ा देने से एक रोज़ पहले. ACB ने इस इरिगेशन स्कैम पर नौ जांचें बंद कर दी थीं. तब ऐसे सवाल उठाए गए कि क्या अपने ऊपर चल रही जांच से बचने के लिए अजित पवार ने BJP को समर्थन दिया? इन सवालों पर तब ACB ने सफाई भी दी थी कि बंद किए गए 9 केसों में कोई भी अजित पवार से जुड़ा नहीं है.

दो नौकरशाहों पर जिम्मेदारी तय की गई है
फडणवीस के पहले कार्यकाल के दौरान इस घोटाले पर जांच हो रही थी. इसी जांच की प्रक्रिया के साइकल में ACB ने अब ये हलफ़नामा दायर किया. ACB ने अपनी जांच में कभी अजित पवार का नाम नहीं लिया था. मगर नवंबर 2018 में ACB के तत्कालीन प्रमुख संजय बरवे ने एक हलफनामा दिया. बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच को. इसमें बरवे ने बताया था कि अजित पवार ने सिंचाई परियोजनाओं के कॉन्ट्रैक्ट देने की प्रक्रिया में दखलंदाजी की थी. अब ACB ने पवार को बरी कर दिया है. इस नए हलफनामे में दो बड़ी गड़बड़ियों का ज़िक्र है. एक, टेंडर की अपडेटेड कीमत. और, कॉन्ट्रैक्टर्स को मोबलाइज़ेशन अडवांस देना. इन दो बड़ी गड़बड़ियों का जिम्मा दो ब्यूरोक्रैट्स पर डाला गया है-

1.विदर्भ इरिगेशन डिवेलपमेंट कॉर्पोरेशन (VIDC) के एक्ज़िक्यूटिव डायरेक्टर
2. वॉटर रिर्सोसेज़ डिवेलपमेंट्स (WRD) के प्रिंसिपल सेक्रेटरी

हलफनामे में लिखा है कि सरकार द्वारा नियुक्त किसी भी जांच समिति ने विदर्भ इरिगेशन डिवेलपमेंट कॉर्पोरेशन (VIDC) के चेयरमैन को गड़बड़ियों और अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार नहीं पाया है. इसमें लिखा है-

VIDC के चेयरमैन ने कॉर्पोरेशन की उस समय की नीतियों के मुताबिक काम किया. VIDC के एक्ज़िक्यूटिव डायरेक्टर्स या मैनेजिंग डायरेक्टर्स ने उनके आगे जो प्रस्ताव रखे, उसके अनुरूप ही उन्होंने चीजें कीं.

…मगर फडणवीस ने चुनाव के समय टारगेट किया पवार को
जांच हालांकि जो भी कह रही हो, मगर महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के दौरान ख़ुद फडणवीस ने इस सिंचाई घोटाले का काफी ज़िक्र किया. उन्होंने अजित पवार की भूमिका पर भी बयान दिए थे. 2014 के चुनाव के समय भी BJP ने ये मुद्दा काफी उठाया था. ये कहते थे कि अगर इनकी सरकार आई, तो अजित पवार जेल जाएंगे. BJP की सरकार आई. दिसंबर 2014 में फडणवीस ने ऐंटी-करप्शन ब्यूरो को सिंचाई घोटाले में अजित पवार की भूमिका पर जांच की इजाज़त दी. मगर पांच साल का कार्यकाल बीत गया और अजित पवार अरेस्ट नहीं हुए. फिर जब अजित पवार ने फडणवीस से हाथ मिलाया, तब फडणवीस के पवार पर दिए गए घोटाले वाले बयान ख़ूब शेयर हुए.

क्या है सिंचाई घोटाला?
ये 2011-12 का मामला है. सिंचाई विभाग में चीफ इंजिनियर रहे विजय पंढारे की लिखी एक चिट्ठी से घोटाले का खुलासा हुआ. इसमें कहा गया था कि बांध बनाने में कई तरह की जालसाजी हो रही है. अनुमानित लागत बढ़ाई जा रही है. पंढारे ने CBI जांच की सिफारिश की थी. उस समय कांग्रेस-NCP की गठबंधन सरकार थी. सिंचाई विभाग NCP के पास था. अजित पवार लंबे समय तक इसके मंत्री रहे. इसके बाद CAG की रिपोर्ट आई. इसमें कहा गया था कि महाराष्ट्र के जल संसाधन मंत्रालय में हुई गड़बड़ियां बताई थीं. CAG रिपोर्ट के मुताबिक, जल संसाधन मंत्रालय लंबे समय के लिए योजना नहीं बना रहा है, न ही प्राथमिकता के आधार पर प्रोजेक्ट्स को चुन रहा है. पर्यावरण से जुड़ी मंज़ूरी भी सही समय पर नहीं मिल रही है और प्रोजेक्ट्स लटक रहे हैं. इससे लागत बढ़ रही है. फिर इकॉनमिक सर्वे की रिपोर्ट में बताया गया कि 2001-02 से 2011-12 के बीच सिंचाई के लिए 70 हज़ार करोड़ रुपये ख़र्च किए गए. मगर राज्य की सिंचाई क्षमता में बस 0.1 फीसद का इज़ाफा हुआ. तब कहा गया कि ये सिंचाई घोटाला लगभग 35 हज़ार करोड़ रुपये का हो सकता है.

पढ़िए: क्या है सिंचाई घोटाला, जिसके आरोप में फंसे अजित पवार को फडणवीस जेल भेजने की बात कहते थे

अजित पवार पर क्या आरोप थे?
ये पवार के बतौर जल संसाधन मंत्री रहते हुए दी गई सिंचाई परियोजना की दी गई मंजूरियों से जुड़े हैं. आरोप लगे कि पहले प्रॉजेक्ट्स को कम लागत का बताकर मंज़ूरी दे दी जाती है. फिर उसमें बदलाव करके लागत बढ़ा दिया जाता है. जून 2009 से अगस्त 2009 के बीच के सिर्फ तीन महीनों में विदर्भ इलाके के अंदर चल रहीं 38 सिंचाई परियोजनाओं का बजट बढ़ा दिया गया. 6,672 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 26,772 करोड़ रुपये. इसी पर बवाल हो गया. क़रीब 70 हज़ार करोड़ के अनुमानित घोटाले का एक हिस्सा था ये.


महाराष्ट्र: जानिए क्या है सिंचाई घोटाला, जिसमें अजित पवार और साथियों पर 70 हज़ार करोड़ गबन का आरोप है

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