Submit your post

Follow Us

अफगानिस्तान चीट शीट पार्ट-1: जब कंधार मौर्य साम्राज्य का हिस्सा था और बौद्ध मठों से पटा पड़ा था

तकरीबन 10 साल पहले अफगानिस्तान (Afghanistan) पर एक बेहतरीन डॉक्युमेंट्री आई थी. नाम था अफगानिस्तानः द ग्रेट गेम. इसे बनाया था ब्रिटिश पॉलिटीशियन और फिल्म मेकर रॉरी स्टुअर्ट ने. वो इस डॉक्युमेंट्री में लंदन में रहने वाले अफगान मूल के सिविल सर्वेंट अबी आर्यन से अफगानिस्तान के इतिहास के बारे में पूछते हैं.अबी मुस्कुराते हुए जवाब देते हैं-

“दुनिया भर से लड़ाके और देश वक्त-वक्त पर अफगानिस्तान में घुसते रहे हैं. यहां घुसने का रास्ता बहुत आसान है. बस मुश्किल है तो यहां से वापस जाना.”

यही मुश्किल काम करने में अमेरिका को 20 साल लग गए. अब तालिबान ने अफगानिस्तान में अपनी सरकार की घोषणा कर दी है. इसके साथ ही लोगों को 1996 से 2001 के बीच चली तालिबान के बुरे सपने जैसी पिछली सरकार याद आने लगी है. आपको लग रहा होगा कि अरे इस कहानी में तो बहुत कुछ छूट गया है. जैसे ब्रिटिश-रूस का अफगानिस्तान में आना, बामियान में बुद्ध की मूर्ति टूटना, तालिबान की कहानी और न जाने क्या-क्या. तो हम आपको दे रहे हैं अफगानिस्तान पर एक चीट शीट. ये चीट शीट 3 हिस्सों में है. इन तीन हिस्सों को पढ़ने के बाद आप शॉर्टकट में बन जाएंगे अफगान स्पेशलिस्ट. पहले हिस्से में लगाइए अफगानिस्तान के इतिहास में एक गहरा गोता.

मौर्य काल में अफगानिस्तान

तो फिर शुरू से शुरू करते हैं. वैसे तो अफगानिस्तान को लेकर कई तरह की कहानियां हैं, जैसे महाभारत में कौरवों का ननिहाल यानी गांधारी का पैतृक निवास यहीं है. इसे तब गांधार कहा जाता था. शकुनी भी यहीं का रहने वाला था. ये सब तो मिथॉलजी है. मतलब ऐसी कहानियां जिनके पीछे इतिहास कम, कही-सुनी ज्यादा है. अफगानिस्तान पर आधिकारिक इतिहास की पहली झलक मौर्य काल में मिलती है. यही कोई 2500 साल पहले. मौर्य साम्राज्य का राजा था चंद्रगुप्त मौर्य. वही जिनके गुरु थे चाणक्य. अफगानिस्तान उस वक्त कंधार कहलाता था. वहां का राजा था सेल्युकस. वही सेल्युकस जो सिकंदर या अलेक्जेंडर का सेनापति था. सिकंदर ने अफगानिस्तान का इलाका जीता और सेल्युकस को सौंप दिया.

जस्टिन और ग्रीक-रोमन इतिहासकार प्लूटार्क ने भारतीय शासक चंद्रगुप्त मौर्य और अलेक्जेंडर के बीच रिश्तों के बारे में बताया है. सेल्युकस ने कंधार को जीत कर पश्चिमी भारत की सरहद तक धमक दिखा दी थी. ऐसे में चंद्रगुप्त मौर्य भी सीमा की रक्षा के लिए वहां पहुंचे. दोनों में युद्ध छिड़ गया. यह युद्ध एक संधि पर खत्‍म हुआ. इसके तहत 305 ईसा पूर्व में सेल्युकस ने चंद्रगुप्त मौर्य को अफगानिस्तान सौंप दिया था. इस जंग के बाद मौर्य वंश और प्राचीन ग्रीक साम्राज्य के बीच कूटनीतिक रिश्ते बने.

इतिहासकारों के मुताबिक, ग्रीक साम्राज्य ने कंधार के अलावा अफगानिस्तान के दूसरे इलाकों और भारत पर चंद्रगुप्त का शासन स्‍वीकार कर लिया था. इसी दोस्ती के बदले चंद्रगुप्त मौर्य ने बड़ा तोहफा भेजा. उन्होंने महावतों के साथ 500 हाथी, मुलाजिम, सामान और अनाज भेंट स्वरूप यूनान भेजा. यूनान को अब ग्रीस कहते हैं. इसी दोस्ती के तहत यूनान के राजदूत मेगस्थनीज को चंद्रगुप्त मौर्य के दरबार में नियुक्त किया गया था. मेगस्थनीज ने एक जरूरी काम किया. उन्होंने चंद्रगुप्त के कार्यकाल पर किताब ‘इंडिका’ लिखी. इस किताब को तत्कालीन भारत की असल झलक देने वाला दस्तावेज़ माना जाता है. इसमें मौर्य काल में राजकाज चलाने, लोगों के रहन-सहन और धर्म आदि के बारे में जानकारी मौजूद है. चंद्रगुप्त मौर्य के पोते महान सम्राट अशोक ने भी अफगानिस्तान पर शासन किया था. सम्राट अशोक ने बाद में बौद्ध धर्म स्वीकार कर लिया. इसके बाद उन्होंने दुनिया भर में बौद्ध धर्म का प्रचार-प्रसार कराया. यही काम अफगानिस्‍तान में भी हुआ.

चंद्रगुप्त मौर्य के शासन काल में राज्य की सीमाएं अफगानिस्तान को भी अपने में समेटे हुए थीं. यही वजह है कि अफगानिस्तान में अब भी मौर्य कालीन कई पुरातात्विक साइट्स हैं.
चंद्रगुप्त मौर्य के शासन काल में राज्य की सीमाएं अफगानिस्तान को भी अपने में समेटे हुए थीं. यही वजह है कि अफगानिस्तान में अब भी मौर्य कालीन कई पुरातात्विक साइट्स हैं.

बामियान के बुद्ध

ये तो हुई प्राचीन अफगानिस्तान की बात. अब आते हैं 1996 में. पिछली बार तालिबान की सरकार 1996 में ही अफगानिस्तान पर काबिज़ हुई थी. उसके बाद अफगानिस्तान में बामियान नामक जगह पर उसने जो किया, उससे दुनियाभर में इतिहास और पुरातत्व से जुड़े लोग हिल गए. पहाड़ काटकर बनाई गई महात्मा बुद्ध की 115 फुट और 175 फुट की मूर्ति को गोला-बारूद लगाकर ध्वस्त कर दिया. असल में ये मूर्तियां नहीं बल्कि इतिहास की गवाह थीं.

बामियान काबुल के उत्तर पश्चिम में बसा एक शहर है. ये शहर चीन और दक्षिण एशिया के बीच एक प्राचीन व्यापार मार्ग ‘सिल्क रूट’ पर स्थित है. सिल्क रूट नाम इसलिए पड़ा क्योंकि इस रास्ते से सिल्क का व्यापार बहुत ज्यादा होता था. इस रास्ते से ही बौद्ध धर्म के प्रचारक बामियान पहुंचे और बामियान घाटी एक बौद्ध केंद्र बन गई. छठी शताब्दी में कई बौद्ध संन्यासी हिंदकुश पर्वतमाला में बनी इस घाटी की गुफाओं में रहते थे. इस दौरान उन्होंने भित्ति चित्र और मूर्तियां बनाईं. सातवीं शताब्दी में चीनी बौद्ध यात्री ह्वेन सांग अपनी भारत यात्रा के बाद चीन लौटे. लौटते समय वो बामियान घाटी से गुजरे और उन्होंने इसके बारे में लिखा,

“यहां दर्जनों मठ हैं, जिनमें एक हजार से भी ज्यादा संन्यासी हैं. बुद्ध की खड़ी हुई प्रतिमा करीब 50 मीटर ऊंची है और ऐसी चमकती है जैसे सोने की हो.”

सबसे बड़ी मूर्ति 53 मीटर यानी तकरीबन 175 फुट ऊंची थी. इसमें बुद्ध के ‘दीपांकर’ रूप को दिखाया गया था, जिसे “रौशनी जलाने वाला” कहा जाता है. कला इतिहासकारों के मुताबिक, इसमें बौद्ध कला के साथ-साथ यूनानी परंपरा की विशेषताओं का भी मिश्रण था.

अपने पहले शासन काल (1996-2001) में तालिबान ने बामियान में बनी महात्मा बुद्ध की मूर्तियों को गोला-बारूद लगाकर उड़ा दिया था. Image: Khan Academy
अपने पहले शासन काल (1996-2001) में तालिबान ने बामियान में बनी महात्मा बुद्ध की मूर्तियों को गोला-बारूद लगाकर उड़ा दिया था. (Image: Khan Academy)

ऐसा नहीं था कि तालिबान से पहले बामियान में कोई इस्लामी शासक ही नहीं आया था. सन 1000 ईस्वी में बामियान घाटी के इस्लामीकरण के बाद भी ये मूर्तियां खड़ी रहीं. बीसवीं सदी में ये पर्यटन का एक केंद्र बन गईं. लेकिन 1979 में सोवियत कब्जे के बाद इस जगह की तस्वीर बदलने लगी. एक दशक चले युद्ध में इन गुफाओं का गोलाबारूद के गोदामों की तरह इस्तेमाल किया जाता था. इसी घाटी में अमेरिका के समर्थन से मुजाहिदीनों ने सोवियत सैनिकों से जमकर लड़ाई की.

इसके बाद, मार्च 2001 में अफगानिस्तान में अपना शासन कायम कर चुके तालिबान ने मूर्तियों को बम से उड़ा दिया. ये विश्व की एक साझा धरोहर थीं, लेकिन तालिबान के कट्टरपंथी शासन में बुतों की कोई जगह नहीं थी. इन मूर्तियों को तोड़ने का हुक्म देने वाला कोई और नहीं, 7 सितंबर 2021 को तालिबान सरकार 2.0 में अफगानिस्तान का प्रधानमंत्री चुना गया मुल्ला मोहम्मद हसन अखुंद है. मुल्ला अखुंद उस शूरा यानी सलाहकार परिषद का हिस्सा था जिसने छठी शताब्दी की बौद्ध मूर्तियों को नष्ट करने का हुक्म दिया था.

इस तरह से देखा जाए तो अफगानिस्तान का इतिहास और वर्तमान पूरा एक चक्र पूरा कर चुका है. इतिहास से वर्तमान तक अफगानिस्तान में कई रोचक संयोग हैं. मिसाल के तौर पर जिस कंधार में मौर्य वंश की जड़ें मिलती हैं वहीं की मिट्टी से तालिबान का उदय हुआ. बामियान में जिसने बुद्ध की मूर्तियों को तोड़ने का हुक्म दिया वही काबुल में प्रधानमंत्री की गद्दी पर बैठ गया.

अफगानिस्तान की इस यात्रा में कई और रोचक पड़ाव हैं. उनके बारे में जानने के लिए आपको अफगानिस्तान चीट शीट का दूसरा भाग पढ़ना होगा….


वीडियो – तालिबान ने गर्भवती महिला पुलिस अधिकारी की परिवार के सामने बेरहमी से हत्या की

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

कौन हो तुम

'मनी हाइस्ट' वाले प्रोफेसर की पूरी कहानी, जिनकी पत्नी ने कहा था, 'कभी फेमस नहीं हो पाओगे'

'मनी हाइस्ट' वाले प्रोफेसर की पूरी कहानी, जिनकी पत्नी ने कहा था, 'कभी फेमस नहीं हो पाओगे'

अलवारो मोर्टे ने वेटर तक का काम किया हुआ है. और एक वक्त तो ऐसा था कि बकौल उनके कैंसर से जान जाने वाली थी.

एक्टर शरत सक्सेना की कहानी, जिन्होंने 71 साल की उम्र में ज़बरदस्त बॉडी बनाकर सबको चौंका दिया

एक्टर शरत सक्सेना की कहानी, जिन्होंने 71 साल की उम्र में ज़बरदस्त बॉडी बनाकर सबको चौंका दिया

हीरो बनने आए शरत सक्सेना कैसे गुंडे का चमचा बनने पर मजबूर हुए?

'भीगे होंठ तेरे' वाले कुणाल गांजावाला आजकल कहाँ हैं?

'भीगे होंठ तेरे' वाले कुणाल गांजावाला आजकल कहाँ हैं?

एक वक़्त इंडस्ट्री में टॉप पर थे कुणाल और उनके गाने पार्टियों की जान हुआ करते थे.

राज कुंद्रा की पूरी कहानी, 18 की उम्र में शॉल बेचने से शुरुआत करने वाले राज यहां तक कैसे पहुंचे?

राज कुंद्रा की पूरी कहानी, 18 की उम्र में शॉल बेचने से शुरुआत करने वाले राज यहां तक कैसे पहुंचे?

IPL स्कैंडल, मॉडल्स के आरोप, अंडरवर्ल्ड कनेक्शंस के आरोप, एक्स वाइफ के इल्ज़ाम सब हैं इस कहानी में.

रिचर्ड ब्रैनसन: जिन्होंने पहले अंतरिक्ष के दर्शन करके जेफ बेजोस का मजा खराब कर दिया

रिचर्ड ब्रैनसन: जिन्होंने पहले अंतरिक्ष के दर्शन करके जेफ बेजोस का मजा खराब कर दिया

रिचर्ड ब्रेन्सन की कहानी, जहां भी गए तहलका मचा दिया.

'सिंघम' IPS से तमिलनाडु BJP के सबसे युवा अध्यक्ष बने अन्नामलाई की कहानी

'सिंघम' IPS से तमिलनाडु BJP के सबसे युवा अध्यक्ष बने अन्नामलाई की कहानी

पहला चुनाव हार गए थे, बीजेपी ने राज्य की जिम्मेदारी सौंपी है.

'तड़प-तड़प के' जैसा प्रेमियों का ब्रेकअप एंथम देने वाले सिंगर के के आजकल कहां हैं?

'तड़प-तड़प के' जैसा प्रेमियों का ब्रेकअप एंथम देने वाले सिंगर के के आजकल कहां हैं?

उनके गाए 'पल' गाने के बगैर आज भी किसी कॉलेज का फेयरवेल पूरा नहीं होता.

कर लिया योगा? अब क्विज खेलने से होगा

कर लिया योगा? अब क्विज खेलने से होगा

आन्हां, ऐसे नहीं कि योग बस किए, दिखाना पड़ेगा कि बुद्धिबल कित्ता बढ़ा.

तमिल जनता आखिर क्यों कर रही है 'फैमिली मैन-2' का विरोध, क्या है LTTE की पूरी कहानी?

तमिल जनता आखिर क्यों कर रही है 'फैमिली मैन-2' का विरोध, क्या है LTTE की पूरी कहानी?

जब ट्रेलर आया था, तबसे लगातार विरोध जारी है.

माधुरी से डायरेक्ट बोलो 'हम आपके हैं फैन'

माधुरी से डायरेक्ट बोलो 'हम आपके हैं फैन'

आज जानते हो किसका हैप्पी बड्डे है? माधुरी दीक्षित का. अपन आपका फैन मीटर जांचेंगे. ये क्विज खेलो.