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ऑस्ट्रेलियन स्टाइल ऑफ कैचिंग, जिसके चक्कर में विराट हलुआ-हलुआ कैच गिराए पड़े हैं

कैंच लेने की और कौन सी स्टाइल है, जान लीजिए

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ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ चल रही टी20 सीरीज में विराट कोहली (बाएं) और हार्दिक पंड्या (दाएं) जैसे सेफ फील्डर्स ने भी आसान कैच गिराए. इसके बाद से ही कैचिंग की टेक्नीक को लेकर लगातार बात हो रही है. (फोटो- AP)
भारत-ऑस्ट्रेलिया । पहला टी20, कैनबरा
ऑस्ट्रेलियाई पारी का सातवां ओवर. गेंदबाज- युजवेंद्र चहल. बल्लेबाज- डार्सी शॉर्ट. ओवर की तीसरी गेंद पर डार्सी शॉर्ट ने बड़ा हिट लगाना चाहा. गेंद हवा में सीधी टंग गई. गेंद के नीचे विराट कोहली. सेफ फील्डर. लेकिन एक सीधा टंगा कैच विराट कोहली ने गिरा दिया.
भारत-ऑस्ट्रेलिया । दूसरा टी20, सिडनी
ऑस्ट्रेलियाई पारी का आठवां ओवर. गेंदबाज- वॉशिंगटन सुंदर. बल्लेबाज- मैथ्यू वेड. ओवर की आख़िरी गेंद ने वेड के बल्ले का टॉप एज लिया. कवर्स के पास एक हलुआ कैच उछला और एक बार फिर विराट कोहली ने कैच गिरा दिया.
इन दोनों ड्रॉप कैच में फील्डर के अलावा एक और बात कॉमन थी. कैच लेने का तरीका. विराट कोहली दोनों बार ऑस्ट्रेलियन स्टाइल ऑफ कैचिंग से कैच लेने गए और दोनों बार कैच गिराया. दूसरे टी20 में तो शायद उन्होंने अपने करियर का सबसे आसान कैच गिराया था.
लेकिन ये ऑस्ट्रेलियन स्टाइल ऑफ कैचिंग है क्या? और क्या क्रिकेट में इसके अलावा भी कैचिंग का कोई तरीका है? कौन सी स्टाइल ज़्यादा सफल है? जानते हैं.

दो तरह की कैचिंग टेक्नीक

क्रिकेट जगत में कैच लेने के तरीकों की बात आती है तो दो मशहूर टेक्नीक का ज़िक्र होता है.
1. ऑस्ट्रेलियन स्टाइल ऑफ कैचिंग
2. इंग्लिश स्टाइल ऑफ कैचिंग
कैच लेने की इन दोनों टेक्नीक में मोटे तौर पर तीन बातों का अंतर है.
1. हाथों की पोजिशनिंग.
2. हाई कैच होने पर बॉल के नीचे आने की टेक्नीक.
3. आई लेवल.

दोनों कैचिंग में अंतर

ऑस्ट्रेलियन और इंग्लिश स्टाइल ऑफ कैचिंग में हाथों की पोजिशनिंग का अंतर समझने के लिए पहले ये तस्वीर देखिए.
Untitled Design (92) बाईं ओर- ऑस्ट्रेलियन स्टाइल ऑफ कैचिंग. दाईं ओर- इंंग्लिश स्टाइल ऑफ कैचिंग.

ऑस्ट्रेलियन स्टाइल ऑफ कैचिंग ‘फिंगर अप’ या ‘ओपन कप’ कैचिंग है. जैसा कि तस्वीर में दिखाया गया है. अंगूठा-अंगूठा सटा रहता है. हथेलियां खुली हुई रहती हैं.
वहीं इंग्लिश स्टाइल में हथेलियां एक क्लोज़ कप की तरह बंद होती हैं. छोटी उंगली-छोटी उंगली सटी रहती हैं.
दूसरा अंतर - हाई कैच लेते वक्त बॉल के नीचे आने की टेक्नीक में है. ऑस्ट्रेलियन स्टाइल में बॉल के ठीक नीचे रहा जाता है. इनफैक्ट सिर के ठीक ऊपर हाई कैच लिए जाते हैं. वहीं इंग्लिश स्टाइल में हथेलियां शरीर से हल्की सी आगे रहती हैं.
तीसरा अंतर- आई लेवल में. ऑस्ट्रेलियन स्टाइल ऑफ कैचिंग कहती है कि कैच हाई हो या लो, आंख की सीध में लपका जाए. उदाहरण के लिए- हाई कैच लेते वक्त खुली हथेलियां सिर के ऊपर रहती हैं, यानी आई लेवल पर. वहीं से कैच लपका जाता है. वहीं, इंग्लिश स्टाइल ऑफ कैचिंग कहती है आंख से कुछ नीचे कैच.

कौन सी बेहतर?

ये एक डिबेट है, जिसका अब तक क्रिकेट के पंडित भी हल नहीं निकाल सके हैं. जिस फील्डर को जो तरीका सूट कर जाए. ऑस्ट्रेलिया के खिलाड़ी हमेशा से ही ओपन कप (खुली हथेलियों से) कैचिंग करते रहे हैं. बताने की ज़रूरत नहीं है कि ऑस्ट्रेलिया हमेशा से ही एक अच्छी फील्डिंग यूनिट रही है.
वहीं दूसरी तरफ बाकी देशों, ख़ासकर उपमहाद्वीप के खिलाड़ी इंग्लिश स्टाइल ऑफ कैचिंग अपनाते थे और यहां से भी अच्छे फील्डर निकले. ख़ासकर कैचिंग तो ठीक ही रही.
आपने एक बात पर ध्यान दिया? ऊपर की लाइन में मैंने कहा कि उपमहाद्वीप के खिलाड़ी इंग्लिश स्टाइल ऑफ कैचिंग अपनाते ‘थे’. यानी अब नहीं.

स्लिप कैचिंग की दिक्कत

अगर हम सिर्फ इंडियन क्रिकेट की बात करें तो 2000 के बाद से जो खिलाड़ी आने शुरू हुए, उनमें धीरे-धीरे इंग्लिश की जगह ऑस्ट्रेलियन स्टाइल कैचिंग दिखने लगी थी. रिकी पॉन्टिंग जैसे फील्डर्स को आदर्श मानने वाली युवा पीढ़ी ओपन कप कैचिंग में ख़ुद को सहज पाने लगी. ये ट्रेंड सुरेश रैना की कैचिंग में भी दिखा और विराट कोहली तक आते-आते तो पूरी तरह ऑस्ट्रेलियन टेक्नीक हावी हो चुकी थी.
हालांकि ऑस्ट्रेलियन स्टाइल ऑफ कैचिंग की एक लिमिटेशन है. ऑस्ट्रेलियन खिलाड़ी तो स्लिप में भी इसी तरह से कैच लेते हैं और सफल रहते हैं. लेकिन बाकी देशों के खिलाड़ियों के लिए स्लिप कैचिंग में ये उतनी काम नहीं आती. भारत ने राहुल द्रविड़ जैसे महान स्लिप फील्डर दिए, जो टिपिकल इंग्लिश वे में कैच लेते थे. बॉल के नीचे आकर बंद हथेलियों से. अब जो खिलाड़ी आ रहे हैं तो इस क्लासिक तरीके से कैच लेने के अभ्यस्त नहीं हैं और शायद यही कारण है कि टेस्ट मैचों में भारतीय टीम स्लिप में जमकर कैच गिराती है. अजिंक्य रहाणे अपवाद हैं. अपवाद भी इसलिए हैं क्योंकि वो कुछ-कुछ ‘द्रविड़ स्कूल ऑफ कैचिंग’ से ही हैं.
विराट कोहली हाई कैचेज़ भी खुली हथेलियों से ही लेते हैं. और कहने की ज़रूरत नहीं है कि उनकी गिनती टीम के अच्छे फील्डर्स में से होती है. लेकिन हालिया सच ये भी है कि ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ दोनों टी20 में कोहली ने इसी स्टाइल से कैच लेने में बेहद आसान मौके गिराए. ख़ैर, मुर्गी और अंडे की तर्ज पर ये बहस भी जारी ही रहती है कि भई, इन दोनों टेक्नीक में से बेहतर कौन सी है. और दिग्गजों का एक ही जवाब होता है- जो सूट कर जाए.

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