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गंभीर और कोहली : शुरुआत मोहब्बत से हुई और दुनिया आज उन्हें दुश्मन समझती है

दोनों के बीच लव-हेट रिलेशनशिप.

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फोटो - thelallantop
गौतम गंभीर. हाल ही के दिनों में सबसे ज़्यादा इंतज़ार के बाद टेस्ट टीम में आकर उतनी ही जल्दी बाहर का रास्ता देखने वाला प्लेयर. इंग्लैंड के खिलाफ़ राजकोट में हुए पहले टेस्ट में दोनों इनिंग्स में कुल मिलाकर 29 रन बनाये. अगले मैच में उन्हें बिठा दिया गया. तीसरे टेस्ट के लिए उन्हें टीम से बाहर ही कर दिया. टीम का कप्तान विराट कोहली. पिछले लगभग 2 सालों से चरम पर खेल रहे हैं. मैच-दर-मैच नए रिकॉर्ड्स बना रहे हैं. कोहली और गंभीर के बीच की असहजता को हर कोई जानता है. ये किसी भी तरह से कोई न्यूज़ नहीं है. गंभीर से उनके अच्छे खेल का क्रेडिट नहीं लिया जा सकता. मगर साथ ही अपने रवैये के लिए भी उतनी ही जवाबदेही रखते हैं. फिर वो चाहे आईपीएल में हुई गाली गलौज हो जिसे रजत भाटिया और अम्पायरों ने हाथापाई में बदलने से बचा लिया. या सालों बाद के आईपीएल में जीत की चौखट पर पहुंच कुर्सी को मारी लात, फेंका तौलिया और दी गयी गालियां हों. ये सभी कैमरे पर दिखती हैं और हर किसी के मन में एक छाप छोडती हैं. इससे किसी खिलाड़ी का टेम्परामेंट मालूम चलता है. साथ ही खेल के लिए इज्ज़त भी. क्यूंकि अगर पैशन ही सबकुछ होता तो लादेन इस दुनिया का हीरो होता जो अमरीका को नष्ट कर देने के पैशन से भरा हुआ था. वहीं विराट अपने गेम में निखार ला रहे हैं. वो एक नक्काशकार की तरह अपने गेम को तराश रहे हैं. उसमें तरह-तरह की नक्काशी गढ़ रहे हैं. घर का एक बेटा जो तमाम पचड़े पाले फिरता हो, मगर कमाई सबसे ज़्यादा करता हो, उसके कई अवगुण वैसे ही माफ़ कर दिए जाते हैं. कोहली और गंभीर के बीच जो कुछ भी है उसकी शुरुआत बेहद संजीदा और खुशनुमा थी. उसे देख नहीं लगता था कि स्थिति इस कदर बिगड़ जायेगी. 24 दिसंबर 2009. ईडेन गार्डन्स. कलकत्ता. श्री लंका के खिलाफ़ इंडिया को 317 रन चाहिए थे. वन-डे मैच में 300 के ऊपर का टार्गेट किसी भी कंडीशन में कठिन होता है. मैच को विराट और गंभीर ने मिलकर जिताया. दोनों ने सेंचुरी मारीं. 224 रन की पार्टनरशिप. मैच के बाद गंभीर के 150 रनों के लिए उन्हें मैन ऑफ़ द मैच डिक्लेयर किया गया. गौतम गंभीर जब अवार्ड लेने पहुंचे तो उन्होंने बड़े ही अदब के साथ संजय मांजरेकर से कहा कि वो चाहते हैं कि ये अवार्ड कोहली को दिया जाए. इससे अच्छा क्या हो सकता है? आपके साथ खेलने वाला प्लेयर आपको इस तरह बधाई दे रहा होता है. वो आपको सम्मानित कर रहा होता है. उसे ये मालूम होता है कि आपने कितना अच्छा खेल खेला. और यहां ऐसा लगा कि ये दोनों तो बडी बन जायेंगे. https://www.youtube.com/watch?v=G4kufxoBDRc मगर ऐसा हुआ नहीं. 11 अप्रैल 2013. चिन्नास्वामी मैदान. बैंगलोर. आईपीएल का 12वां मैच. 26 गेंदों में 35 रन बनाकर खेल रहे विराट कोहली कोलकाता नाइट राइडर्स के 155 रन के टार्गेट को चेज़ करने की फिराक में थे. बालाजी के ओवर की पहली गेंद और कोहली स्वीपर कवर फील्डर को कैच देकर आउट हो गए. कोहली वापस जा ही रहे थे कि उन्हें कुछ सुनाई दिया. वो गंभीर की ओर पलटे. और उससे पूछा, "गाली क्यूं दिया?" ये बात सुनाई तो नहीं दी मगर वीडियो देखने पर साफ़ साफ़ मालूम पड़ता है. दोनों एक दूजे की ओर बढ़े. इस तरह से कि मिल गए तो ज़रूर ही एक दूसरे पर मुक्के बरसा देंगे. दोनों दिल्ली के लड़के. एक तीसरे दिल्ले वाले को बीच बचाव करना पड़ा. रजत भाटिया. https://www.youtube.com/watch?v=5-XsLPe6ZZU ये वो मौका था जहां से दोनों के बीच में मैदान पर खटास दिखने लगी. इसके बाद से दोनों एक ही टीम में ज़्यादा दिखाई भी नहीं दिए. एक मौका ऐसा ही आया आईपीएल 2016 में. केकेआर वर्सेज़ आरसीबी. यानी गंभीर वर्सेज़ कोहली. 9 गेंदों पर जीतने के लिए 6 रन चाहिए थे. आईपीएल में ऐसे मैचों को सोते हुए भी जीता जा सकता है. सूर्यकुमार यादव ने शम्सी की गेंद पर स्वीप कर के बाउंड्री मारी. गंभीर डगआउट में बैठे थे. पैड पहने. हाथ में तौलिया पकड़े. चौका पड़ते ही गंभीर उठे, गालियां देते हुए, चिल्लाते हुए, तौलिया फेंका, उसी कुर्सी पर लात मारी जिसपर बैठे हुए थे. फिर और भी गालियां दीं. 3 ही गेंद बाद जीत गए. गंभीर और भी चिल्लाए. कोहली चुप-चाप खड़े देख रहे थे. मैच खतम हुआ. दोनों मिले. हाथ मिलाये और अलग हो गए. हाथ सिर्फ इसलिए मिले क्यूंकि हाथ मिलाने की रस्मअदायगी करनी होती है. वरना गंभीर इस मूड में भी नहीं थे. https://www.youtube.com/watch?v=p5_DfC7OsRs धोनी के जाने के बाद कोहली टेस्ट टीम में कप्तान बन गए. टेस्ट टीम में गंभीर की वापसी भी नहीं हुई. हुई भी तो न्यूज़ीलैंड के खिलाफ़. खेलाया नहीं गया. खेलाया गया तो स्कोर नहीं बना. दिलीप ट्रॉफी में रनों का पहाड़ करने के बाद कम बैक करने के बाद गंभीर ने 4 इनिंग्स में 29, 50, 29 और 0 का स्कोर बनाया है. वो भी तब जब ओपेनिंग स्लॉट के लिए पुजारा, धवन, के एल राहुल, शिखर धवन दावेदारी कर रहे हैं. इन सभी के बीच गंभीर सबसे कमज़ोर कड़ी दिखते हैं. अपने कम स्कोर का भुगतान उन्हें अपनी जगह गंवाकर करना पड़ा. लोगों का कहना है कि कोहली और गंभीर एक दूसरे को पसंद नहीं करते. इसीलिए गंभीर टीम में वापस नहीं आ पाता. तो ये बात उतना वज़न नहीं कैरी करती जितना ये कि गंभीर इंडिया के लिए खेलने की दावेदारी उस तरह से नहीं पेश कर पा रहे हैं कि उन्हें नज़रन्दाज ही न किया जा सके.

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