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पंचायत चुनाव में हार मिली, तो BJP कार्यकर्ता ने गांव वालों का पानी बंद कर दिया

Gujarat में एक BJP Worker ने गांव के लोगों का पीने का पानी बंद कर दिया. गांव में एक ही बोरवेल था जिसके चलते, महिलाओं को 1 किलोमीटर दूर चलकर पानी भरकर लाना पड़ा.

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एक बीजेपी कार्यकर्ता ने गांव वालों का पीने का पानी बंद कर दिया. (सांकेतिक फोटो)

गुजरात में एक पंचायत चुनाव में जब कांग्रेस जीत गई तो एक बीजेपी कार्यकर्ता ने कथित तौर पर गांव वालों का पीने का पानी बंद कर दिया. दो दिनों तक पूरा गांव पानी की बूंद-बूंद के लिए परेशान रहा. आलम ये था कि मई की भीषण गर्मी में औरतों को घर से दूर जंगल से पानी भरकर लाना पड़ रहा था. 2 दिन तक परेशानी झेलने के बाद बीजेपी को इस बारे में पता चला. क्या कार्रवाई हुई? बताते हैं. 

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वलसाड जिले के गढ़वी गांव का ये मामला है. ये केंद्र शासित प्रदेश दादरा और नगर हवेली के पास पड़ता है. आदिवासी बहुल इलाका है. गढ़वी गांव के तबाड़माल फलिया के पास रहने वाले लोगों का पानी बंद कर दिया गया. गांव की आबादी करीब 700 है. यहां एकमात्र बोरवेल है. आरोप है कि बीजेपी कार्यकर्ता अमरेश तुलजी बुधल ने गांव वालों को बोरवेल छूने से मना कर दिया था. ये बोरवेल राज्य सरकार ने ग्राम पंचायत की सरकारी जमीन पर लगवाया था. 

कांग्रेस जीती तो पानी रोक दिया

26 अप्रैल को कपराड़ा तालुका पंचायत चुनाव हुआ. इस तालुका पंचायत में कुल 22 सीटें हैं. 18 सीटों पर बीजेपी के उम्मीदवार जीते, बाकी बची 4 सीटें कांग्रेस के खाते में गईं. 17 मई को अमरेश ने मोहल्ले के लोगों से कहा था कि इस गली में रहने वाले 35 परिवार लगभग 200 लोगों ने चुनाव में बीजेपी को वोट नहीं दिया है. इसलिए पानी बंद करवा दिया.

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गढ़वी गांव के सरपंच बापू खारप्रदे, जो खुद बीजेपी से हैं, उन्होंने बताया,

‘हमारा गांव कपराड़ा तालुका पंचायत की सुलिया सीट के तहत आता है. हाल ही में हुए चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मनीषा गोंड इस सुलिया सीट पर जीती हैं. उन्होंने मेरी बहू याशी मुकेश खारप्रदे को हराया है, जो बीजेपी की उम्मीदवार थीं.’

सरपंच खारप्रदे ने आगे बताया, 19 मई को जब उन्हें पता चला कि अमरेश गांव वालों को बोरवेल से पानी नहीं लेने दे रहे हैं तो उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसा न करें. उन्होंने पुलिस में शिकायत करने की चेतावनी दी थी. 

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इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक गांव के रहने वाले भारत सुरुम ने बताया,

‘अमरेश ने हमसे कहा था कि ये बोरवेल उसकी रिक्वेस्ट पर लगवाया गया था, इसलिए इस पर उसका हक है और वो किसी को भी इसका पानी इस्तेमाल करने से रोक सकता है. उसने यह भी कहा कि हाल ही में संपन्न हुए स्थानीय निकाय चुनावों में, इस गली से BJP को कम वोट मिले थे. इसलिए अब उनके परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों के अलावा, किसी और को बोरवेल से पानी लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी. इस हरकत की वजह से गांव की महिलाओं को पीने का पानी लाने के लिए पहाड़ी रास्तों पर लंबी दूरी से पानी लाना पड़ रहा था.’

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BJP ने क्या एक्शन लिया? 

18 और 19 मई को, तबाड़माल फलिया की महिलाएं 1 किलोमीटर पैदल चलकर घड़े में पानी भरकर ले आईं. इसके बाद, स्थानीय लोगों ने कपराड़ा के तालुका विकास अधिकारी आनंद पटेल से शिकायती की जिन्होंने तुरंत गांव के तलाटी को इस मामले में दखल देने के निर्देश दिए. तलाटी ने बताया कि अमरेश ने अपनी गलती मान ली है और एक लिखित माफीनामा दिया है, जिसे हमने अपने सीनियर अधिकारियों को भेज दिया है. 20 मई से बोरवेल का पानी फिर से छोड़ा गया. 

कपराड़ा से बीजेपी विधायक जीतू चौधरी ने बताया कि अमरेश पार्टी का एक्टिव कार्यकर्ता है और इस घटना के बारे में पता चलते ही उन्होंने उससे बात की. उन्होंने सख्त लहजे में उससे कहा कि वो ऐसी बेवकूफी भरी हरकतें न करे. जिसके बाद अमरेश मान गया और उसने पानी खोलने की इजाज़त दे दी. 

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