The Lallantop

जब मेडल नहीं जीत रही होतीं तब क्या करती हैं सविता पूनिया?

करियर की शुरुआत का वो किस्सा जब प्रैक्टिस से लौटकर घर पर रोती थीं सविता पूनिया.

Advertisement
post-main-image
सविता पूनिया (फोटो-इंस्टाग्राम)

"आप सब लोग बहुत बढ़िया खेलें हैं. बहुत पसीना बहाया है. आपका पसीना मेडल नहीं ला सका, लेकिन आपका पसीना देश की करोड़ो लड़कियों की प्रेरणा बन चुका है. निराश बिल्कुल भी नहीं होना है. आप लोग रोना बंद कीजिये. देश इस टीम पर गर्व कर रहा है. और कितने दशकों के बाद हॉकी इंडिया की पहचान फिर से पुनर्जीवित हो रही है. आप लोगों की मेहनत से."

तारीख थी 6 अगस्त, 2021. भारतीय महिला हॉकी टीम टोक्यो ओलंपिक में सेमीफाइनल तक पहुंची थी. लेकिन मेडल नहीं जीत पाई थी. तब टीम इंडिया का मनोबल बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ये बातें कही थीं. ठीक एक साल बाद, 7 अगस्त, 2022 को भारतीय टीम ने कॉमनवेल्थ गेम्स में ब्रॉन्ज़ मेडल जीता है. ये कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय हॉकी टीम का तीसरा मेडल है और 16 साल बाद हमारे हाथ आया है. इससे पहल भारत ने साल 2002 में इंग्लैंड को हराकर गोल्ड जीता था. वहीं, 2006 में टीम ने सिल्वर मेडल जीता था. 

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement

इस जीत की स्टार रहीं सविता पूनिया. टीम की कप्तान और उसकी दीवार भी. दीवार माने गोलकीपर जिन्होंने पेनाल्टी शूटआउट में न्यूज़ीलैंड के चार गोल रोक दिए. 

माने ब्रॉन्ज़ मेडल का मैच एकदम चक दे इंडिया वाली फील दे रहा था. चारों क्वार्टर के बाद दोनों टीमें एकदम बराबर स्कोर पर. फिर हुआ पेनाल्टी शूटआउट. और उसमें सविता ने जैसे गोल रोके कि मज़ा आ गया. अब हर जगह सविता पूनिया की बात हो रही है तो हमने सोचा कि उनके खेल के बारे में तो सब जानते हैं, हम खेल से थोड़ा अलग उनको जान लें.

Advertisement
मेडल नहीं जीत रही होतीं तब क्या करती हैं सविता पूनिया ?

हम पहुंचे सविता के इंस्टाग्राम, फेसबुक प्रोफाइल पर. पहली चीज जो सविता के बारे में पता चली वो ये है कि उन्हें एक्सरसाइज करना बहुत पसंद है. जब पाती हैं तो घर पर ही एक्सरसाइज करती हैं. इंस्टाग्राम पर उनके कई रील्स मौजूद हैं, जिनमें दिखता है कि वो खूब एक्सरसाइज़ करती हैं. वैसे वो स्पोर्ट्स पर्सन हैं तो खेल के लिए फिट और फ्लेक्सिबल रहना तो मस्ट है.

सविता योग भी प्रैक्टिस करती हैं. योग दिवस पर सविता ने एक पोस्ट शेयर करते हुए कहा, 

"योग ऐसी प्रैक्टिस है जिससे आप अपने कंसंट्रेशन और स्थिरता बढ़ा सकते हैं. इसके साथ ये ताकत, फ्लेक्सिबिलिटी और सहनशक्ति बढ़ाने में भी मदद करता है."

Advertisement

 

जीत के बाद सविता ने क्या कहा?

कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में शानदार प्रदर्शन के बाद सविता पूनिया ने आजतक से बात की. कहा, 

"ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हार के बाद हमारी टीम थोड़ा अपसेट थी. लेकिन हमने एक दूसरे को मोटीवेट किया. हम सबने शूटआउट की ट्रेनिंग ली. और खुद पर विश्वास रखा. ऑस्ट्रेलिया से हार के बाद हमारा कॉन्फिडेंस काफी डाउन हो गया था. लेकिन अब मैं उस बारे में बात नहीं करना चाहती. हमारी टीम ने काफी हार्डवर्क किया है. हमे पता था कल का हमारा दिन था. कल हमे खाली हाथ नहीं आना है. लास्ट एक मिनट जब था तब हमने बहुत ज्यादा प्रेशर ले लिया था. और प्रेशर भी जायज है क्योंकि 1-0 लीड थी. हम आगे फ्यूचर में और मेहनत करेंगे. जिससे ये गलतियां ना हो."

जब बस में किट को पैरों ठोकर मारकर निकल जाते थे लोग

हरियाणा के सिरसा जिले जोधकां गांव की रहने वाली सविता पूनिया के परिवार में उनसे पहले कोई खिलाड़ी नहीं रहा. साल 2003 में हरियाणा सरकार ने सिरसा जिले में दो स्पोर्ट्स नर्सरी खोलीं. एक जूडो की. एक हॉकी थी. सविता के स्कूल में पढ़ाने वाले एक टीचर ने घरवालों से उन्हें स्पोर्ट्स में डालने को कहा. सविता हॉकी खेलने लगी. उनके कोच सुंदर सिंह खरब ने एक साल उन्हें सिखाया और उसके बाद उन्हें गोलकीपर बनाने की बात कही. गोलकीपर के लिए बाकी खिलाड़ियों से ज्यादा भारी किट लगती है. अगर आपने हॉकी का मैच देखा है तो आपको पता होगा कि गोलकीपर ज्यादा प्रोटेक्शन के साथ फील्ट पर उतरते हैं. हर तरफ से कवर होकर.तो प्रैक्टिस के दिनों में सविता को हमेशा दो किट बैग के साथ चलना पड़ता था. एक हॉकी की जनरल किट और एक गोलकीपर वाली किट. जो साइज़ में थोड़ी बड़ी होती थी.

टोक्यो ओलंपिक, 2020 के दौरान सविता पूनिया के पिता महेंद्र सिंह ने ऑडनारी से बात की थी. तब उन्होंने किट से जुड़ा एक किस्सा हमसे साझा किया था. उन्होंने बताया था,

उन दिनों हमारे पास चार पहिया गाड़ी नहीं थी. सविता बस पकड़कर गांव से सिरसा जाती थी ट्रेनिंग के लिए. साथ ही किसी मैच या टूर्नामेंट के लिए भी सविता को बस से जाना पड़ता था. या फिर ट्रेन से. बस में कई बार किट की वजह से उन्हें चढ़ने नहीं दिया जाता. कई बार उनका किट ऊपर छत पर रखवा दिया जाता और कई बार बस की फ्लोर पर उनका किट रखवा दिया जाता. बस के कंडक्टर उनकी किट को पैर से हटाते, ये सब देखकर सविता को बहुत बुरा लगता था. कई दिन वो घर आकर रोती थी.

किट को ठोकर लगने पर रोने वाली लड़की आज किसी पहचान की मोहताज नहीं है. उनके कुशल नेतृत्व में टीम इंडिया ने 16 साल बाद कॉमनवेल्थ गेम्स में मेडल जीता है.

सविता को बधाई.

टीम इंडिया को बधाई.

वीडियो CWG 2022: सिल्वर मेडल जीतने वाली सुशीला देवी की कहानी

Advertisement