अमन की मां 55 साल की हैं. उन्हें ब्लड कैंसर है. लिम्फोमा स्टेज 1. अब पहले स्टेज में बीमारी का पता चलने की वजह से अमन की मां का इलाज सही वक्त पर शुरू हुआ और उनकी हालत में काफी सुधार है. लेकिन अक्सर कैंसर का पता काफी लेट चलता है और इसके चलते समय पर इलाज शुरू नहीं हो पाता और बाद में इतनी देर हो जाती है कि जान बचना मुश्किल हो जाता है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में हर सला एक लाख से ज्यादा लोगों में ब्लड कैंसर डिटेक्ट होता है. ऐसे में चलिए जानते हैं कि ब्लड कैंसर क्या है, क्यों होता है, इसके लक्षण क्या हैं जिन पर नज़र रखनी चाहिए. ब्लड कैंसर क्या होता है? ये हमें बताया डॉक्टर राहुल भार्गव ने.

डॉक्टर राहुल भार्गव, हेमेटोलॉजी-ऑन्कोलॉजी, फोर्टिस हॉस्पिटल, गुरुग्राम
हमारा खून रक्त कोशिकाओं से बना है. रेड ब्लड सेल, व्हाइट ब्लड सेल और प्लेटलेट्स. इनमें से कोई भी जब अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगता है तो ब्लड कैंसर हो सकता है. ब्लड कैंसर असल में अलग-अलग बीमारियों का समूह है. ल्यूकेमिया, लिंफोमा, मायलोमा. इन बीमारियों में ब्लड बनता है, लेकिन खराब.
इसीलिए हमारे लिए यह जानना जरूरी हो जाता है कि किस प्रकार का ब्लड कैंसर है, ताकि उसी हिसाब से उसका इलाज किया जा सके. इलाज की प्रोग्रेस के हिसाब से ही डॉक्टर अनुमान लगाते हैं कि मरीज कब तक ठीक हो सकता है. कारण ब्लड कैंसर होने के बहुत सारे कारण होते हैं. जैसे इन्फेक्शन, हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी, स्मोकिंग, गुटखा, पेस्टिसाइड, हमारे वातावरण में पाए जाने वाले पॉल्यूटेंट्स.
ल्यूकेमिया, लिंफोमा, मायलोमा इन बीमारियों में ब्लड बनता है लेकिन खराब प्रकार काइसी के साथ में कुछ दवाइयां जैसे क्लोरोफेनिकॉल, जिसकी वजह से प्लास्टिक एनीमिया होता था, वो भी एक बड़ा कारण है. एजिंग प्रोसेस भी एक वजह है क्योंकि जैसे-जैसे आपकी एज बढ़ती है, सेल्स की मारने की क्षमता कम होती जाती है. हर साल हजारों लाखों रुपए इसी रिसर्च पर खर्च किए जाते हैं कि आखिर लिंफोमा का कारण क्या है, ल्यूकेमिया का क्या कारण है, मायलोमा का क्या कारण है या एमडीएस का क्या कारण है.
फिर भी 90% लोगों में ये पता नहीं चल पता. जिस प्रकार हम जानते हैं कि सर्वाइकल कैंसर की वैक्सीन लगवाने से सरविक्स कैंसर नहीं होता उस तरह से ब्लड कैंसर के बारे में अभी तक ऐसी कोई बात सामने नहीं आई है. जिसे अपने लाइफ स्टाइल में शामिल करके या छोड़ कर हम ब्लड कैंसर से बच सकें. लक्षण - ब्लड कैंसर के लक्षण में बार- बार बुखार आना, रात में पसीना आना, वजन का कम होना, शरीर में गांठ पड़ जाना जिन्हें हम लिंफनोड कहते हैं, पेट बढ़ जाना शामिल हैं.
- 3 हफ्ते से ज्यादा बुखार आना, ब्लीडिंग होना या शरीर पर नीले-नीले धब्बे पड़ जाना, यह सब ब्लड कैंसर के लक्षण होते हैं क्योंकि ब्लड कैंसर में अगर सफेद कोशिकाएं कम होती हैं तो लाल कोशिकाएं और प्लेटलेट्स की संख्या बढ़ती है.

कुछ दवाइयां जैसे क्लोरोफेनिकॉल, जिसकी वजह से प्लास्टिक एनीमिया होता था, वो भी एक बड़ा कारण है
- ब्लड कैंसर के लक्षण टीबी से भी मिलते-जुलते हैं क्योंकि लिंफोमा में भी बुखार आ सकता है, वेट कम हो सकता है और रात के वक्त पसीना आ सकता है, इसीलिए कहा जाता है कि अगर कोई भी लिंफनोड बढ़ा हुआ है तो टीबी के साथ-साथ कैंसर का भी चेकअप कराना चाहिए
- भले ही यह जनरल लक्षण हैं लेकिन आपका शरीर अगर आपको इस तरह के संकेत दे रहा है तो ब्लड टेस्ट के माध्यम से ब्लड कैंसर को रूल आउट करना जरूरी है बचाव ब्लड कैंसर से बचने का फिलहाल कोई ज्ञात तरीका नहीं है. लेकिन अगर पहली स्टेज में ही ब्लड कैंसर को पकड़ लेते हैं तो 90 परसेंट लोग ठीक हो सकते हैं.
पेस्टिसाइड को अवॉइड करना, सात्विक भोजन खाना, रेगुलर चेकअप कराना, ये बचाव के कुछ तरीके हैं. अगर कोई भी लक्षण आपको आ रहा है तो उसको समझना ज़रूरी है क्योंकि शरीर आपको संकेत देता है. अगर शरीर में कोई लिंफनोड है तो बायोप्सी के माध्यम से उसे चेक कराना चाहिए. इलाज - आज की तारीख में ब्लड कैंसर के मरीज जिन्हें लिंफोमा हो, वह 25 साल से ज्यादा जी रहे हैं
- सीएमएल क्रॉनिक मॉयलो ल्यूकेमिया ओरल गोली खाकर 80 फीसदी लोग बिना बाल झड़े 65 साल तक जी रहे हैं
- मायलोमा जिसमें ओरल दवाई खिलाई जाती है और चमड़ी में इंजेक्शन लगता है, उसमें 70% लोग बिना बाल झड़े, बिना दस्त लगे 10 साल से ज्यादा जी रहे हैं
- रिवॉल्यूशनरी तरीके से ब्लड कैंसर का इलाज आया है. जिसकी वजह से ज्यादा से ज्यादा लोग जी पा रहे हैं.
जैसे कि डॉक्टर साहब ने बताया, ब्लड कैंसर और टीबी के लक्षण काफ़ी मिलते-जुलते हैं, इसलिए ब्लड टेस्ट करवाने ज़रूरी होते हैं. लक्षणों पर नज़र रखें, ताकि समय रहते इलाज शुरू हो सके.














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