वीडियो में दिख रही है एक दुल्हन. नाचती हुई. दूल्हे और बाकी मेहमानों के सामने, जो शादी में शिरकत करने पहुंचे. गाने के बोल हैं ‘मेरे सईंयां सुपरस्टार. मैं फैन हुई उनकी, मेरे सईंयां सुपरस्टार.’ दूल्हा भी बीच में थोड़ा बहुत थिरकते नज़र आया, पर दुल्हन काफी कॉन्फिडेंटली नाच रही है. आस-पास वाले भी तालियां बजा रहे हैं, वीडियो बना रहे हैं.
इस वीडियो को प्रोफेसर साहब नाम के अकाउंट से शेयर किया गया. कैप्शन में लिखा है, "दिस शुड बी स्टॉप"
पहली बात, अंग्रेज़ी गलत है. This should be stopped or This should stop is the right statement.
इसका हिंदी में मतलब हुआ, "ये सब बंद होना चाहिए"
अब आते हैं लोगों के कॉमेंट्स पर.
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मंजू अरुण नाम की एक यूजर ने लिखा,
"अब तीस-तीस, चालीस-चालीस साल की उम्र में शादी होगी, तो यही हाल होगा. न शर्म, न लिहाज, नाचने वाली बनकर इतराना"
विक्रांत ने लिखा,
"मैं अगर ऐसा बेशर्मी वाला कारनामा देखता तो खाना खाकर वापस आ जाता. न शगुन देता और न दूल्हा दुल्हन को बधाई देता. क्यूंकि मुझे पता है ये शादी नहीं चलेगी"
ट्वीटीश नाम की यूजर ने ट्वीट किया,
"छपरी लड़कियां इन्स्टाग्राम पर नाचने वाली लड़कियां फिर आते हैं - अपनी शादी में सइयां सुपरस्टार पर नाचने वाली लड़कियां"
पूजा भारद्वाज ने लिखा,
" शायद कुछ लोग बोलेंगे कि हम पुरानी सोच रखते हैं. पहले दुल्हन विवाह के मंडप में शर्माती लजाती सकुचाती धीरे-धीरे आहिस्ता से आती थी, अच्छा लगता था. और अब देखिए आधुनिकता के नाम पर क्या हो रहा है"
दुल्हन तो भई शर्माती हुई अच्छी लगती है, हल्का का मुस्कुराती हुई, सिर ढंकी, नाज़ुक सी. हंसे भी तो आहिस्ता से. स्टेज पर बैठकर दूल्हे से पटर-पटर बात करने वाली अच्छी थोड़े न लगती है. और मेकअप भी ज़्यादा न पोत ले. नैचरल लुक दिखे.
और हां दुल्हन विदाई में ज़रूर रोये. पर केवल थोड़ी देर तक. ससुराल पहुंचकर भी भैं-भैं न करे. वहां पहुंचने के बाद वहां की रस्मों का हिस्सा बने. खुश दिखे. जिससे बाकियों को देखकर भी अच्छा लगे, ख़ुशी मिले. नई बहु आई है. मुंह दिखाई में मुस्कुराते हुए मिले.
ये तो बस कहने के लिए होता है कि हमारी बहु बेटी जैसी है. आजकल की लड़कियां इस बात को सीरियसली ले लेती हैं. माना हमने कहा कि हर वक़्त पल्ला न लो. पर इसका ये मतलब थोड़ी ना है कि बिना दुपट्टे के या जींस-कुर्ती पहनकर ही सामने आने लगो. ससुराल वालों के सामने कुछ तो मर्यादा रखो. बहु होने का खुद से तो लिहाज़ करना ही चाहिए. अब सच में बेटी थोड़े न है. जो ये सब सहज लगेगा. है तो आखिर बहु ही.
"शर्म ही औरत का असली गहना है"
उन्हें याद रखना चाहिए कि शर्म ही औरत का असली गहना है. शर्माती, सकुचाती, लजाती हुई बहुएं ही अच्छी लगती है. अब ज्यादा कुछ तो कह नहीं रहे. वरना पहले के ज़माने में बहुएं मुंह ढंककर घूंघट लेती थीं. वैसे ही काम करती थीं. ये सब तो अब करा नहीं रहे.
और शादी में नाचना गाना बारातियों का ही अच्छा लगता है. लड़के वाले, दूल्हे के दोस्त यार नाचे गाएं. लड़के वालों की तरफ वाली औरतें थोड़ा बहुत थिरक ले, फिर किनारे हो लें. ये नहीं की आदमियों के बीच ही नाच ले.
लड़की वाले भी अपना नाचने गाने का फंक्शन अलग कर लें. लेडीज संगीत वगैरह में. दुल्हन का ऐसे लड़के वालों के सामने नाचना अच्छा थोड़े न लगता है. वो कैसे बत्तीसी दिखाकर नाच सकती है. ये तो बेशर्मी है.
ये मैं नहीं बोल रही. जिन लोगों को ये विडियो देखकर आपात्ति है या जिन्हें ये ख़राब लग रहा है ये उनका कहना है. मैंने बस सारी बातों को एक साथ कह दिया.
वैसे ऐसा नहीं है कि केवल किलसे हुए लोगों के ही रिएक्शन आए. कुछ लोगों ने प्रोफेसर और बाकि लोगों की क्लास भी लगाई.
सर्कास्टिक लॉयर नाम के अकाउंट ने तंज कसते हुए लिखा,
"सही बात है प्रोफेसर. औरत अपनी शादी में खुश कैसे हो सकती है. ये तो हमारी संस्कृति के खिलाफ है. हमें तो बस नशे में धुत्त बारातियों तक ही सीमित रहना चाहिए"
अभिषेक मुखर्जी ने लिखा,
"हां. 2022 में कैसे एक लड़की ने अपनी ही शादी में अपनी खुशी ज़ाहिर करने की हिम्मत कर ली"
खुशी ने कहा,
"लड़की को अपनी ज़िंदगी के सबसे बड़े दिन को एन्जॉय करने दो. तुम जिओ और शांति से जीने दो"
सोनाली ने लिखा,
"बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना. उसकी शादी, उसकी खुशियां. पर नहीं, भैया को कल्चर बताना है"
ज़ोहेर ने तंज कसते हुए कहा,
"औरतों को केवल लोगों के मनोरंजन के लिए नाचने देना चाहिए. अपनी ख़ुशी के लिए अपनी शादी में नहीं."
एक यूजर ने लिखा,
"हां. ये बंद होना चाहिए क्यूंकि लोग एक औरत को बिना मर्ज़ी के शादी करने के लिए फ़ोर्स नहीं कर रहे"
एक ने कहा,
"हां भई. लड़की को अपनी ज़िंदगी का सबसे ज़रूरी फैसला लेते वक़्त खुश नहीं होना चाहिए"
कुल जमा बात ये कि लोगों ने प्रोफेसर साहब की खूब क्लास लगाई. बात ये कि सब चाहते हैं कि शादी करने वाला जोड़ा खुश रहे. दुल्हन भी खुश हो. लेकिन कुछ लोगों ने ख़ुशी ज़ाहिर करने के पैमाने तय किए हुए हैं. अगर कोई उनके पैमाने से अलग कुछ करता है या करती है तो वे आहात हो जाते हैं. चाहते तो हैं कि लड़की हंसे, पर शर्मा कर. लड़की नाचे तो, पर केवल औरतों के बीच या भजन पर. लड़की अगर शादी के जोड़े में, बॉलीवुड के गाने पर नाचती है, तब उन्हें अच्छा नहीं लगता.
वही काम लड़के करें तो हमें नार्मल लगता है. अगर लड़की करे तो थोड़ा ज्यादा हो गया कहते हैं.
उसमें दरअसल कुछ भी ज्यादा नहीं है. हमें कमतरी की आदत है. ऐसे मौकों पर हमें खुद से सवाल करने की ज़रूरत है कि हमारा रिएक्शन भेदभावपूर्ण तो नहीं है.
और अंत में मुझे प्रोफेसर साहब को बस इतना ही कहना है कि या तो आप अपना यूजरनेम बदल लीजिए. या फिर अंग्रेजी और ज्ञान सही कर लीजिए. जैसा संजय भाई ने कहा, ‘आपकी इंग्लिश क्लास शुरू करवानी होगी.’
या तो ‘बी’ हटा दो. या ‘स्टॉप्ड’ कर दो. दोनों ना करना हो तो मोरल पोलिसिंग करना बंद कर दो.