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महंगाई पर चर्चा के बीच महुआ मोइत्रा ने दो लाख का बैग छुपाया? क्या बोली पब्लिक

महंगाई पर चर्चा के दौरान महुआ मोइत्रा ने अपना लुई विटॉन का बैग बेंच से उठाकर नीचे रखा था.

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महुआ मोइत्रा (फोटो-ट्विटर अजित दत्ता)

TMC सांसद महुआ मोइत्रा (Mahua Moitra) का एक वीडियो आज दिनभर चर्चा में रहा. संसद के Monsoon Session  में महंगाई पर चर्चा हो रही थी. इस चर्चा के दौरान महुआ मोइत्रा ने अपना लुई विटॉन (Louis Vuitton) का बैग बेंच से हटाकर नीचे रख दिया. सोशल मीडिया पर कहा जा रहा है कि ये बैग दो लाख रुपये का है. महुआ पर आरोप लग रहे हैं कि महंगाई पर चर्चा के दौरान उन्होंने अपना महंगा बैग छुपा लिया.

वायरल वीडियो में दिख रहा है कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) की काकोली घोष दस्तीदार लोकसभा में बात का कर रही हैं. उनके पास ही महुआ मोइत्रा भी बैठी हैं. जैसे ही काकोली घोष ने महंगाई का मुद्दा उठाया, महुआ ने अपना लुई विटॉन का बैग बेंच से उठाकर नीचे रख दिया. इस वीडियो को अजित दत्ता ने ट्वीट किया. वीडियो पोस्ट करते हुए उन्होंने लिखा, 

"जैसे ही महंगाई का मुद्दा उठाया जाता है, किसी का लुई वुइटन बैग जल्दी से बेंच के नीचे खिसक जाता है."

इस वीडियो पर लोग बस एक ही सवाल पूछ रहे हैं कि जब इतनी महंगाई है तो महुआ ने इतना महंगा बैग कैसे खरीद लिया. और बैग लेकर सदन क्यों आईं? सुशील  केडिया नाम ये यूजर ने लिखा, 

"महंगाई शब्द बोलते ही एकदम से बैग अंदर डाल दिया....कोई ना, चलो कम से कम थोड़ी बहुत शर्म बाकी तो है."

एक यूजर ने पूछा, 

"महुआ के लुई विटॉन के बैग में और महंगाई के बीच में क्या कनेक्शन है?"

कीर्ति नाम के यूजर ने बताया कि महुआ एक इन्वेस्टमेंट बैंकर थीं. उनका करियर US में बढ़िया चल रहा था. तो लुई विटॉन का बैग वो खरीद सकती है. इस बात में कोई तर्क नहीं है. इसी बात का जवाब देते हुए गौतम नाम के यूजर ने लिखा, 

"फिर अडानी, अंबानी और टाटा पर क्यों सवाल उठाए जाते हैं. वे भी कड़ी मेहनत से सफल भी हुए हैं. और उन्होंने भी करियर और बिजनेस में सफलता हासिल की है. मैं इसे डबल स्टैंडर्ड मानता हूं."

एक यूजर ने लिखा, 

"वे अपने लिए नहीं बल्कि ज्यादातर गरीब लोगों के लिए मुद्दे उठाते हैं और मूल बातें समझते हैं कि सांसद क्यों चुने जाते हैं."

अब महुआ ने बैग छुपाया या नहीं, ये वो ही जानती हैं. लेकिन एक सांसद के पास कोई महंगा सामान होने का मतलब ये नहीं है कि उनके पास महंगाई पर सवाल उठाने का अधिकार नहीं है. एक बात तो ये कि अलग-अलग भत्तों के अलावा हमारे देश के सांसदों को सैलरी मिलती है, उनके व्यक्तिगत खर्चों के लिए. उन रुपयों का इस्तेमाल वो क्या खरीदने में करते हैं ये उनकी इच्छा है. दूसरी बात ये कि वो हमारे जनप्रतिनिधि हैं, उन्हें हमने चुना है कि वो हमारी बात संसद तक पहुंचाएं. लोग महंगाई की वजह से जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस पर बात करें.

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