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'छोटी-छोटी चीज़ के लिए भी ससुराल वालों के आगे गिड़गिड़ाना पड़ता है'

एक महिला ने ट्वीट किया, कई और महिलाओं ने कहा- हमारे साथ भी यही होता है.

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एक महिला ने ट्विटर पर बताया कि कैसे उसकी पिछली शादी ने उसकी ज़िन्दगी पूरी तरह से बदल दी थी

शादी को किसी के भी जीवन का एक बड़ा कदम माना जाता है. कई केसेस में सबसे बड़ा कदम. ऐसा क्यों? क्योंकि शादी के बाद लोगों की ज़िंदगी कई सारे बदलाव आते हैं. उन्हें एक नए व्यक्ति के साथ सबकुछ एक नए सिरे से शुरू करना होता है. लेकिन ज्यादातर लड़कियों के केस में ये एकदम नई ज़िंदगी शुरू करने जैसा होता है. मतलब नया घर, नया परिवार और उस परिवार में खुद ढालने का प्रेशर. बात केवल खुद के ढलने तक की होती तो शायद उतनी दिक्कत न होती.

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लेकिन बहुओं पर नए घर को संभालने के साथ-साथ, नए घर के लोगों को खुश रखने की जिम्मेदारी भी होती है. पति को ये पसंद है, सास को वो नहीं पसंद आदि आदि. जब तक ये सब ऑर्गैनिक तरीके से हो रहा है, माने लड़की अपनी इच्छा से सबकी मान मनौव्वल कर रही है, सेवा कर रही है तब तक तो कोई समस्या नहीं लगती. 

लेकिन क्या हो जब बहू हर वक्त इस प्रेशर में रहे कि उसकी कोई बात किसी को बुरी न लगे, कोई उससे नाराज़ न हो जाए. ट्विटर पर कुछ महिलाओं ने शादी के बाद ससुराल में मिलने वाले इसी तरह के प्रेशर पर बात की है. 

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सबसे पहले नीरू नागराजन नाम की एक यूजर ने लिखा, 

“कभी-कभी मैं अपनी पिछली शादी के बारे में सोचती हूं और ये भी कि कैसे छोटी-छोटी चीज़ों से मुझे एंग्जायटी होने लगती थी. ''मेरी कज़िन अमेरिका जा रही है, क्या मैं उससे मिल आऊं?" ''एक रिश्तेदार की शादी है, तुम आओगी न?" हर चीज़ के लिए सिफ़ारिश लगती थी, गिड़गिड़ाना पड़ता था और ईगो मसाज करनी पड़ती थी.

महिला ने आगे लिखा,

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"भारत में कई पुरुष और उनके परिवार वाले छोटी-छोटी चीज़ों को सम्मान का विषय बना लेते हैं.  अगर आप किसी को कंट्रोल करते हैं और छोटी-छोटी बातें के लिए उन्हें तनाव देतेहैं तो इसमें  गर्व करने जैसी कोई बात नहीं है."

इस ट्वीट को करीब 1300 लोग लाइक कर चुके हैं, वहीं इस पर 100 से ज्यादा रीट्वीट और कोट ट्वीट्स हैं.  इस ट्वीट पर बड़ी संख्या में महिलाएं रिएक्ट कर रही हैं. कई महिलाओं ने इसी तरह के अनुभव साझा किए हैं.

विभूति खुराना नाम की एक यूज़र ने लिखा, 

"मैं नवविवाहित हूं. साल 2022 में जी रहा हूं और फिर भी कुछ नहीं बदला. चाहे हम कितने ही अनुभव साझा करें, यह जानना निराशाजनक है कि अब तक कुछ भी नहीं बदला है."

 

प्रतिभा नाम कि एक यूज़र लिखती हैं,

"हां. भारत में बहू को नियंत्रित करने की यह आम प्रथा है. मुझे अपने घर के पास रहने वाले अपने दोस्तों या बहन से मिलने नहीं दिया जाता था. मेरे ससुर ने कहा, "शादी के बाद दोस्ती नहीं होती है."

लिटरल ड्रामा नाम के ट्विटर हैंडल से लिखा गया,

“ये एकदम सटीक है. शादी आपकी इंडिविजुअलिटी और खुद पर कंट्रोल छीन लेता है. ऐसा लगता है जैसे ये लाइफ आपकी नहीं, आपके पति और ससुराल वालों की हो. उन्हें अपने माता-पिता से मिलने के लिए, अपनी मां के घर कुछ और दिन रुकने के लिए भी पूछना पड़ता है.”

इस ट्वीट पर कई लोगों ने अपनी मां का जिक्र करते हुए लिखा कि वो चाहते हैं कि उनकी मां तलाक ले लें. किसी ने लिखा कि उन्होंने अब तक अपनी मां को ऐसी लाइफ ही जीते देखा है. ये सच है कि कई औरतों के लिए वक्त बदला है. वो शादी के बाद भी अपने हिसाब से रहती हैं, लेकिन इनमें से ज्यादातर वो महिलाएं हैं जो अपने पैरों पर खड़ी हैं. आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हैं. ऐसी महिलाओं की संख्या अपने आप में ही बेहद कम है.

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