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मां के दोस्त ने नाबालिग का रेप किया, फिर कई अस्पतालों में जबरन उसका 'अंडा' बेचा

मामला वेस्टर्न तमिलनाडु के इरोड़ ज़िले का है. पीड़िता की उम्र 16 साल है. उसकी मां और उसके दोस्त ने फर्जीवाड़ा करके विक्टिम की उम्र 20 साल बताई थी.

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पुलिस ने बताया कि पिछले पांच सालों से पीड़िता का उत्पीड़न किया जा रहा था (फोटो - रायटर्स/आजतक)

तमिलनाडु पुलिस ने एक नाबालिग लड़की की मां और मां के एक मित्र को गिरफ़्तार किया है. आरोप है कि मां के मित्र ने कई मौक़ों पर नाबालिग का बलात्कार किया और उसे अपने oocytes यानी ओवरी के एग्स बेचने के लिए मजबूर किया. पुलिस ने पीड़िता की मां और उसके मेल फ़्रेंड को गिरफ़्तार कर लिया है.

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इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपी शख्स पेशे से वैन चालक है. उसने विक्टिम की उम्र 20 साल लिखवाई थी. और वो प्राइवेट अस्पतालों में विक्टिम से जबरन एग डोनेट करवाता था. तमिल नाडु के राज्य स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड्स से पुलिस को पता चला है कि 2017 से ही राज्य के अलग-अलग निजी अस्पतालों में पीड़िता के अंडों की अवैध बिक्री की जा रही थी. पुलिस ने कुछ अस्पतालों और डॉक्टरों की भी जांच शुरू कर दी है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में जांच अधिकारी को कोट करते हुए लिखा गया है,

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“पिछले चार सालों में कम से कम आठ बार नाबालिग के अंडों का अवैध व्यापार किया गया है. उसकी मां भी इस अपराध में शामिल थी.”

जांच अधिकारी ने बताया कि लंबे समय तक पीड़िता इस बारे में चुप रही, लेकिन पिछले महीने उसने अपना घर छोड़ दिया. कुछ दिन वो अपने एक दोस्त के घर रही. फिर कुछ रिश्तेदारों से संपर्क किया और उन्होंने पुलिस को पूरी घटना बताई. 

क्या है एग डोनेशन?

एग डोनेशन असिस्टेड रिप्रोडक्शन का एक प्रोसेस है, जहां एक महिला अपने अंडे (ओसाइट्स) दान करती है ताकि दूसरी महिला को बच्चा पैदा करने में मदद मिल सके. मसलन, अंडा दान करने वालों को एक हार्मोनल ट्रीटमेंट से गुज़रना पड़ता है. एक औरत की ओवरी से एक महीने में एक ही एग रिलीज़ होता है. रिलीज़ होने वाले एग्स की संख्या बढ़ाने के लिए महिला को हॉर्मोनल इंजेक्शंस दिए जाते हैं. इसके बाद इंजेक्शंस के जरिए ही औरत के शरीर से एग निकाला जाता है और उसे फ्रीज़ करके रखा जाता है.

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18 साल से कम उम्र की लड़कियों का एग इस तरह नहीं निकाला जा सकता है. डॉक्टर्स के मुताबिक, उम्र के साथ औरतों के एग्स की क्वालिटी और संख्या दोनों कम होते हैं. ऐसे में 25 या उससे ज्यादा उम्र की कई महिलाएं भी अपना एग फ्रीज़ करवाती हैं, ताकि उसका इस्तेमाल करके वो बाद में मां बन सकें. वहीं, ऐसे कपल्स भी दान किए गए एग्स का इस्तेमाल करते हैं जो क्रॉनिक या जेनेटिक बीमारियों से ग्रस्त होते हैं और नहीं चाहते कि उनकी बीमारी उनके बच्चों में आए.

एग डोनेशन या फ्रीज़िंग के बाद IVF के ज़रिए कंसीव किया जा सकता है.

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