सेहत की 35 साल की एक व्यूअर हैं. आगरा की रहने वाली हैं. उनके कहने पर हम यहां उनका नाम नहीं बता रहे. उन्होंने हमें मेल लिखकर बताया कि दूसरे बच्चे के जन्म के बाद से उन्हें पेल्विस एरिया में दर्द (Pelvis Pain) हो रहा है. साथ ही वो ढंग से पेशाब नहीं कर पातीं. ऐसा लगता है कि अभी और पेशाब बचा है. डॉक्टर ने उनकी जांच कर बताया कि उन्हें पेल्विक ऑर्गन प्रोलैप्स (Pelvic organ prolapse) की समस्या हो गई है. और उनका गर्भाशय निकालना पड़ेगा. इसके बाद से वो काफी परेशान हैं. उनके कहने पर हमने डॉक्टर से पेल्विक ऑर्गन प्रोलैप्स किस वजह से होता और इसका इलाज क्या है इसके बारे में बात की. लेकिन उससे पहले ये जान लीजिए कि पेल्विक ऑर्गन प्रोलैप्स होता क्या है?
डिलीवरी के समय इस एक गलती से फिर मां ना बन पाने का डर हो सकता है
भारत में यूटराइन प्रोलैप्स का सबसे बड़ा कारण है कमजोर वजाइनल मसल्स.


ये हमें बताया डॉक्टर अर्चना धवन बजाज ने.

वजाइनल या यूटराइन प्रोलैप्स (Uterine Prolapse) यानी बच्चेदानी का नीचे खिसक जाना या बाहर की तरफ आना. प्रोलैप्स का मतलब है किसी भी चीज का अपनी जगह से नीचे खिसक जाना. वजाइनल मसल्स के ढीले हो जाने से बच्चेदानी, पेशाब की थैली और मलाशय अपनी जगह से नीचे खिसक जाते हैं. पेल्विक फ्लोर के मसल्स डैमेज होने से भी ये समस्या होती है.
> भारत में यूटराइन प्रोलैप्स का सबसे बड़ा कारण है कमजोर वजाइनल मसल्स.
> वजाइनल मसल्स की कमजोरी का कारण है जल्दी-जल्दी और बहुत सारे बच्चे होना.
> डिलीवरी के दौरान ज्यादा जोर लगाना.
> पैरों के बल बैठकर डिलीवरी करना.
> इन सब वजहों से पेल्विक फ्लोर के मसल्स ढीली हो जाते हैं, फट जाते हैं, जिस वजह से बच्चेदानी बाहर की तरफ आने लगती है.
> कई बार अस्पताल में डिलीवरी के वक्त योनि और मलद्वार के बीच एक छोटा सा कट लगाया जाता है. इस कट को एपिसियोटोमी (Episiotomy) कहा जाता है.
> एपिसियोटोमी पेल्विक फ्लोर के मसल्स को डैमेज होने से रोकती है.
> लेकिन घर में हुई डिलीवरी या दाई के द्वारा की गई डिलीवरी में एपिसियोटोमी नहीं की जाती.
> इसकी वजह से भी मसल्स काफी डैमेज हो जाता है.
> लंबे समय से हो रही खांसी और कब्ज, पेल्विस के अंदर ट्यूमर या कैंसर होने के कारण भी बच्चेदानी नीचे खिसक जाती है.
> कई बार बच्चेदानी का ऑपरेशन होने पर घाव ठीक न होने पर भी पेल्विक ऑर्गन प्रोलैप्स हो सकता है.
> कई बार ये समस्या जेनेटिक भी होती है, लेकिन ऐसा बहुत कम होता है.
लक्षण> ज्यादातर मरीज ये बताते हैं कि उनके गुप्तांग से कुछ बाहर निकल रहा.
> इसके अलावा और भी लक्षण होते हैं, जैसे बार-बार पेशाब आना, पेशाब की थैली पूरी तरह खाली नहीं होना, उंगली डालकर पेशाब करना पड़ता है.
> मल अच्छे से नहीं निकलता, योनि में हाथ से पीछे प्रेशर बनाने से ही मल निकलता है.
> सेक्स के वक्त दर्द होना या ब्लीडिंग होना.
> पेल्विस के हिस्से में दर्द होना या कमर में दर्द होना.
इलाज> इसकी जांच बेहद आसान होती है. डॉक्टर वजाइना की जांच के दौरान ही इस समस्या की पहचान कर लेते हैं.
> सिर्फ पेशाब की थैली या मलाशय नीचे खिसने पर, यूरोफ्लोमेट्री टेस्ट, अल्ट्रसाउंड या MRI किया जाता है.
> कुछ मामलों में इलाज बिना सर्जरी के होता है, लेकिन ज्यादातर मामलों में इस समस्या का इलाज सिर्फ सर्जरी ही है.
> बिना सर्जरी के इलाज में पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों की मजबूती के लिए एक्सरसाइज कराई जाती हैं.
> इन्हें कीगल्स एक्सरसाइज (Kegel Exercise) कहते हैं.
> कई बार कीगल्स एक्सरसाइज से इस समस्या का समाधान हो जाता है.
> कई मामलों में लेजर के जरिए इलाज किया जाता है.
> लेकिन ज्यादातर मामलों में सर्जरी की ही जरूरत पड़ती है.
> अगर पेशाब की थैली या मलाशय नीचे आता है तो पेल्विक फ्लोर रिपेयर किया जाता है.
> अगर बच्चेदानी और वजाइना बिल्कुल नीचे आ गई हो तो बच्चेदानी निकालनी पड़ती है.
> इसके बाद पेल्विक फ्लोर को रिपेयर किया जाता है
> कई मरीजों को वजाइनल पेसरी (Vaginal Pessary) या छल्ले की जरूरत पड़ती है. इस छल्ले को वजाइना में डालकर टिशूज को ऊपर धकेला जाता है.
बचाव> पोषक तत्वों वाली चीजें खाने की सलाह दी जाती है.
> डिलीवरी के बाद आराम करना, खून की कमी न होने देना.
> दो बच्चों के बीच में समय देना ताकि शरीर और पेल्विक फ्लोर ठीक हो सके.
> स्मोकिंग न करें, खांसी न होने दें.
> वजन न बढ़ने दें, एक्सरसाइज करें ताकि मांसपेशियां मजबूत हों.
> पेल्विस में दर्द होने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाएं.
जैसे कि डॉक्टर ने बताया, अगर पेल्विस एरिया में दर्द हो रहा है, वजाइना से कुछ बाहर निकालने जैसा महसूस हो रहा है या फिर पेशाब और मल करने के दौरान दिक्कत महसूस हो रही है तो डॉक्टर को जरूर दिखा लें. ताकि समय रहते पेल्विक ऑर्गन प्रोलैप्स का इलाज हो सके.
(यहां बताई गईं बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)















