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ओरल कैंसर के लक्षणों में दांत दर्द, मुंह के छाले भी शामिल, लेकिन पहचानेंगे कैसे?

कुछ लोगों का ये भी सवाल होता है कि तंबाकू छोड़ने के बाद भी कैंसर क्यों हो जाता है? इसकी वजह ये है कि तंबाकू का असर लंबे समय तक रहता है.

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ओरल कैंसर को हेड-नेक कैंसर भी कहते हैं, ओरल कैंसर का सबसे प्रमुख कारण है तंबाकू का सेवन. (सांकेतिक फोटो)

कैंसर कई तरह का होता है, और कई वजहों से होता है. भारत सरकार के आंकड़ों के मुताबिक 2022 में ही करीब साढ़े 14 लाख कैंसर के नए मामले सामने आए. इनमें ओरल कैंसर के मामले काफी ज्यादा थे. ओरल यानी मुंह, गला, जीभ और नाक वाले हिस्सों में होने वाला कैंसर. ये दुनियाभर में छठवां सबसे कॉमन कैंसर है. और ओरल कैंसर के मामले में भारत दुनिया में दूसरे नंबर पर आता है. इतनी बड़ी संख्या में ओरल कैंसर होने की वजह है तंबाकू. हालांकि ओरल कैंसर दूसरी वजहों से भी हो सकता है. कई बार इसके लक्षणों को लोग पहचान नहीं पाते, और जब तक पता चलता है तब तक काफी देर हो चुकी होती है. तो चलिए डॉक्टर से जानते हैं, ओरल कैंसर के लिए कौन से चीजें जिम्मेदार हैं और इसका इलाज कैसे होता है.

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ओरल कैंसर किन कारणों से होता है?

ये हमें बताया डॉ प्रवीण बंसल ने.

(डॉ. प्रवीण बंसल, डायरेक्टर- मेडिकल ऑन्कोलॉजी, एशियन हॉस्पिटल)

- ओरल कैंसर को हेड-नेक कैंसर भी कहते हैं.

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- ओरल कैंसर का सबसे प्रमुख कारण है तंबाकू का सेवन.

- लोग कई तरह से तंबाकू का सेवन करते हैं, जैसे धूम्रपान. ये धूम्रपान बीड़ी, सिगरेट और हुक्के के रूप में किया जाता है. 

- कुछ लोग ये सोचते हैं कि लाइट सिगरेट पीने से कैंसर नहीं होता, ये एक भ्रांति है, किसी भी तरह की सिगरेट पीने से कैंसर हो सकता है. 

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- वहीं कुछ लोग तंबाकू खाते हैं, जैसे तंबाकू में चूना मिलाकर खाते हैं, पान के साथ या साबुत और कुछ लोग तंबाकू नाक से सूंघते भी है. 

- कुछ लोगों का ये भी सवाल होता है कि तंबाकू छोड़ने के बाद भी कैंसर क्यों हो गया? इसकी वजह ये है कि तंबाकू का असर लंबे समय तक रहता है. 

- गले में कैंसर होने के और भी कई कारण हैं. जैसे अगर दांतों से गाल बार-बार कट रहा है. 

- या कोई भी ऐसी चीज जो गालों को अंदर से नुकसान कर रही हो, तो मुंह के अंदर घाव होने से कैंसर का खतरा बन सकता है. 

- मुंह और दांतों की सफाई न होना भी ओरल कैंसर की एक और वजह है.

ओरल कैंसर में कैसे लक्षण दखाई देते हैं?

- गले या मुंह के कैंसर में कई तरह के लक्षण दखाई देते हैं.

- मुंह के अंदर हुआ छाला जो ठीक नहीं हो रहा है, मुंह के कैंसर का लक्षण हो सकता है. 

- लंबे समय से दांत दर्द या मुंह के अंदर ऐसा घाव जिससे खून आता हो, मुंह के कैंसर का लक्षण हो सकता है. 

- मुंह पूरा नहीं खुल पा रहा है, नाक से खून आना और आवाज में बदलाव जीभ के पिछले हिस्से में कैंसर के लक्षण हो सकते हैं. 

- बोलने में दिक्कत होना लैरिंक्स (गले का हिस्सा जहां से आवाज निकलती है) के कैंसर का लक्षण हो सकता है. 

- गले में अंदर गांठें बनना, गले का ऐसा दर्द जो ठीक नहीं हो रहा है या खाना निगलने में दिक्कत बनना, ये सभी लक्षण ओरल कैंसर की ओर इशारा करते हैं. 

- ओरल कैंसर के लक्षण दूसरी बीमारियों में भी दिखाई देते हैं.

इलाज  

- सबसे पहले ये जांच की जाती है कि मरीज को कैंसर है या नहीं. जांच से ये पता चलता है कि कैंसर कितना फैला है. 

- अगर कैंसर शुरुआती स्टेज पर है तो रेडियोथेरेपी और सर्जरी से इलाज किया जा सकता है.

- लेकिन ज्यादातर मरीज कैंसर की आखिरी स्टेज में डॉक्टर के पास आते हैं. 

- ऐसे में इलाज की शुरुआत कीमोथेरेपी से की जाती है जिसमें कैंसर का आकार छोटा किया जाता है. इसके बाद सिकाई या सर्जरी की जाती है.

- यानी ओरल कैंसर के इलाज में सिकाई, सर्जरी और कीमोथेरेपी सभी जरूरी है.

- कैंसर की जगह और इसकी स्टेज के मुताबिक तय किया जाता है कि इलाज किस तरीके से किया जाएगा.

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)

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