आसिया बीबी. पाकिस्तान की जेल में नौ साल बिताने वाली क्रिश्चियन औरत. उन पर ईशनिंदा का आरोप था. और पाकिस्तान की अदालत ने उन्हें मौत की सजा सुनाई गई थी. कई साल की लड़ाई के बाद नवंबर, 2018 में जेल से रिहा हुई थीं. तब से वो कनाडा में सीक्रेट लोकेशन में रह रही हैं. 29 जनवरी, 2020 को उनकी एक किताब पब्लिश हुई. ये किताब उन्होंने फ्रांस की पत्रकार एन-इजाबेल टोलेट के साथ मिलकर लिखी. जेल से रिहा होने के बाद आसिया बीबी से मिलने वाली इकलौती पत्रकार टोलेट ही हैं.
पाकिस्तानी जेल में नौ साल बिताने वाली आसिया बीबी ने बताया, 'मुझे ज़ंजीर में जकड़ कर रखा था'
ईशनिंदा का आरोप था, पाकिस्तान के कोर्ट ने मौत की सजा सुनाई थी.


खैर, बात किताब की. टाइटल है, 'Enfin libre!' यानी 'फाइनली फ्री'. अभी केवल फ्रेंच भाषा में ये आई है, अंग्रेजी संस्करण इस साल सितंबर में आएगा. इस किताब में आसिया ने जेल में बीते नौ साल के बारे में लिखा है.
क्या है इस किताब में?
उन्होंने लिखा है,
'मैं धार्मिक कट्टरपन की कैदी थी. जेल में केवल आंसू ही मेरे साथी थे. मेरी कलाइयां जलती रहती थीं, क्योंकि वो बंधी हुई थीं. सांस लेना मुश्किल होता था, क्योंकि मेरी गर्दन में लोहे की ज़ंजीर बंधी हुई थी. कॉलर की तरह. एक बड़े से नट से गार्ड उसे टाइट करता था. गर्दन में बंधी लोहे की ज़ंजीर का एक छोर हाथ में बंधी हथकड़ियों से जुड़ा हुआ था. दूसरा छोर ज़मीन पर पड़ा रहता था. एक कुत्ते की तरह मुझे बांधकर रखा जाता था. गहरा अंधेरा रहता था, जो मेरे मन को भी गहरे अंधेरे तक ले जाता था. एक डर हमेशा बंधा रहता था, जो मुझे कभी नहीं छोड़ता था.'

आसिया बीबी और जर्नलिस्ट टोलेट. फोटो- ट्विटर.
आसिया ने पाकिस्तान में रहने वाले क्रिश्चियन समुदाय के लोगों की हालत का भी जिक्र किया. लिखा,
'मेरी आज़ादी के बाद भी, वहां क्रिश्चियन लोगों के लिए कुछ नहीं बदला है. वो हिंसा का शिकार होते हैं. उनके सिर पर खतरे की तलवार लटकती रहती है. इस नए देश में मैं नई जिंदगी शुरू कर रही हूं. लेकिन किस कीमत पर? मेरा दिल टूट गया था जब मुझे अपने पिता और अपने परिवार के लोगों को बिना बाय कहे आना पड़ा था. पाकिस्तान मेरा देश है. मैं उससे प्यार करती हूं, लेकिन अब मैं हमेशा के लिए निर्वासित हूं.'
क्या है आसिया बीबी का पूरा मामला?
आसिया बीबी ईसाई धर्म की हैं. उनके वकील सैफुल मलूक ने बताया कि उनके और उनके पड़ोसियों के बीच पानी को लेकर झगड़ा हुआ था. 2009 में पाकिस्तानी पंजाब के शेखपुरा जिले में आसिया बीबी पानी भर रही थी, जहां उनकी पड़ोसनों ने इस पर नाराजगी जताई. केस में ये पेश किया गया कि आसिया बीबी ईसाई थीं, इसलिए उन्हें पानी का कटोरा छूने की इजाज़त नहीं थी. कथित रूप से इसी बात पर वहां मौजूद औरतों ने आसिया बीबी पर ईशनिंदा का आरोप लगाया. ये कहा कि उन्होंने पैगम्बर मुहम्मद का अपमान किया है. इसके बाद आसिया के घर पर भीड़ ने हमला किया. आसिया पर ईशनिंदा करने का आरोप लगा जिसकी जांच शुरू हुई. 2010 में आसिया को दोषी करार दे दिया गया और सज़ा-ए-मौत सुनाई गई.
उन्होंने सजा के खिलाफ डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में केस लड़ा. हार गईं. फिर लाहौर हाई कोर्ट में अपील की, कोर्ट ने उनकी अपील खारिज की. उसके बाद सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी शुरू हुई. कोर्ट ने उन्हें दोबारा कभी पाकिस्तान न आने की शर्त पर नवंबर, 2018 में रिहा कर दिया.
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