अनुष्का पारिख. भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी रही हैं. साल 2011 में एशियाई चैंपियनशिप टूर्नामेंट के लिए अंडर-15 लेवल पर ऑल इंडिया डबल्स का टाइटल जीता था. इसके साथ अनुष्का नेशनल-इंटरनेशनल लेवल पर सिंगल्स और मिक्स डबल्स भी खेल चुकी हैं. लेकिन जब उनका करियर सुनहरे दौर पर था तब उन्हें पॉलिसिस्टिक ओवेरियन डिसीज़ (PCOD) की दिक्कत हो गई. PCOD की वजह से उनका वजन बढ़ गया. और उन्हें मेंटल और इमोशनल लेवल पर भी काफी परेशानियां हुई. इन परेशानियों के चलते उनका करियर खत्म हो गया.
PCOD से बढ़े वज़न ने इंटरनैशनल खिलाड़ी का करियर बर्बाद कर दिया
'मैं रोज़ आठ घंटे खेलती थी, मुझे नहीं पता था कैसे वज़न कम करते हैं.'


इंडियन एक्सप्रेस के एक इंटरव्यू में अनुष्का ने एक घटना के बारे में बताया,
"मैं एक दिन अहमदाबाद क्लब कोर्ट में खेलने गई थी. वहां जब मैं पानी पी रही थी तो एक अनजान व्यक्ति मेरे पास आए. मुझे नहीं पता वो कौन थे. मेरे पास आकर उन्होंने मुझसे कहा, 'तुम अनुष्का हो न?' मैंने हां कह दिया. उन्होंने आगे कहा- आपको PBL लीग में देखा था जो अहमदाबाद में हुआ था. उसके बाद अब देख रहा हूं. आपका वजन थोड़ा बढ़ गया है न? अभी खाते-पीते घर के लग रहे हो. उस समय मैं उसे जवाब देना चाहती थी. लेकिन मैं चुप रही. मैं बस पलट गई और मैंने अपने खेल पर फोकस करना शुरू कर दिया. मैं कहना चाहती थी, 'अगर मैं खाते-पीते घर से हूं तो तुम्हारा क्या जाता है?' ये सब इनके लिए क्यों मायने रखता है."

अनुष्का ने बताया कि PCOD ने उन्हें मेंटल और इमोशनल तरीके से कमजोर कर दिया था. उन्हें लगता था ज्यादा कैलोरी बर्नआउट से वजन कम होता है लेकिन ऐसा नहीं हुआ. वो कहती हैं,
“मैं एक भी टूर्नामेंट से वापस आती तो मेरा कैसा मैच हुआ पूछने के बजाय वो कहते ‘अच्छा और कितना वजन बढ़ाना है.’ उनका ध्यान मेरे वजन पर था.”
अनुष्का का मानना था कि उनका वज़न ऐसी चीज़ नहीं है जिसे आप सही कर सकते हो. अनुष्का ने अपने खेल पर फोकस करना शुरू कर दिया. लेकिन लोगों ने उन्हें ऐसा करने नहीं दिया. नतीजा ये हुआ कि उनका फोकस फिर से अपने वज़न पर शिफ्ट हो गया. अनुष्का बताती हैं कि लोग कहते थे उन्हें वर्कआउट करना चाहिए, इससे उनका वज़न कम होगा. लेकिन अनुष्का दिन में आठ घंटे खेल रही थीं, और उन्हें नहीं पता था कि उन्हें अपना वज़न कम करने के लिए और क्या करना है.
अनुष्का एक हाइपरएक्टिव बच्ची थीं. एक साल उनके पेरेंट्स ने एक क्लब में टेनिस खिलवाया, उसके बाद स्विमिंग, फिर स्केटिंग और फिर बैडमिंटन खिलवाया. पहले दिन से ही अनुष्का को बैडमिंटन पसंद था. उन्हें खेल इतना पसंद था कि वो एक भी दिन के लिए गेम को छोड़ती नहीं थी.

अनुष्का ने साल 2011 में एशियाई चैंपियनशिप टूर्नामेंट के लिए अंडर-15 पर ब्रॉन्ज मेडल जीता था. साल 2014 में पीठ की चोट की वजह से उनके सिंगल्स करियर पर असर पड़ा. लेकिन डबल्स में उन्होंने अच्छा प्रदर्शन किया. 2017 में अनुष्का और सौरभ शर्मा ने मिक्स डबल्स खेला. इस जोड़ी ने यूक्रेन इंटरनेशनल के फाइनल में साल 2018 में सामने वाली जोड़ी को हराकर खिताब जीता.
PCOD के बारे में कैसे पता चलाअनुष्का बताती हैं कि पीरियड्स के बारे में उनके घर में कभी बात नहीं होती थी. उनकी मां को पता था लेकिन उन्हें भी इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी. अनुष्का ने कहा,
"सबसे पहले मेरे बाल झड़ने लगे. एक समय ऐसा आ गया आप मेरे बालो की जगह सिर में धब्बे देख सकते थे. चाहे मैं कंघी करू या बाल धो रही हूं. हमेशा बाल झड़ते थे. चेहरे पर दाने होने लगे. शरीर में सूजन आने लगी. मेरे पीरियड्स शुरू होने के कुछ दिन पहले मेरा दो किलो वजन बढ़ जाता था. नींद नहीं आती थी. मुझे पीरियड्स होते थे लेकिन सिर्फ एक दिन ही."
अनुष्का ने कहा कि वो अपने करियर को खराब करने का दोष PCOD को नहीं देंगी, पर उस माहौल को ज़रूर देंगी जो उनके आसपास के लोगों ने बनाया.
अनुष्का का साथी एथलीट्स को संदेशःखुलकर बात करें, और अपनी डाइट का पूरा ध्यान रखे. इसके साथ-
* अपने पीरियड को ट्रैक करें -सिर्फ 5 दिन नहीं हर दिन.! अपनी डेट ट्रैक करें. इसके साथ आप शारीरिक और मानसिक रूप से रोज कैसा महसूस करते हैं. ये भी ध्यान रखें.
* अपने लक्षणों का इलाज करें- पीरियड्स नॉर्मल हैं, लेकिन उनका दर्द नहीं. अपने लक्षणों (PMS) को बेहतर ढंग से समझें और इसके सॉल्यूशन निकाले.
* अपना सपोर्ट सिस्टम ढूंढें और अपने कोच से मदद मांगने में डरे नहीं.














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