डेमोक्रेसी को बचाने का सबसे आसान उपाय यही है कि उसे उठाकर पिंजड़े में बंद कर दो. तानाशाही शासक यही झुनझुना दिखाकर अपनी निरंकुशता को जायज ठहराते रहे हैं. म्यांमार में उसी परंपरा का पालन हुआ है, तख़्तापलट के आठ महीने बाद म्यांमार के हालात और बिगड़े ही हैं. सैन्य सरकार का दमन जारी है. उन्होंने बाहर इतना ख़तरा पैदा कर दिया है कि डेमोक्रेसी को धूप दिखाने की कोई जहमत नहीं उठाई जा रही. म्यांमार में इस समय के हालात क्या हैं? सेना चर्च और पादरियों को निशाना क्यों बना रही है? क्या म्यांमार में सिविल वॉर शुरू होने वाला है? और, तख़्तापलट से ठीक पहले राष्ट्रपति को किसने धमकी दी थी?
दुनियादारी: म्यांमार में तख़्तापलट से पहले राष्ट्रपति को किसने धमकाया था?
यहां सेना चर्च और पादरियों को निशाना क्यों बना रही है?
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