ज़ोमैटो से एक शख्स का खाना कम पहुंचा तो उसने कस्टमर केयर की मदद ली. लेकिन उसे कस्टमर केयर वाले ने भाषा का पाठ पढ़ाना शुरू कर दिया. फिर ट्विटर पर बवाल कट गया.
ऑनलाइन फूड पोर्टल ज़ोमैटो (Zomato) का नाम अब एक बवाल में हैं. बवाल ये कि ज़ोमैटो के ग्राहक सेवा अधिकारी ने एक ग्राहक से कहा कि हिंदी तो सबको आनी चाहिए. अब बस. हिंदी को थोपने की जो पुरातन बहस है, उसमें ज़ोमैटो का नाम आ चुका है. लोगों ने कहा कि तमिलनाडु में ज़ोमैटो की ये मनमानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी. ट्वीट पर ट्विट होने लगे. देखते ही देखते #Reject_zomato ट्रेंड करता दिखा. ज़ोमैटो ने शिकायत का निराकरण भी करने का प्रयास किया. लेकिन ट्रेंड तो ट्रेंड है. चलना ही है. ऐसे में सबसे पहले जानते हैं कि मामला क्या है?
विकास का ट्वीट और फिर शुरू हुआ झाम
ज़ोमैटो पर बवाल एक यूजर विकास के ट्वीट से शुरू हुआ. विकास 18 अक्टूबर की शाम को ट्वीट किया,
"मैंने ज़ोमैटो से खाना ऑर्डर किया और इसमें एक आइटम कम था. कस्टमर केयर कह रहा है कि पैसा इसलिए वापस नहीं किया जा सकता क्योंकि मुझे हिंदी नहीं आती है. ऊपर से ये पाठ भी पढ़ा रहा है कि अगर भारतीय हो तो हिंदी आनी चाहिए. मुझे झूठा कहा जा रहा है क्योंकि वो तमिल नहीं जानता. ये कस्टमर से बात करने का कोई तरीका नहीं है."
इस ट्वीट में यूजर ने अपनी चैट के स्क्रीनशॉट डाले हैं. जिसमें हुई बातचीत से पता चलता है कि जब चैट पर बात करते हुए कस्टमर ने एक सामान कम होने की बात कही तो ग्राहक सेवा अधिकारी द्वारा रेस्टोरेंट से बात करने को कहा गया. इसके बाद सेवा अधिकारी ने बताया कि वो रेस्टोरेंट वाले से खुद बात कर रहा है लेकिन उसे भाषा की वजह से कुछ समझ नहीं आ रहा है. इस पर विकास ने कहा कि जब तमिलनाडु में जोमैटो सर्विस दे रहा है तो उसे तमिल समझने वाले लोग हायर करने चाहिए. इसपर चैट में जोमैटो की तरफ से चैट करने वाला कहता दिख रहा है कि
"आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है. इसलिए सभी को कम से कम थोड़ी हिंदी तो आनी ही चाहिए."
इस जवाब का स्क्रीनशॉट डाल दिया गया ट्विटर पर. बवाल बढ़ गया. ट्वीट तेजी से वायरल होने लगे. खबर लिखे जाने तक इस ट्वीट पर 5 हजार से ज्यादा लाइक्स और 2700 से ज्यादा कमेंट्स हो चुके थे.
ट्विटर पर ट्रेंड हुआ #Reject_zomato लोगों ने ज़ोमैटो कस्टमर केयर एजेंट के इस बर्ताव पर नाराजगी जताई. इसे ज्यादती करार दिया और इस मुगालते से बाहर आने की सलाह भी दी कि भारत की कोई एक राष्ट्रभाषा है. तमिलनाडु के एक यूजर शरण ने लिखा,
"डियर ज़ोमैटो, अपने स्टाफ से कहिए कि अगर उसे यहां अपना बिजनेस चलाना है तो तमिल सीखें. ये बहुत बुरा है कि कस्टमर से कहा जा रहा है कि वो हिंदी सीखे जो कि हमारी राष्ट्रभाषा भी नहीं है. इसके लिए माफी मांगी जाए या भारी मात्रा में ऐप अनइंस्टॉल किए जाने के लिए तैयार रहें."
योगेश ने ट्वीट किया,
"अगर आप तमिलनाडु में बिजनेस कर रहे हैं तो आपको तमिल भाषा जरूर सीखनी चाहिए. अगर ऐसा नहीं कर सकते तो राज्य से बाहर चले जाओ. किस बेवकूफ ने सिखाया है कि हिंदी राष्ट्रभाषा है."
प्रशांत ने ट्वीट किया,
"ज़ोमैटो ये कोई तरीका है कस्टमर से बर्ताव करने का. तुम्हारा सोचना है कि मैं खाना ऑर्डर करने से पहले जाकर क्लास में थोड़ी-सी हिंदी सीखूं. सबसे पहले ये बताओ कि किसने कहा कि हिंदी राष्ट्र भाषा है. "
संजय सनथकुमार ने ट्वीट किया,
"हिंदी थोपने की कोशिश मत करो ज़ोमैटो. तुम नोटिफिकेशन तो स्थानीय भाषा में भेजते हो लेकिन सर्विस के लिए हमें हिंदी सीखनी पड़ेगी?"
ज़ोमैटो का इस पर क्या कहना है? ट्विटर पर इतना बवाल मचा कि जल्दी ही ज़ोमैटो को मामले की नज़ाकत समझ में आ गई. ज़ोमैटो ने 19 अक्टूबर को अपने कस्टमर केयर एजेंट के बर्ताव के लिए माफी मांगी. इसके साथ ही ज़ोमैटो ने मामले पर अपना आधिकारिक स्टेटमेंट भी जारी किया. साथ ही ये अपील भी कर डाली कि कृपया ज़ोमैटो को रिजेक्ट न करें. अपने आधिकारिक स्टेटमेंट में ज़ोमैटो ने लिखा है कि
"वनक्कम तमिलनाडु, हम अपने कस्टमर केयर एजेंट के बर्ताव को लेकर दुखी हैं. हमने उस एजेंट को टर्मिनेट कर दिया है. ये टर्मिनेशन हमारी सेवाशर्तों के अनुरूप है. एजेंट का बर्ताव उन सिद्धांतों और संवेदनशीलता के खिलाफ है जिसकी ट्रेनिंग हम वक्त-वक्त पर अपने एजेंट्स को देते हैं. इस कस्टमर केयर एजेंट का स्टेटमेंट खाना और भाषा को लेकर कंपनी के विचारों को प्रदर्शित नहीं करता है. हम ज़ोमैटो में ऐप का तमिल वर्जन भी बना रहे हैं. हमने मार्केट में पहले से ही लोकल भाषा में बातचीत करना शुरू किया है. इसके लिए हमने ब्रैंड एंबेसडर के तौर पर अनिरुद्ध रविचंद्र को साइन किया है. हम समझते हैं कि खाना और भाषा किसी भी क्षेत्र की संस्कृति की मूल पहचान होती है. हम इन दोनों को ही लेकर बेहद संवेदनशील हैं."
Zomato के फाउंडर भी मैदान में उतरे
ज़ोमैटो की आधिकारिक माफी और कस्टमर केयर एजेंट को टर्मिनेट करने वाले ट्वीट के कुछ घंटे बाद कंपनी के फाउंडर दीपिंदर गोयल ने ट्वीट किया. इसमें उन्होंने इस पूरे बवाल पर ही सवाल उठा दिए. उन्होंने कस्टमर केयर एजेंट के जवाब को एक मासूम भूल बताया. उन्होंने इस घटना को लेकर चार ट्वीट किए. जिनमें लिखा.
"एक फूड डिलीवरी कंपनी के सपोर्ट सेंटर में किसी की एक मासूम गलती एक राष्ट्रीय मुद्दा बन जाता है. हमारे देश में सहनशीलता का स्तर इससे ज्यादा ऊपर होना चाहिए. इसमें किसकी गलती है? इसके साथ ही हम कस्टमर सर्विस एजेंट को बहाल कर रहे हैं. यह ऐसा मामला नहीं है जिसके लिए उसे निकाल दिया जाना चाहिए था. यह कुछ ऐसा है जिसे वो आसानी से सीख सकती है और आगे बेहतर कर सकती है. और याद रखें, हमारे कॉल सेंटर एजेंट युवा लोग हैं, जो अपने करियर की शुरुआत में हैं और सीख रहे हैं. वो भाषाओं और क्षेत्रीय भावनाओं को संवेदशीलता के एक्सपर्टन नहीं हैं. खैर वो तो मैं भी नहीं हूं. इस सबके बावजूद हमें एक दूसरे की कमियों को लेकर ज्यादा सहनशील रहना चाहिए और एक दूसरे की भाषा और क्षेत्रीय भावनाओं की कद्र करनी चाहिए. तमिलनाडु हम आपको प्यार करते हैं, वैसे ही जैसे हम पूरे देश को करते हैं. न ज्यादा, न कम. हम उतने ही एक जैसे हैं जितने एक दूसरे से जुदा हैं."