
रेड क्रास समेत कई अंतरराष्ट्रीय संस्थांए क्रैश की जगह तक पहुंची हैं.
इसके बाद से ही पूरी दुनिया में Boeing 737 MAX 8 के इस्तेमाल पर सवाल उठ रहे हैं. इसकी टेक्नॉलजी पर सवाल उठ रहे हैं. बीते 5 महीने में ये दूसरा मौका था, जब Boeing 737 MAX 8 प्लेन क्रैश हुआ हो. इससे पहले 29 अक्तूबर, 2018 को इंडोनेशिया के लॉयन एयरलाइंस का Boeing 737 MAX प्लेन जावा समुद्र में समा गया था. उस हादसे में 189 लोग मारे गए थे. इथोपिया में हुए इस हादसे के बाद पूरी दुनिया में इसे बैन किया जा रहा है. बैन लगाने वाले देशों में शामिल हैं-

लॉयन एयरलाइंस का प्लेन जावा समुद्र में समा गया था. काफी खोजबीन के बाद भी इसका ब्लैक बॉक्स नहीं मिल पाया था.(सांकेतिक तस्वीर)
न्यू ज़ीलैंड, नीदरलैंड, तुर्की, साउथ कोरिया, नॉर्वे, ऑस्ट्रेलिया, सिंगपुर, इथोपिया समेत पूरे यूरोपियन यूनियन ने इसे बैन कर दिया. भारत भी इस फेहरिस्त में है.
Boeing 737 MAX में असल दिक्कत क्या है
बीते पांच महीने में ये मॉडल दो बार क्रैश हुआ है. कुल 346 लोगों की जान गई है. दोनों प्लेन टेक-ऑफ करने के कुछ ही देर में क्रैश हो गए. इथोपिया में हुए हादसे की वजह अभी तक सामने नहीं आई.
बोइंग 737 MAX असल दिक्कत को हम समझ सकते हैं इसके लेटेस्ट मॉडल 737 NG में लगे एक सिस्टम के ज़रिए. ये सिस्टम है- Manoeuvring Characteristics Augmentation System (MCAS). मुश्किल सा नाम है. लेकिन आप सरल भाषा में इसका काम जान लीजिए. इसका काम है प्लेन की नोज़ यानी सबसे अगले हिस्से को नीचे की ओर झुकाना.

बोइंग दुनिया में यात्री विमान बनाने वाली सबसे बड़ी कंपनी है. लेकिन इस हादसे के बाद बोइंग की टेक्नॉलजी पर सवाल उठ रहे हैं.
दरअसल, प्लेन के सीधा ऊपर की ओर बढ़ने से एक समय ऐसा आ जाता है, जब प्लेन अपनी फ्लाइट यानी एक दिशा में तय एंगल के साथ उड़ान, को खो देता है. और आसमान में थम जाता है. अब आसमान में तो टिका रह नहीं सकता. ग्रैविटी यानी गुरुत्वाकर्षण भी कोई चीज़ है. इसलिए हवा में मौजूद किसी दूसरी चीज की तरह ही ये भी जमीन पर आ गिरता है. MCAS सिस्टम का काम है कि जब भी प्लेन तय एंगल से ज्यादा एंगल से उड़े तो उसकी नोज़ यानी अगले हिस्से को नीचे की ओर झुका दे. ताकि प्लेन अपनी फ्लाइट ना खोए और धड़ाम से ना गिरे.
जैसे कि पहले बताया, इथोपिया वाले हादसे के कारणों की अभी जांच चल रही है. लेकिन लॉयन एयरलाइंस वाले हादसे से पहले क्या हुआ था ये आपको बता देते हैं.

प्लेन एक फार्म हाउस के पास क्रैश हुआ था. आस-पास रहने वाले लोगों ने कहा कि ऐसी डरावनी आवाज़ पहली बार सुनी थी.
लॉयन एयरलाइंस में जो प्लेन क्रैश हुआ था, उससे एक पहले ऐसे ही प्लेन ने उड़ान भरी थी. उसमें फ्लाइट का एंगल मापने वाले सेंसर में दिक्कत थी. इसकी वजह से MCAS के पास गलत जानकारी जाती थी. MCAS को लगा कि प्लेन हवा में थमने वाला है. इसलिए MCMS नोज़ को झुकाने लगा.
इंडोनेशिया में इस हादसे के जांचकर्ताओं ने रिपोर्ट में कहा था कि क्रैश होने वाली फ्लाइट पहले उड़ी 4 फ्लाइट्स में भी दिक्कतें थीं. उनमें हवा में स्पीड और एंगल को लेकर कुछ दिक्कतें हो रही थीं. 4 बार तो पायलट ने संभाल लिया लेकिन पांचवीं बार बात पायलट के बस से बाहर हो गई. इससे अंदाजा होता है कि लॉयन एयरलाइंस क्रैश में किस तरह प्लेन के अंदरूनी सिस्टम की खामी थी.

इथोपिया के हादसे के बाद पूरी दुनिया चौकन्नी है. बोइंग पर टेक्नॉलजी सुधारने का दवाब बढ़ रहा है.
इथोपियन एयरलाइंस का क्रैश हुआ प्लेन ज्यादा पुराना नहीं था. अबतक सिर्फ 1400 घंटे ही उड़ा था. इथोपियन एयरलाइंस का सेफ्टी के मामले में रेकॉर्ड अच्छा माना जाता है.इथोपिया में ये हादसा बोइंग प्लेन में तकनीकी खामी के चलते हुआ या एयरस्टाफ की गलती के चलते, ये तो जांच में पता चलेगा. लेकिन कम से कम ये घटना भारत में रोकने के लिए DGCA ने कदम उठाए हैं.

उम्मीद है ये हादसा आखिरी हो.
इस समय भारत में स्पाइस जेट के पास 12 और जेट एयरवेज़ के पास 5 Boeing737 Max प्लेन हैं. DGCA ने बोइंग समेत इन दोनों एयरलाइंस को साफ निर्देश दिए हैं कि जब तक इसकी खामियां दुरूस्त नहीं की जातीं, ये भारतीय एयरस्पेस में नहीं उडे़ंगे.
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