महेंद्र सिंह धोनी. जब वर्ल्ड कप फाइनल में सचिन और सहवाग आउट हो गए थे तो इसने पूरी ज़िम्मेदारी अपने कन्धों पर ले ली और जीत का छक्का अपने ही बल्ले से दागा. उस दिन पूरा देश जश्न में डूबा था. साल था 2011. 6 साल बाद इंग्लैंड में चैम्पियंस ट्रॉफी फाइनल हम हार गए. टीम बुरी तरह ढह गई. इसके बाद आया वेस्ट इंडीज़ टूर. पहला मैच बारिश में धुल गया. दूसरा और तीसरा मैच इंडिया ने जीता. लेकिन चौथा मैच इंडिया हार गया. जीता हुआ मैच हार गया. और इसकी ज़िम्मेदारी आई धोनी के सर पर. कुछ वक़्त पहले उन्हें कप्तान धोनी कहा जाता था. अब वो सिर्फ धोनी बन गए हैं. लेकिन उनका ओहदा अब भी वही है. उनसे आशाएं अब भी वही हैं. धोनी जब क्रीज़ पर आए तो टीम के 47 रन बन चुके थे. इंडिया को जीतने के लिए 224 गेंदों में 143 रन चाहिए थे. 81 गेंद एक्स्ट्रा थीं. धोनी ने कुल 114 गेंदें खेलीं. 54 रन बनाए. इंडिया 11 रनों से मैच हार गया. धोनी अपनी पुरानी टेक्नीक से मैच खेल रहे थे. वो आसान मैच को रोमांचक स्थिति में लाकर जिताने का प्लान बनाकर उतरे थे. लेकिन लकड़ी उल्टी पड़ गई. 7 गेंद में 14 रन चाहिए थे. तब धोनी को जोश आया. छक्का मारने की चाहत ले डूबी. कैच आउट हो गए. अगले 2 बैट्समैन 3 रन ही बना पाए. मैच खत्म हुआ तो कप्तान विराट कोहली सामने वाली टीम से हाथ मिला रहे थे. सभी लोग अपनी जगह से उठ खड़े हुए थे. लेकिन धोनी एक कोने में मैदान की ओर एकटक देख रहे थे. उनके चेहरे पर कोई भाव नहीं था. ऐसा अक्सर उनके साथ होता है. लेकिन फिर भी सारी कहानी सामने थी. मालूम था कि वो क्या सोच रहे थे. मालूम था कि उनके मन में क्या चल रहा था. मालूम था कि वो कितने निराश होंगे. वीडियो देखिये
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