यूपी में अलग-अलग धर्म के लड़के लड़कियों की शादी के बाद मिली शिकायतों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर. )
यूपी में जबरन धर्म परिवर्तन के खिलाफ कानून बन चुका है. पांच मामले दर्ज भी हो चुके हैं. इस कानून पर सवाल भी उठे रहे हैं. इस बीच यूपी में दो ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें अलग-अलग धर्म के लड़के-लड़कियों ने परिवार के खिलाफ जाकर शादी करने का दावा किया. लेकिन पुलिस ने एक मामले में लड़के को गिरफ्तार कर लिया, जबकि दूसरे मामले में नहीं किया. दी लल्लनटॉप ने इन मामलों की गहराई तक जाने की कोशिश की, देखिए ये रिपोर्ट. पहला मामला बरेली (Bareilly) का है. यहां के प्रेम नगर थाने में शनिवार 6 दिसंबर को शाहिद मियां नाम के शख्स ने एक FIR लिखाई. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, शाहिद ने आरोप लगाया कि उनकी 22 साल की बेटी अलीशा को तीन लोगों ने अगवा कर लिया है. अलीशा जिस कंपनी में काम करती थी, उसके मालिक मनोज सक्सेना, साथ काम करने वाली चंचल और उसके भाई सिद्धार्थ सक्सेना उर्फ अमन को रिपोर्ट में नामजद किया गया. FIR में लड़की ने पिता ने दावा किया कि एक दिसंबर को उनकी बेटी ऑफिस गई थी, लेकिन वापस नहीं लौटी. उन्होंने अलीशा के ऑफिस जाकर मालिक से पूछताछ की, लेकिन उन्होंने कोई जानकारी होने से इंकार कर दिया. शाहिद का आरोप है कि अमन उनकी बेटी पर शादी का दबाव डाल रहा था. मनोज और चंचल भी अलीशा पर अमन से शादी करने का प्रेशर बना रहे थे. SHO अवनीश कुमार ने बताया कि इस मामले में केस दर्ज किया गया था, लेकिन अलीशा ने बताया कि वे दोनों बालिग हैं. उन्होंने अपहरण की बात से भी इंकार किया. कहा कि वह अमन के साथ अपनी मर्जी से गई थी. 29 सितंबर को उन्होंने आर्य समाज मंदिर में शादी कर ली थी. वह अपने साथ शादी के कागज भी लाई थी. खबर के बारे में जानकारी के लिए 'द लल्लनटॉप' ने बरेली के एसपी सिटी रविंद्र कुमार को फोन किया. उन्होंने बताया,
"ये मामला प्रेमनगर का है. ये कहना गलत है कि पुलिस ने एकतरफा कार्रवाई की. हमने FIR दर्ज की. लड़का-लड़की को तलाश किया. लड़की को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया. लड़की ने लड़के के पक्ष में गवाही दी. 164 के बयानों में लड़की ने कहा कि मैंने शादी की है और मैं लड़के के साथ रहना चाहती हूं. हमने लड़की के बयान का अवलोकन किया. कोर्ट के आदेश पर लड़की को पति के साथ भेज दिया गया. इस पूरे मामले में कन्वर्जन जैसा कहीं कुछ नहीं है."
सोमवार 7 दिसंबर को मजिस्ट्रेट के सामने अलीशा के बयान दर्ज हुए. पुलिस का कहना है कि नए कानून के तहत अमन पर मामला नहीं दर्ज किया गया, क्योंकि लड़की के पिता ने अपनी शिकायत में धर्म परिवर्तन की बात नहीं कही थी. वहीं लड़की के पिता शाहिद मियां ने कहा,
"बिना धर्म बदले मंदिर में शादी कैसे हो सकती है? मैंने पुलिस से कहा था कि नए कानून के तहत मामला दर्ज करें, और शादी के हालातों पर गौर करें, लेकिन वो लोग सुनने को तैयार ही नहीं."
बरेली के सीओ दिलीप सिंह ने इस बारे में कहा,
"ये शादी सितंबर में हुई थी. तब तक एंटी कन्वर्जन लॉ का कोई प्रावधान नहीं था. लड़की ने जो दस्तावेज दिखाए हैं, उनसे साबित होता है कि शादी सितंबर में हो गई थी."
मुरादाबाद का मामला अब बात करते हैं मुरादाबाद (Moradabad) के मामले की, जिसमें 22 साल के राशिद अली को पुलिस ने उस वक्त गिरफ्तार कर लिया, जब वो 22 साल की पिंकी के साथ अपनी शादी रजिस्टर्ड कराने जा रहा था. राशिद के भाई सलीम अली को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया, जो उसके साथ था. पिंकी का परिवार बिजनौर का रहने वाला है. पुलिस को दी गई शिकायत में परिवार ने राशिद पर शादी के जरिए जबरन धर्म परिवर्तन के आरोप लगाए हैं. हालांकि मीडिया से बात करते हुए पिंकी ने कहा,
"राशिद के साथ 24 जुलाई को मेरी शादी हुई थी. हम लोग तभी से कांठ (मुरादाबाद का एक इलाका) में रह रहे थे. मैं बालिग हूं. मैंने अपनी मर्जी से राशिद के साथ शादी की है."
कांठ इलाके के सीओ बलराम ने कहा,
"लड़की की मां का आरोप है कि राशिद ने लड़की को धोखे से बहलाया फुसलाया और शादी करके धर्म परिवर्तन करा रहा था."
अपनी शिकायत में पिंकी की मां बाला देवी ने कहा,
"मेरी बेटी से शादी करने के लिए राशिद उसे कांठ ले आया. यहां हमने उसका पीछा किया तो हमें पता चला कि वो मुस्लिम है. उसने अपनी पहचान छुपाई थी. वो मेरी बेटी से शादी कर रहा था, और उसे बुर्का पहनाया गया था."
सीओ ने कहा कि दोनों की शादी कब हुई थी, इसके बारे में जांच से पता चलेगा क्योंकि लड़की ने शादी के कोई दस्तावेज नहीं दिखाए हैं. अभी मजिस्ट्रेट के सामने उसके बयान रिकॉर्ड कराए जाएंगे. इस बीच राशिद और सलीम को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. बरेली जोन के ADG अविनाश चंद्रा ने कहा कि मुरादाबाद पुलिस ने किन हालातों में आरोपियों को गिरफ्तार किया, इस बारे में जानकारी करनी पड़ेगी.
क्या पुलिस पर कोई दबाव है? कांग्रेस के प्रवक्ता अंशु अवस्थी ने आरोप लगाया कि पुलिस सरकार के दबाव में काम करती है, कर रही है. ये जो नया कानून है, ये राजनैतिक मंशा से लाया गया था. पहले से ही IPC में इन चीजों के लिए प्रावधान थे. चार धाराएं पहले से थीं लेकिन फिर भी अलग से कानून को लाया गया है. बीजेपी के प्रवक्ता चंद्रमोहन ने पुलिस पर दबाव के आरोपों पर कहा कि पुलिस अपना काम करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है. कानून सभी के लिए बराबर है. सरकार पुलिस के किसी काम में हस्तक्षेप नहीं करती है. ये महिला सम्मान का मामला है. जो लोग कानून में कमी तलाश कर रहे हैं, कमी उनकी नीयत में है. यूपी के एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) प्रशांत कुमार ने कहा कि कानून लोगों के बीच किसी तरह का फर्क नहीं करता. दोनों ही केस में परिस्थितियां भिन्न रही होंगी. सरकार की मंशा केवल जबरन धर्म परिवर्तन को रोकने की है. अगर कोई बालिग है, अपनी मर्जी से कुछ करना चाहता है तो वो स्वतंत्र है. पुलिस का काम तथ्यों के आधार पर जांच करना है, वो पुलिस करेगी. पुलिस लोगों के बीच फर्क नहीं करती.