सुभाष चंद्र बोस.
वर्ल्ड वॉर-2 के दौरान आज़ाद हिंद फौज की स्थापना करने वाले
सुभाष चंद्र बोस की जिंदगी और मौत को लेकर जितनी किवदंतियां हैं, उतनी किसी भी राजनीतिक हस्ती को लेकर भारत में नहीं है. कहा ये जाता है कि 18 अगस्त 1945 को एक विमान दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई थी. 70 साल हो चुके हैं और अभी तक इस रहस्य से पर्दा नहीं हटा है. यहां तक कि इस मामले से जुड़े गोपनीय दस्तावेज भी इतने वर्षों बाद जनवरी 2016 में सामने लाए गए.
लेकिन इन दस्तावेजों पर भी इतनी चर्चा नहीं हुई कि कुछ नई बातें सामने आ सके. अब एक फिल्म आई है जो इस मामले में रौशनी डालने का दावा करती है. डिस्कवरी चैनल ने इसे बनवाया है. फिल्म का नाम है सुभाष चंद्र बोस: द मिस्ट्री. एक घंटे की इस फिल्म का प्रसारण 18 जुलाई को रात 9 बजे होगा.
इस खोजी फिल्म में ये पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि असल में बोस को हुआ क्या था? इसका जवाब बहुत सारे जटिल किरदारों, देशों और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से होकर गुजरता है. क्या वाकई में ताइवान के ताइपेई में उनका प्लेन क्रैश हुआ था? या फिर वे भारत लौटे थे और कुछ वर्षों तक भिक्षु बनकर रहे थे? भारत सरकार ने उनकी फाइलें उनकी कथित मृत्यु के बाद भी इतने दशक क्यों गोपनीय रखीं?

ब्रिटिश आर्मी की रॉयल सिग्नल्स रेजीमेंट के पूर्व ऑफिसर नील मिलर को इसमें ये काम सौंपा गया है कि वे
अनोनिमस नाम के इंटरनेट ग्रुप द्वारा दी गई फोटो और वीडियो का विश्लेषण करे. ये फुटेज ताशकेंट मैन नाम के एक व्यक्ति के बारे में है जो 10 जनवरी 1966 को भारत-पाक ताशकंद घोषणा के दौरान मौजूद था. ऐसा अनुमान है कि ये व्यक्ति नेताजी बोस हो सकता है. इस फिल्म में यह सवाल भी उठाया गया है कि यदि 1966 में नेताजी जीवित थे तो वे 21 साल पहले विमान दुर्घटना में कैसे मारे जा सकते थे?