सेंट्रल क्राइम ब्रांच ने 5 नवंबर को एक व्यक्ति को गिरफ़्तार किया था, जिस पर एक फ़ेक बैंक (Fake Bank) चलाने के आरोप हैं. गिरफ़्तारी हुई 5 नवंबर को, जानकारी सामने आई 8 नवंबर को. बैंक नक़ली था, लेकिन ताम-झाम पूरा रखा. नक़ली बैंक डॉक्यूमेंट्स, डेबिट कार्ड्स, फ़ॉर्म्स. सब कुछ नक़ली बनवाया था.
ये आदमी एक साल से चला रहा था नकली बैंक, UK से MBA करके आया था!
पुलिस ने आरोपी के पास से लाखों रुपये बरामद किए हैं.
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इंडियन एक्स्प्रेस में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक़, आरोपी का नाम चंद्रबोस है. उम्र, 44 साल. UK से MBA की पढ़ाई कर के आया है. मामले में RBI के अफ़सर की शिकायत के बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू की. पुलिस को मालूम हुआ कि आरोपी कथित तौर पर तमिलनाडु में नौ जगहों पर एक नक़ली बैंक चला रहा था. ग्रामीण और कृषि किसान सहकारी बैंक (RAFC) नाम से. आरोपी ने बहुत लोगों से 2 लाख से 7 लाख रुपयों तक की अवैध डिपॉज़िट लिया था.
चंद्रबोस ने इससे पहले एक वित्तीय फ़र्म में काम किया था और उसी तजुर्बे का इस्तेमाल करते हुए पहले अपने 'बैंक' को कॉपरेटिव सोसाइटी के तौर पर रजिस्टर करवाया, फिर बैंक शुरू कर दिया. बहुत सारे लोग नौकरी पर रखे. राज्य भर में 2,000 सदस्यों को नामांकित करवाया और सदस्यता शुल्क के नाम पर सब से 700 रुपये लिए. ग्राहकों को ICICI बैंक के बने हुए कार्ड RAFC बैंक के नाम से देता था और सदस्यों के KYC दस्तावेज़ ICICI बैंक में जमा करके उन्हें एक्टिवेट करवा लेता था. फ़िक्स्ड डिपॉज़िट और लोन भी देता था. और, RBI की ब्याज दर से ज़्यादा दर पर लोन देता था. पिछले एक साल से ये घोटाला चल रहा था.
रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने अंबत्तूर में स्थित नक़ली बैंक के हेड ऑफ़िस की तलाशी ली और कई दस्तावेज़ और एक लग्जरी कार ज़ब्त की. आरोपी चंद्रबोस को 5 नवंबर को ही गिरफ़्तार कर लिया गया था और बाद में न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. आरोपी 18 नवंबर तक न्यायिक हिरासत में रहेगा. पुलिस ने जानकारी दी है कि आरोपी के पास से 56.6 लाख रुपये बरामद किए गए हैं. चेन्नई शहर के पुलिस आयुक्त शंकर जीवाल ने जनता से सतर्क रहने और पुलिस की मदद लेने और किसी भी नकली नेटवर्क के शिकार न होने की अपील की है.
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