
इसके बाद खुद तबस्सुम ने इस खबर को सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने सफाई देते हुए कहा-
“हम तो सब धर्मों का सम्मान करते हैं, हमारा ऐसा कुछ अलग नहीं है. हमेशा जो है हम ये चाहते हैं कि भाई सब इंसानियत में रहे हर इंसान एक-दूसरे से प्यार मोहब्बत से रहे. इन लोगों को जब कोई रास्ता नहीं मिला तो ये फेक मेसेज चला-चला के 2019 के लिए रास्ता बनाना चाहते हैं. आपको कहीं से पता चले अगर जिसने यह सब किया है तो मुझे भी जरूर इन्फॉर्म करियेगा. हम ऐसे लोग नहीं है ना हमने ऐसा कुछ कहा है कभी. अल्लाह और राम में फर्क ही क्या है, मानने वालों की बात है आस्था की बात है. जो मानता है दिल से मानता है. दिल से मानने की बात है.''इसके बाद तबस्सुम ने अपने लेटर पैड पर शामली के एसपी के नाम पत्र लिखकर पूरी बात बताई और कार्रवाई करने के लिए कहा. एसपी शामली ने भी इस पत्र को कार्रवाई के लिए आगे बढ़ा दिया. इस पत्र को देखिए.

लाल घेरे में लिखा है कि तबस्सुम संसदीय समिति की सदस्य हैं.
लेकिन लोगों को तो तबस्सुम के खिलाफ कुछ चाहिए ही था. वो लोग खोज लाए. पहले तो लोग ये कहने लगे कि अभी तो तबस्सुम ने बस चुनाव ही जीता है. शपथ भी नहीं ली है फिर उन्हें लेटर हेड छपवाने की क्या जल्दी थी. लोगों ने ये भी सवाल करने शुरू कर दिए कि अभी तो वो संसद पहुंची भी नहीं हैं और सरकार ने उन्हें दो-दो समितियों का सदस्य भी बना दिया है. ये सवाल जायज भी था, क्योंकि उनके लेटर हेड पर स्थायी समिति (पर्यटन एवं संस्कृति मंत्रालय) भारत सरकार और सलाहकार समिति सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय लिखा हुआ था.
हे भगवान...! हारने पर झूठ फैलाना शर्मनाक है। भाजपा समर्थकों को ऐसे झूठ से बचना चाहिए था..... ! थैंक गॉड... मैंने ये...
Posted by Ravi Rawat
on Sunday, 3 June 2018

ये तबस्सुम हसन की प्रोफाइल का पहला पेज है.

लाल घेरे में तबस्सुम हसन की समितियों का जिक्र है, जिसकी वो सदस्य रह चुकी हैं.
हां, इस लेटर हेड में इतना ज़रूर है कि ये लेटर हेड पुराना है. तब का, जब तबस्सुम सांसद हुआ करती थीं. अभी उनके पास नया लेटर हेड नहीं है. लेकिन उन्हें शिकायत करनी ही थी, इसलिए उन्होंने पुराने लेटर हेड पर शिकायत दर्ज करवा दी. बात सिर्फ इतनी सी ही है.
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