अब ख़बर है कि शिवसेना नेता अब्दुल सत्तार ने उद्धव कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया है. हालांकि उन्होंने अभी इस्तीफा सीएम को नहीं भेजा है. कहा जा रहा है कि राज्य मंत्री बनाए जाने से सत्तार खुश नहीं थे. वो कैबिनेट मंत्री बनने की उम्मीद पाले थे. इसके बाद मान-मनौव्वल की कोशिशें भी शुरू हो गई हैं लेकिन सत्तार फिलहाल 'अडिग' बताए जा रहे हैं. वैसे इसे 'प्रेशर पॉलिटिक्स' भी कहा जाता है. उद्धव ठाकरे ने 28 नवंबर, 2019 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी. 30 दिसंबर को उन्होंने कैबिनेट विस्तार किया था लेकिन पोर्टफोलियो अभी नहीं बंटे हैं. यानी सरकार को ठीक से चलते हुए अभी दो महीने भी नहीं हुए हैं और ये इस्तीफा हो गया है. लोग पूछने भी लगे हैं कि ये 'खिचड़ी सरकार' कब तक चलेगी?
# कांग्रेस छोड़कर शिवसेना में आए थे अब्दुल सत्तार
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले सत्तार शिवसेना में आए थे. कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव के दौरान सत्तार को ‘पार्टी विरोधी गतिविधियों’ में शामिल होने के आरोप में बाहर का रास्ता दिखा दिया था. कांग्रेस ने जालना और औरंगाबाद में जिन लोगों को लोकसभा चुनाव का उम्मीदवार बनाया था, उनसे सत्तार नाखुश थे. उन्होंने औरंगाबाद लोकसभा सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार हर्षवर्धन जाधव को अपना समर्थन दे दिया था. इसके बाद सिल्लोड सीट से विधायक और पूर्व मंत्री अब्दुल सत्तार को कांग्रेस ने निकाल दिया था. वो औरंगाबाद की सिल्लोड सीट से ही विधायक हैं.

अब्दुल सत्तार जिला परिषद चुनाव को लेकर भी नाराज़ बताए जा रहे हैं. फोटो: India Today
# नाराजगी की और भी वजहें हैं
मराठवाड़ा में औरंगाबाद की राजनीति में अब्दुल सत्तार की पकड़ है. इन दिनों महाराष्ट्र में जिला परिषद के चुनाव हो रहे हैं और जिला परिषद अध्यक्ष पद पर अब्दुल सत्तार अपने उम्मीदवार को जिताना चाहते हैं. हालांकि शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस में सहमति बनी है कि जिला परिषद अध्यक्ष का पद कांग्रेस को दिया जाए. सत्तार इस फैसले से भी नाराज बताए जा रहे हैं.
# पोर्टफोलियो बंटवारे पर नहीं बन रही बात
उद्धव ठाकरे सरकार ने पांच दिन पहले 30 दिसंबर को कैबिनेट विस्तार किया था. 36 नए मंत्रियों ने हाल ही में शपथ ली थी. इसमें एक उपमुख्यमंत्री, 25 कैबिनेट औक 10 राज्य मंत्री शामिल हैं. अजित पवार उपमुख्यमंत्री बने. बाल ठाकरे के पोते और उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे भी मंत्री बन गए. इनमें बहुत सारे लोग राजनीतिक परिवारों के रिश्तेदार भी हैं. हालांकि अभी पोर्टफोलियो के बंटवारे पर तीनों पार्टियों में आम सहमति नहीं बन पाई है. एनसीपी और शिवसेना अपने कोटे से एक भी मंत्री पद कांग्रेस से अदला-बदली करने को तैयार नहीं हैं. हालांकि एनसीपी नेता नवाब मलिक ने कहा है कि सोमवार तक पोर्टफोलियो बंट जाएंगे.
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