दिल्ली जल बोर्ड को मंदिर 4.5 करोड़ रुपये देगा, जिससे सीवर प्रोजेक्ट को पूरा किया जाना है. कोर्ट ने साफ़ किया कि ये प्राइवेट प्रॉपर्टी है. इसलिए बोर्ड सीवर लाइन नहीं डलवा सकता. मंदिर के अंदर और बाहर सीवर लाइन नहीं है. बरसात में पानी भर जाता है, जिससे गंदगी रहती है. भारद्वाज फैमिली मंदिर की देखरेख करती है.सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला काबिले तारीफ है, क्योंकि हमारे धार्मिक प्लेस के पास पैसा तो होता है, लेकिन उसका इस तरह इस्तेमाल नहीं होता. मंदिर के पैसे से सीवर लाइन डाली जाएगी और गंदगी दूर होगी. क्यों न ऐसे कदम और उठाए जाएं. दरगाहों मंदिरों के पैसे का इस्तेमाल लोगों के फायदे के लिए किया जाए. पिछले साल भी अक्टूबर में कोर्ट ने मंदिर की सफाई के लिए 28 लोगों की टीम बनाई थी. सात-सात लोगों की कमेटियां बनायीं गईं थीं जो बारी-बारी से कालकाजी मंदिर की सफाई करतीं. कोर्ट ने कहा था ये लोग सफाई के दौरान किसी अधिकार का दावा नहीं करेंगे, बल्कि अपनी मर्जी से काम करेंगे. न ही सैलरी की उम्मीद करेंगे. माना जाता है कि कालकाजी मंदिर तीन हजार साल पुराना है. इसको पांडवों ने काली मां की पूजा के लिए बनाया था.
कालकाजी मंदिर के पैसे से अब खोदे जाएंगे गटर
सीवर लाइन न होने से कालकाजी मंदिर में दिक्कत होती है. बरसात में पानी भर जाता है. इसके लिए मंदिर को 4.5 करोड़ रुपये तीन साल में देने होंगे.
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कालकाजी मंदिर नेहरू प्लेस मार्केट से कुछ ही दूरी पर है. मंदिर में सीवर की प्रॉब्लम है. सुप्रीम कोर्ट ने इस परेशानी से निपटने को मंदिर के पैसे का इस्तेमाल करने को कहा है. जस्टिस दीपक मिश्र की बेंच ने हर महीने 13 लाख रुपये दिल्ली जल बोर्ड को तीन साल तक देने के लिए कहा है. मंदिर की देखभाल करने वाली कमेटी को पैसों का इंतजाम करना होगा.
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