वे अपनी अगली फिल्म में एक बूढ़े, अंधे गांववाले का रोल कर रहे हैं. फिल्म का नाम है 'कड़वी हवा'.ये बुंदेलखंड के एक गांव में स्थित कहानी है. यहां 15 साल से बारिश नहीं हुई है. यहीं हेडू रहता है. अंधा बुजुर्ग. उसका बेटा है जो किसान है. उसने बैंक से लोन ले रखा है लेकिन चुका नहीं सकता. हेडू को डर है कि बाकी किसानों की तरह उसका बेटा भी जान न दे दे. कहानी में गुनू बाबू भी है. वो एक जवान लोन रिकवरी एजेंट है. उड़ीसा के तटीय इलाके का रहने वाला है. यहां लोन रिकवर करने आया है ताकि अपने परिवार को उस इलाके से निकाल सके जहां विनाशकारी समुद्री तूफान आने के खतरे बढ़ गए हैं. अपनी-अपनी जर्नी में हेडू और गुनू के बीच विशेष रिश्ता बन जाता है.
ये दोनों बिलकुल अलग जमीनी इलाकों से आते हैं. खास बात ये कि इन दोनों ही इलाके ग्लोबल वॉर्मिंग के लिए जिम्मेदार नहीं है लेकिन बुरे नतीजे इन्हें भी भुगतने पड़ रहे हैं. फिर संजय का किरदार ग्लोबल वॉर्मिंग के खिलाफ कुछ ऐसा हीरोइक काम करता है जिसकी किसी को उम्मीद नहीं होती.
डायरेक्टर नील माधव पांडा की पहली फीचर फिल्म 'आई एम कलाम' (2011) थी. लेकिन उससे पहले कई वर्षों से वे डॉक्यूमेंट्री फिल्ममेकर रहे थे. 2005 में आई उनकी पहली डॉक्यूमेंट्री ग्लोबल वॉर्मिंग के बुरे परिणामों पर ही आधारित थी. आज जब ये समस्या और भयावह होती जा रही है तो उन्होंने फिर से ये विषय अपनी अगली फिल्म के लिए चुना. वे चंबल घाटी में इस फिल्म की शूटिंग कर चुके हैं. अब इसका पोस्ट प्रोडक्शन चल रहा है. 2017 के शुरू में इसे रिलीज किया जा सकता है.
इस फिल्म के लिए एक बड़ा उत्साह ये भी है कि इसे डिजिटल फॉर्मेट पर नहीं बल्कि कोडेक की सुपर 16एमएम रील पर शूट किया गया है जो आजकल के लिहाज से बहुत दुर्लभ बात है. इस फुटेज से बनने वाले विजुअल बहुत क्लासिक और फाइन क्वालिटी के होते हैं.
अंधे हेडू के रोल में संजय तो हैं ही, साथ ही लोन रिकवरी एजेंट बने हैं रणवीर शौरी जिनका फिल्म में होना बड़ा बोनस है. उन्होंने पिछले साल 'तितली' में अपने काम से चौंकाया था. इस फिल्म में उनके लुक से फिर ऐसा ही आभास हो रहा है. 'कड़वी हवा' में तिलोत्तमा शोम भी हैं जो अनूप सिंह की बेहद प्रशंसित फिल्म 'किस्सा' में इरफान खान के साथ लीड रोल में थीं.'

शूटिंग के दौरान रणवीर शौरी, डायरेक्टर नील माधव पांडा और संजय मिश्रा.
डायरेक्टर पांडा ने संजय मिश्रा के किरदार के बारे में कहा है कि कुछ मिनटों के बाद आप इस हास्य भरे बूढ़े आदमी की अक्षमता को भूल जाएंगे जो अपनी भैंस के साथ चलता है जो उसे मार्ग दिखाती है. वो अपनी दो पोतियों के साथ हंसी-मजाक भरी बातें करता दिखता है. वो भौगोलिक चुनौतियों को बदलना चाहता है. वो उन सब पिताओं का प्रतिनिधित्व करता है जो इस डर में जीते हैं कि उनका किसान बेटा कहीं सुसाइड न कर ले. लेकिन वो climate change से टक्कर लेता है और सुपरहीरो साबित होता है.















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