इन दो मंजिलों पर मोटे परदे लगे थे. ताकि बाहर से कुछ अंदर दिख न सके. नीचे वाले फ्लोर पर एसी लगा था. मशीने लगी थीं. 6 हाइड्रोलिक मशीनें. ऊपर वाली मंजिल में किचन था. जिसमें मजदूर लोग वहीं पर खाना बनाकर खाते थे. पिछले 6 महीने से 24 घंटे नकली सिक्के बनाने का काम चल रहा था. ये सिर्फ एक फैक्ट्री का हाल है. अक्टूबर से अब तक पुलिस ने हरियाणा और दिल्ली की तीन फैक्ट्रियों में छापा मारा. 12.24 लाख रुपए के नकली सिक्के बरामद किए.
स्विफ्ट डिजायर की डिक्की से रिकवरी शुरू हुई
अक्टूबर महीने में एक छोटी सी खबर सबने पढ़ी होगी अखबारों और वेबसाइट्स पर. भले निगाह गड़ाकर ध्यान न दिया हो और भूल गए हों. चलो फिर याद दिला देते हैं. दिल्ली के रोहिणी में एक स्विफ्ट डिजायर में पुलिस को खजाना मिला था. प्लास्टिक की दो बोरियों में 40 हजार रुपए. बोरियों में 20 पैकेट थे. हर पैकेट में 10 रुपए के 100 सिक्के थे. इस गाड़ी को चला रहा था 42 साल का नरेश कुमार. शाहाबाद एरिया से आ रहा था. पुलिस ने धर लिया.
ये रहे फैक्ट्री के मालिक
नरेश को पुलिस ने हौंका तो उसने सारी कच्ची पक्की कहानी उगल दी. बताया कि इस पूरे रैकेट को दो लोग चला रहे हैं. स्वीकार लूथरा. उर्फ सोनू. और उपकार लूथरा उर्फ राज. डीसीपी एमके तिवारी बताते हैं कि इनके अलावा एक और नाम बताया नरेश ने. राजेश कुमार. ये इस फैक्ट्री का मैनेजर है. राजेश को तो अरेस्ट कर लिया गया. लेकिन लूथरा बंधु अंतर्ध्यान हो रखे हैं अभी. पुलिस उनको पूरा जोर लगाकर खोज रही है.सिक्के ढालने का काम किसका और कर रहा कौन
सिक्के इश्यू करना रिजर्व बैंक का काम है. सरकार ने सिक्के ढालने वाली यूनिट चार शहरों में लगा रखी हैं. मुंबई, कोलकाता, नोएडा और हैदराबाद. रिजर्व बैंक की सिरदर्दी अपने सिर लेने वाले लूथरा ब्रदर्स जाहिर है अच्छा माल कूट रहे थे. उसीके लिए सारा खेला रचाया. अब सुनो हैरान करने वाली बात. पुलिस ने इन फैक्ट्रियों से पांच पैकेट डाई बरामद की पांच के सिक्कों की. 12 पैकेट डाई 10 के सिक्कों की. जांच की तो पता चला कि सेम टू सेम यही डाई रिजर्व बैंक भी यूज करता है सिक्के बनाने के लिए. फोरेंसिक लाइब्रेरी भेजकर अब ये पता लगाया जा रहा है कि डाई इनके हाथ कैसे लगी, या किसने पहुंचाई.
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यहां से आता था कच्चा माल, ऐसे चलती थी टकसाल
बवाना इंडस्ट्रियल एरिया के मेन रोड पर है ये 100 स्क्वायर फिट का मकान. जिसमें फैक्ट्री चल रही थी. 11 महीने पहले मकान मालिक को 3 लाख रुपए एडवांस देकर किराए पर लिया था. 19 हजार पर मंथ में. शुरुआत की टेफलॉन कोटिंग के धंधे से. लेकिन 5 महीने में औकात में आ गए. धंधा नकली सिक्कों पर शिफ्ट हो गया. हाइड्रोलिक मशीनें मायापुरी से खरीदी गईं थीं. 2 प्रेशर मशीनें. वहीं से कच्चा माल उठाया जाता था.मजदूरों को बता रखा था "हम RBI से हैं"
अब सुनो कित्ते लोगों को रोजगार मिल रखा था. बिहार के मधुबनी जिले से 13 मजदूर आए थे. बता रहे हैं कि हमको 6 महीने से जबरदस्ती इस काम में लगा रखा है. 20 साल का राजीव कुमार लक्ष्मीपुर गांव का है. पुलिस को बताया कि दिल्ली आने के बाद वो रोज मंगोलपुरी चौक पर बैठता था. कोई काम मिल नहीं रहा था. एक दिन राजेश कुमार आया. उसने कहा कि टेफलॉन फैक्ट्री में काम करने के लिए 15 आदमी चाहिए.राजीव ने अपने दोस्त और रिश्तेदारों को गांव से बुलाया. कुल 13 लोग जमा हुए. राजेश ने सबके लिए वहीं रहने खाने और 10 हजार रुपए महीने देने का इंतजाम किया. फिर दो हफ्ते बाद लूथरा ब्रदर्स आए. बोले कि "हम RBI से हैं." सारे लोगों के फोन ले लिए. कहा 24 घंटे काम होगा. कोई भी फैक्ट्री से बाहर नहीं जाएगा. सबको सैलरी मिलेगी घर जाने के टाइम.
लूथरा ब्रदर्स आज से नहीं सात साल से नकली सिक्के बनाने की इंडस्ट्री में हैं. इस लाइन के इतने बड़े कौवा हो गए कि धंधे को बचाने का पूरा हुनर आजमाया. मजदूरों को बता रखा था कि RBI से सिक्के बनाने का कॉन्ट्रैक्ट मिल रखा है. मशीनरी खरीदने से सिक्के खपाने तक पूरा ध्यान रखते थे पकड़ में न आने का.
ये अपने साथ काम करने के लिए उन लोगों को पकड़ते थे जिनको कोई कर्ज अदा करना हो. या रातोंरात पैसा बनाना हो. उनको अच्छी सैलरी का लालच देकर अपने साथ काम करने को राजी कर लेता था. जैसे इन लोगों को किया.
राज कुमार. ये आदमी 6 साल पहले ऑटो चलाता था. क्रिकेट में सट्टा लगाया था 50 लाख का. पूरा हार गया. अब कर्ज पूरा करना था. लूथरा भाइयों से जान पहचान थी. उन्होंने कहा कि हम तुम्हारा कर्ज अदा कर देंगे. तुम हमारे साथ काम करो. बंदा मान गया.
नरेश कुमार कार पार्ट्स का धंधा करता था. हरियाणा की चखरी दादरी में. उसकी दुकान पर लूथरा आए. बताया अपना डायलॉग कि हम RBI से हैं. और सिक्कों का कारोबार करने लगे.

यूं होता था फायदा
इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक बवाना फैक्ट्री से पुलिस ने पांच लोगों को अरेस्ट किया है. इनमें एक महिला भी है. NIA और RBI के अफसर इस गिरफ्तारी के बाद दिल्ली पुलिस से मिले. और डीटेल निकालने के लिए.नरेश को जब पुलिस ने दबोचा तब उसने खुद को पंजाब नेशनल बैंक का एंप्लॉई बताया था. सिक्के क्लाइंट्स को पहुंचाने जा रहा था. बाद में सच सामने आया. पता लगा कि ये लोग पर्चून की दुकानों से लेकर शॉपिंग मॉल्स तक नकली सिक्के पहुंचाते थे. 10 के एक सिक्के पर इन्हें 7 रुपए का फायदा होता था.




















