आज से दस दिन पहले गाजियाबाद के एक गांव में 16 साल की एक लड़की का रेप हुआ. ये बहुत बुरा था, पर इससे भी बुरा कुछ होना था. लड़की रेप की दहशत से निकल नहीं पाई. उसने खुद को आग लगा ली. कुछ दिन तक अलग-अलग अस्पतालों में जूझने के बाद लड़की ने दम तोड़ दिया. अगर आपको लगता है कि इससे बुरा कुछ नहीं हो सकता तो जी कड़ा कीजिए. दुनिया इतनी अच्छी नहीं है. बात 29 मार्च की है. लड़की के मां-बाप और बड़ा भाई घर से काम के लिए निकले. घर में लड़की अकेली थी. शाम हुई तो गांव के ही दो लड़के बबलू और रेंचु उर्फ अमित उसके घर में घुस गए. बबलू घर के अंदर था. अमित घर के बाहर नजर रखे हुए था. बबलू ने लड़की को कमरे में बंद कर उससे बलात्कार किया. इस सब के बीच लड़की का छोटा भाई वहां पहुंच गया. उसे गालियां दी गई और दोनों भाग गए.
लड़की ये सब सह नहीं पाई और खुद को आग लगा ली. वजह शर्म. यहां शर्म उसे नहीं आती है. जिसने किसी के घर में घुसकर पूरी नंगई से ऐसा अपराध किया हो. शर्म उसे आती है, जिसने ये सब सहा हो, उससे मुंह छिपाकर जीने की उम्मीद की जाती है. लड़की का शरीर 30% तक जल गया था. 7 दिन तक कई अस्पतालों में उसकी देह भटकी और अंत में उसने दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में दम तोड़ दिया.
दोनों रेपिस्ट पकड़े गए. इसके बाद एक लोकल नेता उनके घर पहुंचा. उसके साथ गांव के कुछ और लोग भी थे. आप अपनी सुविधा के लिए उन्हें 'इज्जतदार लोग' या 'समाज वाले' पढ़ सकते हैं. लड़की के घर वालों को ये तमाम लोग केस वापिस लेने के लिए कहते हैं. धमकी देते हैं. लड़की के चाचा को मारा-पीटा भी जाता है. पुलिस में इसकी शिकायत हुई, पुलिस ने केस दर्ज कर लिया लेकिन कोई एक्शन नहीं लिया गया. लोग उनके खिलाफ थे, उन पर शिकायत वापिस लेने का दबाव था. उन्हें धमकियां मिल रहीं थीं. उनने थक-हारकर धर्म परिवर्तन की बात कही. इस फैसले में उनके साथ उनके कई लोग आ जाए. इस फैसले के बाद गांव के लोगों में हड़कंप मच गया. आनन-फानन मीटिंग हुई. पुलिस भी आई. धमकी देने वालों ने माफी भी मांगी. गांव और समाज के स्तर पर मामला वहीं रफा-दफा हो गया. लेकिन, लड़की की मां एक सवाल करना चाहती है. हमें अपने घर की जरूरतें पूरी करनी होती है. इसके लिए मैं अपने बच्चे को अकेला घर पर छोड़ आई. क्या यही मेरी गलती है?
धर्म परिवर्तन की बात आते ही एक वर्ग सक्रिय हुआ. माफी मांग ली गई. पुलिस ने भी एक्शन लिया. लगा कि कुछ गलत होने को है उसे रोक लिया जाए. क्योंकि बात धर्म की थी. धर्म कमजोर नहीं पड़ना चाहिए, धर्मांतरण से धर्म पर विपदा आ जाती है न? यही विपदा तब क्यों नहीं आती, जब उसी धर्म में किसी बच्ची का घर में घुसकर बलात्कार होता है. उसी बच्ची की जान जाती है और उसके घर वालों को धमकाया जाता है?