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पंजाब में शिवसेना नेता की हत्या के आरोपी के 'खालिस्तानी कनेक्शन' के बारे में क्या पता चला?

पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने बताया कि उसने किसी ग्रुप के कहने पर हत्या नहीं की है.

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संदीप सिंह को पकड़ती पुलिस (बाएं) और मारे गए शिवसेना नेता सुधीर सूरी. (फोटो: इंडिया टुडे)

पंजाब (Punjab) के अमृतसर में शिवसेना (Shivsena) नेता सुधीर सूरी (Sudhir Suri) की हत्या को लेकर आरोपी संदीप सिंह (Sandeep Singh) से पूछताछ चल रही है. पुलिस ने बताया कि संदीप सिंह उर्फ सनी एक कट्टरपंथी सिख युवक है. उन्होंने कहा कि वो ‘वारिस पंजाब दे’ नाम के संगठन का फॉलोअर है. दिवंगत एक्टर और कार्यकर्ता दीप सिद्धू ने ये संगठन बनाया था, जिसका कथित मकसद पंजाब के अधिकारों की रक्षा और सामाजिक मुद्दे उठाना है.

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पुलिस ने कहा, 

‘वो हाल ही में अमृतपाल सिंह जैसे कट्टरपंथी नेताओं से मिला था. अभी तक की पूछताछ में उसने किसी ग्रुप के कहने पर ये काम करने से इनकार किया है. संदीप सिंह ने कहा कि उसने अपने मन से ये कदम उठाया है.'

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पंजाब पुलिस के मुताबिक, वैसे तो संदीप सिंह का ऐसा कोई इतिहास नहीं रहा है. हालांकि, इंस्टाग्राम और फेसबुक पर उसके हालिया पोस्ट कट्टरपंथी चीजों से भरे हुए थे. पुलिस ने बताया कि संदीप सिंह ने अपने अकाउंट से अमृतपाल सिंह के कई वीडियो शेयर किए हैं. इनमें से एक खालिस्तानी समर्थक नेता से मुलाकात का भी वीडियो था.

इस गोलीबारी को लेकर पंजाब पुलिस पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं कि उनकी मौजूदगी में ही सुधीर सूरी पर हमला कर दिया गया, जबकि उनके पास इंटेलिजेंस से ये जानकारी मिली थी कि नेता पर हमला किया जा सकता है.

विरोध प्रदर्शन के दौरान मारी गोली

मालूम हो कि 4 नवंबर को दोपहर में शिवसेना नेता सुधीर सूरी की गोली मारकर हत्या कर दी गई. ये घटना शहर के एक मंदिर के सामने हुई. शिवसेना नेता मंदिर के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे. ये प्रदर्शन इसलिए हो रहा था क्योंकि मंदिर के बाहर कथित तौर पर कूड़े में भगवान की मूर्तियां मिली थीं. शिवसेना के नेता पुलिस के सामने अपनी बातें रख रहे थे. तभी भीड़ में से अचानक से एक शख्स ने सूरी पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं, जिससे उनकी मौत हो गई.

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सुधीर सूरी को भी भड़काऊ बयान देने के लिए जाना जाता था. उन्हें भी कई बार पंजाब पुलिस ने गिरफ्तार किया था और वो कुछ समय तक जेल में भी थे. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वो साल 2016 से ही खालिस्तान के निशाने पर थे.

इसी साल जुलाई महीने में सूरी सुर्खियों में आए थे. उन्हें एक विशेष समुदाय के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने और धार्मिक भावनाएं भड़काने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया था, जिसमें वो अपने सहयोगियों के साथ मिलकर एक समुदाय के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल कर रहे थे.

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