पठानकोट में ज्वेलर्स भरे पड़े हैं. मतलब पॉपुलेशन कम और ज्वेलरी शॉप्स ज्यादा. जबकि लोकेशन ऐसी है कि कायदे से पठानकोट में इत्ते ज्वेलर्स का जरूरत ही नहीं है. पठानकोट अटैक में संदिग्ध एसपी सलविंदर सिंह के ज्वेलर दोस्त की वजह से अब खुफिया एजेंसियों की निगाह कुछ टेढ़ी हो गई है. इलाके के हचककर भरे ज्वेलर्स की वजह से. शक है कि यहां ज्यादा ज्वेलर्स इसलिए हैं ताकि ड्रग तस्करी से मिले पइसों से गोल्ड खरीदकर सेफ गेम खेला जा सके. 2 जनवरी को पठानकोट हमले में आतंकियों ने एसपी सलविंदर सिंह की गाड़ी यूज की थी. सलविंदर के साथ उनके कुक और ज्वेलर दोस्त राजेश वर्मा थे. सुरक्षा एजेंसियां सलविंदर और राजेश से पूछताछ कर रही हैं. राजेश की वजह से ही जांच एजेंसियों की नजर पठानकोट के ज्वेलर मार्केट पर पड़ी. इकोनॉमिक टाइम्स की खबर के मुताबिक, पठानकोट में करीब 450 ज्वेलर्स शॉप हैं. सिटी में 200 शॉप हैं, जहां की टोटल आबादी करीब 2 लाख है. पठानकोट की मशहूर अंदरुन बाजार में ही 100 से ज्यादा शॉप्स हैं.
आसपास नदियां होने की वजह से ये जगह गोल्ड की तस्करी यहां आसान और पैसा बनाने वाली रही है. इसी की वजह से पठानकोट और गुरदासपुर के इलाकों में तमाम लोग आकर बस गए. ड्रग तस्करी अटरेक्टिव धंधा बन गया है. इस वजह से ज्यादा लोग एक्टिव हो गए हैं: रिटायर्ड पुलिस ऑफिसर
खुफिया एजेंसियों को शक है कि यहां गोल्ड का यूज ड्रग कंसाइनमेंट के बदले पेमेंट करने के लिए किया जाता है. एक फैक्ट ये भी है कि ज्वेलर्स की लोकल ऑर्गेनाइजेशन के पास सिर्फ 70 ज्वेलर रजिस्टर्ड हैं. राजेश वर्मा पठानकोट से 45 किलोमीटर दूर गुरदासपुर में ज्वेलरी का काम करते हैं. हालांकि लोगों का कहना है कि हिमाचल प्रदेश और जम्मू कश्मीर से ज्वेलरी खरीदने वाले पठानकोट आते हैं. इस वजह से यहां ज्वेलर्स ज्यादा हैं.
पंजाब के पूर्व डीजीपी शशिकांत ने कहा, स्लीपर सेल्स और ड्रग तस्करों की मदद करने वाले पक्का हैं. वरना इत्ती छोटी जगह है इतनी सारी ज्वेलरी शॉप कैसे हो सकती हैं. मुझे शक है कि ड्रग तस्कर इसी इलाके में कुछ वक्त के लिए अपना माल छिपाते होंगे.