भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू कहते थे कि ‘आज के बच्चे कल का भारत बनाएंगे. हम उन्हें जिस तरह पालेंगे, वह देश के भविष्य को निर्धारित करेगा.’ लेकिन आज के भारत में बच्चे किस तरह से पाले जा रहे हैं, सहारनपुर के इस स्कूल को देखकर अंदाजा लगाइए. सरकारी स्कूल के सरकारी नल पर सरकारी स्कूल का ड्रेस पहने बच्चे पानी नहीं पी रहे हैं बल्कि बर्तन धो रहे हैं. यानी, जिस स्कूल में उन्हें किताबों की संगत में रहना था. गणित और विज्ञान के सवालों से जूझना था. वहां वो बच्चे स्कूल के बर्तन धो रहे हैं और ऐसा वो अपने मन से नहीं कर रहे हैं बल्कि उनकी टीचर ने उन्हें ये काम दिया है. बच्चों ने खुद ये बात बताई है. अब सोचिए, जहां के स्कूलों में पढ़ने आए बच्चों से बर्तन धुलवाया जाता हो, वह देश का कैसा भविष्य निर्धारित करेंगे!
सहारनपुर के स्कूल में बच्चे बर्तन धो रहे, पूछने पर बोले- 'मैडम कहती हैं तो करते हैं'
सहारनपुर के स्कूल के वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि स्कूल के दो बच्चे हैंडपंप पर बर्तन धोते नजर आ रहे हैं.


इंडिया टुडे से जुड़े राहुल कुमार की रिपोर्ट के अनुसार, ये मामला सहारनपुर के हकीकत नगर के प्राथमिक विद्यालय का है. यहां का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि स्कूल के नन्हे-नन्हे बच्चे हैंडपंप पर बर्तन धोते नजर आ रहे हैं. एक बच्चा है जो पीठ पर बस्ता लादे नल के हैंडल की ओर खड़ा है. वहीं, एक बच्ची है, जो बैग टांगे बैठकर बर्तन धो रही है. ये वीडियो सरकारी स्कूल के कैंपस का है. वीडियो में दिखाई दे रही बर्तन धोती बच्ची का कहना है,
जब मैडम कहती हैं, तभी हम बाल्टी और बर्तन धोने जाते हैं. अपने मन से ऐसा नहीं करते.
यह वीडियो सामने आने के बाद प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं. वायरल होते-होते मामला शिक्षा विभाग तक भी पहुंच गया है. बेसिक शिक्षा अधिकारी कोमल कुमारी ने फोन पर बताया कि वायरल वीडियो उनके संज्ञान में है. पूरे प्रकरण की जांच खंड शिक्षा अधिकारी को सौंप दी गई है और जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी.
वहीं स्कूल की प्रिंसिपल मुनेश राणा ने दोष एक शिक्षामित्र पर मढ़ दिया है. हालांकि, उन्होंने उस शिक्षामित्र का नाम नहीं बताया है. उनका कहना है कि स्कूल में बर्तन धोने के लिए अलग से कर्मचारी की व्यवस्था है, लेकिन वह कर्मचारी उस दिन छुट्टी पर थी क्योंकि उसके पोता हुआ था. प्रिंसिपल ने आगे कहा कि विद्यालय में दो बिल्डिंग हैं. ऐसे में खाना भी दो अलग-अलग जगहों पर बनता है. उन्होंने कहा कि जिस समय ये घटना हुई, उस दिन शायद वो दूसरी वाली बिल्डिंग की ओर नहीं जा पाई थीं और वहां की शिक्षामित्र ने बच्चों से ये काम करवाया होगा. प्रिंसिपल ये भी कहती हैं कि अगर कर्मचारी नहीं आती है तो वह खुद बर्तन साफ करती हैं.
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