इस मीटिंग के अगले दिन यानी 24 अप्रैल को बीजेपी नेताओं ने केजरीवाल और दिल्ली सरकार को ऑक्सीजन के मुद्दे पर घेरना शुरू कर दिया. बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने ट्वीट किया,
"दिल्ली में ऑक्सीजन की कमी के लिए केजरीवाल जिम्मेदार हैं.... दिसंबर 2020 में केंद्र सरकार ने 8 ऑक्सीजन प्लांट लगाने के लिए पैसे दिए थे लेकिन अभी तक एक ही ऑपरेशनल क्यों हो पाया है ये बात दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने आदेश में पूछी है.... दिल्ली सरकार के पास कोई जवाब नहीं है."https://twitter.com/amitmalviya/status/1385828125116751874
असम के बीजेपी नेता हेमंत बिस्वा सरमा ने ट्वीट किया और कहा कि
"प्रिय श्री अरविंद केजरीवाल, कोरोना क्राइसिस के बाद आसाम में 8 ऑक्सीजन प्लांट (5.25 MT/day) लगाए गए. पीएम नरेंद्र मोदी ने पीएम केयर फंड से दिल्ली को 8 प्लांट्स के लिए दिसंबर 2020 में पैसे दिए थे. मोदी को दोष क्यों जब आपकी सरकार का फेल हुई और 8 में से केवल 1 प्लांट ही लगा पाई."https://twitter.com/himantabiswa/status/1385891353842708480
हेमंत बिस्वा के इस आरोप पर आम आदमी पार्टी आसाम की ओर से भी ट्वीट किया गया.
"आदरणीय हेमंत बिस्वा सर, जिन ऑक्सीजन प्लांट्स के इंस्टॉलेशन की आप बात कर रहे हैं वो काम दरअसल मिनिस्ट्री ऑफ हेल्थ के एक ठेकेदार को सौंपा गया था, जो नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार के अंतर्गत आता है. कृपया अरविंद केजरीवाल सरकार के खिलाफ अफवाहें ना फैलाएं."https://twitter.com/AAP4Assam/status/1385928286925037571 दिल्ली हाईकोर्ट ने क्या कहा है? दिल्ली हाईकोर्ट ने 24 अप्रैल को नाराजगी जताते हुए कहा कि अगर कोई भी सरकारी अधिकारी चाहे वो केंद्र का हो, राज्य का हो या फिर स्थानीय प्रशासन का हो, अगर उसने ऑक्सीजन सप्लाई में बाधा डालने की कोशिश की, तो उसे फांसी पर चढ़ा दिया जाएगा. महाराजा अग्रसेन अस्पताल की याचिका पर सुनवाई के दौरान, जस्टिस विपिन सांघी और जस्टिस रेखा पाल्ली की बेंच ने ये बात कही.
दिल्ली सरकार ने कोर्ट से कहा कि उसे केंद्र सरकार की ओर से रोजाना केवल 380 मीट्रिक टन ऑक्सीजन ही मिल रही है और कुछ दिनों से तो केवल 300 मीट्रिक टन ही मिल पा रही है. इस पर कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि "आपने 21 तारीख को कहा था कि दिल्ली को रोजाना 480 मीट्रिक टन ऑक्सीजन मिलेगी. आप बताएं कि ऐसा कब से होगा?"
ऑक्सीजन की मांग अचानक काफी बढ़ गई है और इसलिए किल्लत होने लगी है. फोटो- PTIये है पूरे देश का हाल आपको बता दें कि पीएम केयर्स फंड के तहत 202 करोड़ की लागत से देश भर में 162 PSA (Pressure Swing Adsoprtion यानी ऑक्सीजन बनाने वाला प्लांट) लगाए जाने थे. राज्य सरकारों को केवल इंस्टॉलेशन का पैसा देना था. यहां से अस्पताल तक के लिए पाइपलाइन बनाने का खर्चा अस्पताल को खुद उठाना था. साल की शुरुआत में कोविड काफी कम हो चुका था, ऐसे में काम में लापरवाही बरती गई और अभी तक केवल 33 प्लांट ही इंस्टॉल हो पाए हैं.
इनमें से
-5 मध्य प्रदेश में
-4 हिमाचल प्रदेश में
-3-3 प्लांट चंडीगढ़, गुजरात और उत्तराखंड में
-2-2 बिहार, कर्नाटक और तमिलनाडु में
-और 1-1 आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, दिल्ली, हरियाणा, केरल, महाराष्ट्र, पुडुचेरी, पंजाब और यूपी में लगाया गया है. यूपी जैसे बड़े राज्य में भी केवल 1 प्लांट लग पाया है.
इंडिया टुडे के मुताबिक अप्रैल के आखिर तक 59 प्लांट इंस्टॉल होने थे जबकि मई के अंत तक 89 प्लांट इंस्टॉल हो जाने थे. अप्रैल बीतने वाला है और अभी तक केवल 33 प्लांट ही इंस्टॉल हो पाए हैं. इस परियोजना के लिए केंद्र सरकार ने 201.58 करोड़ का फंड दिया है. इसमें 7 साल की मेंटीनेंस की कीमत भी शामिल है.




















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