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ये 'एम्बेसेडर' हैं, इनकी सरकारी सवारी ऑटोरिक्शा है

कहीं पार्किंग नहीं मिलती, फिर भी ऑटो से चलती हैं.

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फोटो - thelallantop
बीते मंगलवार दिल्ली के इंडिया हैबिटैट सेंटर के बाहर बड़ी अजीब लेकिन मजेदार घटना हुई. मेन गेट के बाहर, सफ़ेद रंग में पुता हुआ ऑटो हैबिटैट की बिल्डिंग के अंदर पार्किंग मांग रहा था. ड्राइवर ने चमचमाता हुआ सूट पहना था. पीछे बैठी लड़की भी अफसर जैसी दिखती थी. ऑटो रिक्शे के ऊपर मेक्सिको का झंडा लगा हुआ था. यही ऑटोरिक्शा महीने भर पहले संसद भवन के बाहर दिख रहा था. सीन वही था. सूट-बूट में ड्राइवर पार्किंग के लिए लड़ रहा था. संसद भवन में पार्किंग तो मिल गई, लेकिन वहां नहीं, जहां गाड़ियां खड़ी होती हैं. ये ऑटो है मेक्सिकन एम्बेसेडर मेल्बा प्रिया का. जी हां, मालकिन हैं वो इसकी. और इसे रजिस्टर करवा के किराए पे नहीं चलवातीं. बल्कि खुद चलती हैं इसमें. ड्राइवर सरकारी है. बाकायदा सरकारी नंबर है जो 1A पर खत्म होता है. मेल्बा इस ऑटो में पिछले 4 महीनों से घूम रही हैं. इंडिया में मेक्सिको की एम्बेसेडर हैं. तो जाहिर सी बात है कि ढेरों मीटंग अटेंड करनी पड़ती हैं. और मेल्बा हर मीटिंग में अपने इसी ऑटो से जाती हैं. ये इनका कोई टेम्पररी ऑटो नहीं, बल्कि ऑफिशियल वेहीकल है. यहां तक कि जब मेक्सिको से अंत्री-मंत्री मिलने आते हैं, ये उसी में बैठकर जाती हैं. "मुझे लगता है दिल्ली में ट्रेवल करने के लिए ऑटो रिक्शा सबसे अच्छी चीज है. जब दिल्ली के इतने सारे लोग ऑटो में चल सकते हैं, तो मैं क्यों नहीं. मैं राज्य सभा टीवी के सीईओ से ऑटो में मिलने गई. और हमें गेट पर ही रोक दिया गया. लोग 3 पहिये वाले वाहनों को पार्किंग की जगह नहीं देना चाहते." मेल्बा का ऑटो आनंद निकेतन में बनी मेक्सिको एम्बेसी की शान है. ऑटो की छत सफ़ेद कैनवस से बनी है. जिसपर मेक्सिको के स्ट्रीट आर्टिस्ट सेनको ने दिल्ली आ कर प्यारे-प्यारे फूल पेंट किए हैं. इंडिकेटर के ऊपर मेक्सिको देश का झंडा है. सामने लिखा है देश का नाम. देश का इससे अच्छा प्रचार क्या होगा? "ऑटो को पेंट करने में ज्यादा वक़्त नहीं लगा. पर खरीदने में महीना लग गया था. मॉडल पसंद किया. फिर मिनिस्ट्री ऑफ़ एक्सटर्नल अफेयर्स में कागज़ फाइल किए. नंबर लेने में एक महीना लग गया." इनके ड्राइवर का नाम है राजेंद्र कुमार. उत्तर प्रदेश से आते हैं. कहते हैं जितना आसान ऑटो चलाना दिखता है, उतना है नहीं. पूरा एक हफ्ता लगा इसकी आदत डालने में. "पहले तो रिक्शे वाले कंफ्यूज हो जाते थे. अब उन्हें मजा आता है. हमारे ड्राइवर को भी बड़ा मजा आता है... ऑटो में इस्तेमाल हुए रंग दिखाते हैं कि हमारा मेक्सिको देश कितना सुंदर है. सबसे बड़ी बात, पॉल्यूशन कम होता है."

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